शेयर बाजार: US चुनाव के बाद कच्चे तेल में हलचल, सेंसेक्स-निफ्टी में तेजी

मुंबई। शेयर बाजार का आउटलुक वैश्विक बाजारों में होने वाले घटनाक्रमों से गहराई से जुड़ा हुआ है, खासकर अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के बाद कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी हलचल से। ईरान से जुड़े विवाद में संभावित बदलाव की उम्मीदों का असर तेल की कीमतों पर पड़ा है। इसके साथ ही अमेरिका और कई एशियाई बाजारों में आई तेजी ने वैश्विक बाजार के माहौल को बेहतर बनाया है। घरेलू इक्विटी बाजारों में विदेशी निवेशकों की भागीदारी फिर से बढ़ी है। शुरुआती आंकड़ों के अनुसार विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने एक और सत्र में भारी खरीदारी की है। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी होंगी कि क्या खरीदारी का यह रुझान जारी रहता है और बदलती भू-राजनीतिक स्थितियों पर निवेशक कैसी प्रतिक्रिया देते हैं। डॉलर के मुकाबले रुपये की चाल, तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और वैश्विक इक्विटी बाजारों का प्रदर्शन कुछ ऐसे प्रमुख कारक हैं जो घरेलू बेंचमार्क सूचकांकों की दिशा तय करेंगे। माना जा रहा है कि ये सभी कारक मिलकर आने वाले दिनों में शेयर बाजार की दिशा तय करेंगे।
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FIIs की खरीदारी से BSE सेंसेक्स 1,400 अंक से ज्यादा उछला
बाजार में आई यह तेजी सिर्फ प्रमुख सूचकांकों तक ही सीमित नहीं रही, बल्कि मिड-कैप और स्मॉल-कैप शेयरों में भी अच्छी बढ़त देखने को मिली। निफ्टी मिडकैप 100 में 1.46% और निफ्टी स्मॉलकैप 100 में 1.49% की तेजी आई। वहीं, निफ्टी 100 भी 1.78% ऊपर चढ़ा। सेक्टर के हिसाब से देखें तो निफ्टी प्राइवेट बैंक 2.55% की बढ़त के साथ सबसे आगे रहा, जबकि निफ्टी रियल्टी में 1.92% की तेजी आई। इसके अलावा, निफ्टी IT 1.72%, निफ्टी ऑटो 1.66%, निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स 1.52% और निफ्टी मीडिया 1.36% चढ़े। निफ्टी FMCG भी 1.08% की बढ़त के साथ बंद हुआ।
विदेशी संस्थागत निवेशकों की फिर से सक्रिय भागीदारी
विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की फिर से सक्रिय भागीदारी ने बाजार को और मजबूती दी। शेयर बाजार के विशेषज्ञों ने कहा- विदेशी संस्थागत निवेशक फिर से बड़े खरीदार के रूप में लौटे हैं। विदेशी फंड का प्रवाह वापस आना घरेलू इक्विटी बाजार के लिए एक सकारात्मक संकेत है। संस्थागत निवेशकों की लगातार भागीदारी से बाजार में चल रहे सुधार को और अधिक मजबूती मिल सकती है।
भारत के लिए राहत के संकेत
भारतीय शेयर बाजारों में गुरुवार को जोरदार तेजी देखने को मिली। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और विदेशी निवेशकों की खरीदारी में आए उछाल ने बाजार के सेंटीमेंट को मजबूत किया। इसके अलावा ब्रेंट क्रूड की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर से नीचे गिरकर लगभग 95 डॉलर पर आ गईं। इस गिरावट से भारत को कुछ राहत मिली है, जो तेल आयात पर काफी हद तक निर्भर है। साथ ही इससे घरेलू शेयर बाजारों को भी सहारा मिला। विदेशी फंडों के प्रवाह ने भी बाजार को मजबूती दी है। नवंबर में केवल तीन ट्रेडिंग सत्रों के दौरान विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयरों में लगभग 17,235 करोड़ रुपए का निवेश किया, जो संस्थागत निवेशकों की वापसी का संकेत है।




















