
भोपाल। अपने बयानों से हमेशा चर्चाओं में बने रहने वाले बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का एक और बयान सामने आया है। इस बयान में उन्होंने वर्ग विशेष पर टिप्पणी करते हुए कहा है कि मेरे अंगने में तुम्हारा क्या काम है! दरअसल, राजधानी भोपाल आए पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि मक्का मदीना में हमें नहीं बुलाया जाता, आपकी मस्जिदों के सामने हमारी दुकानें नहीं लगती हैं तो ऐसे में हमारे अंगने में तुम्हारा क्या काम है? इस बयान से वह बता रहे हैं कि हमारे धार्मिक स्थलों के सामने वर्ग विशेष के लोगों को भी दुकानें नहीं लगानी चाहिए, बल्कि उन्होंने साफ कह दिया कि अगर हिंदू मस्जिदों में आए तो उन्हें जूते मारो।
“भारतीयों को बंटना नहीं है, बंटेंगे तो कटेंगे”
बागेश्वर धाम के प्रमुख पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ‘बंटेंगे तो कटेंगे’ वाले बयान पर अपनी राय व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यह बयान राजनीतिक दृष्टि से चाहे जैसा हो, लेकिन सामाजिक और राष्ट्रीय दृष्टि से यह सही संदेश देता है। उन्होंने आगे कहा कि भारतीयों को एकजुट रहना चाहिए, क्योंकि अगर देश के लोग बंटेंगे, तो विदेशी ताकतें इसका लाभ उठाएंगी।
पंडित धीरेन्द्र शास्त्री ने कहा कि योगी आदित्यनाथ का नारा “बंटेंगे तो कटेंगे” सही है, लेकिन इसे राजनीतिक के बजाय सामाजिक दृष्टिकोण से देखना चाहिए। उन्होंने कहा, “अगर हम भारतीय आपस में बंटेंगे, तो चीन और पाकिस्तान जैसे देश हम पर हावी होंगे। विदेशी ताकतें हमारे देश की एकता को तोड़ने का प्रयास कर सकती हैं।”
शास्त्री ने यह भी स्पष्ट किया कि वह किसी राजनेता के बयान पर टिप्पणी करने के पक्ष में नहीं हैं, लेकिन एक हिंदुस्तानी के रूप में उन्होंने इस नारे को भारतीय एकता के दृष्टिकोण से देखा।
गजवा ए हिन्द वाले बढ़ा रहे अपनी संख्या
बागेश्वर धाम प्रमुख धीरेन्द्र शास्त्री ने बांग्लादेशी घुसपैठियों और रोहिंग्या शरणार्थियों को लेकर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि गजवा-ए-हिंद के समर्थक एक साजिश के तहत अपनी संख्या बढ़ा रहे हैं, अधिक बच्चे पैदा कर रहे हैं और विदेशों से लोगों को बुलाकर भारतीय वोट बैंक को प्रभावित करने का प्रयास कर रहे हैं। विधर्मी लोग जिन्हें हिंदुत्व से बैर है, जिन्हें वंदे मातरम बोलने से दिक्कत है, जिन्हें राष्ट्रगान गाने से दिक्कत है। शास्त्री ने इसे भारत की सुरक्षा और संस्कृति के लिए खतरा बताया और सरकार व जनता से आह्वान किया कि विदेशी घुसपैठियों और राष्ट्रविरोधी तत्वों को शरण न दी जाए। उन्होंने कहा कि ऐसे षड्यंत्रों के खिलाफ तुरंत कदम उठाने की जरूरत है।
भगवाधारियों को दी राजनीति में आने की सलाह
भगवाधारियों को मुखर रूप से राजनीति में सक्रिय होना चाहिए। जो भगवाधारियों को राजनीति से दूर रहने की सलाह देते हैं, वे मूर्ख हैं। बलात्कारी, दुराचारी और भ्रष्टाचारी राजनीति कर सकते हैं तो भगवाधारी राजनीति क्यों नहीं कर सकते। मेरा मानना है कि मंदिरों में, मठों में और गुफाओं में बैठे जितने महात्मा हैं, उन्हें राजनीति में हिस्सेदारी करनी चाहिए।
हिंदू तुम्हारी मस्जिदों में घुसें, तो तुम उन्हें जूते मारो
धीरेन्द्र शास्त्री ने कुंभ में गैर हिंदुओं की एंट्री पर अपने बयान को दोहराते हुए कहा, “मेरे अंगने में तुम्हारा क्या काम है। तुम हमारे यहां आकर क्या करोगे? धंधा करोगे, मूत्र कांड करोगे, थूक कांड करोगे?”
उन्होंने आगे कहा, “हम तुम्हारी मस्जिदों में नहीं घुसते, तो तुम हमारे यहां क्यों आओगे? अगर हमारे हिंदू तुम्हारी मस्जिदों में घुस जाएं, तो तुम उन्हें जूते मारो।”
21 नवंबर से शुरू होगी हिंदू एकता पदयात्रा
पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने घोषणा की है कि 21 नवंबर से 29 नवंबर तक हिंदू एकता पदयात्रा आयोजित की जाएगी। इस यात्रा का उद्देश्य भारत के सनातनियों को जागरूक करना, जाति-पांति, ऊंच-नीच और भेदभाव को समाप्त करना है।
उन्होंने कहा, “यह समय भारत के लिए करो या मरो का समय है। देश पर संकट गहरा रहा है और इसे दूर करने के लिए हमें एकजुट होकर कदम उठाने होंगे। इसी संदेश के साथ हम पदयात्रा करेंगे।”
पाकिस्तान न जाने के BCCI के फैसले का समर्थन
पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने भारतीय क्रिकेट टीम के पाकिस्तान न जाने के BCCI के फैसले को सही ठहराते हुए कहा, “यह उचित निर्णय है। पाकिस्तान एक भिखमंगा देश है। उनकी स्थिति खराब है और वहां जाने का कोई औचित्य नहीं है। यदि खान-पान और व्यवहार ठीक न हो, तो हम बेइज्जती करवाने और भूखे मरने वहां क्यों जाएं?”
उन्होंने कहा, “पाकिस्तान ने हर बार विश्वासघात किया है, वादे तोड़े हैं और समझौतों का उल्लंघन किया है। वहां के हालात इतने खराब हैं कि उनके भरोसे पर यकीन नहीं किया जा सकता। पहले वह भरोसा जीतें और भारत की शरण में आएं, फिर कोई बात होगी। फिलहाल, वे चीन के सहारे जिंदा हैं, उन्हें आत्मनिर्भर होना पड़ेगा।”
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