अशोक गौतम,भोपाल। प्रदेश में पहली बार ऐसा हो रहा है जब नर्मदा के संरक्षण के लिए शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में एक साथ काम होंगे। इसके लिए कंसल्टेंसी आईआईटी इंदौर करेगा। यह काम नमामि गंगे अभियान के तहत किया जाएगा। तरल-ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के स्थाई काम होंगे। इस पर पंचायत और निकाय मॉनिटरिंग करेंगे। घाटों पर बने शौचालय, स्नान कक्ष का पानी नदी में मिलने से रोका जाएगा।
नर्मदा के किनारे और उसके कैचमेंट क्षेत्र में पौधरोपण किया जाएगा। सेटेलाइट सर्वे होगा, जहां पर कम हरियाली है, वहां बढ़ाई जाएगी। इससे जल संरक्षण के साथ मिट्टी के कटाव और नदी के तेज बहाव को कम किया जा सकेगा। यह काम किसानों, वन, पंचायत, कृषि, उद्यानिकी विभाग के साथ मिलकर काम करेंगे।
बाढ़ क्षेत्र में आने वाली बस्तियों का पुनर्वास किया जाएगा। यहां जो कच्चे मकान, झुग्गियां और अस्थाई आवास हैं, उन्हें पक्के आवास की व्यवस्था की जाएगी। अगर वो दूसरी जगह बसना चाहते हैं तो इसमें उनका सहयोग होगा।
नर्मदा के घाटों का विकास होगा। घाटों का पक्का निर्माण, घाट से पानी तक पहुंचने के लिए सीढ़ियां, जाली, रेलिंग, लाइट, पीने के लिए पानी, प्रकाश, रैन बसेरा, शौचालय सीवेज वाटर ट्रीटमेंट प्लांट लगाया जाएगा।
नर्मदा परिक्रमा क्षेत्र का विकास होगा। यहां से पगडंडियों को लोगों के चलने ते लिए तैयार किया जाएगा, कच्ची सड़कें बनाई जाएगी। पानी, ठहरने के लिए आश्रम, छांव के लिए धार्मिक महत्व के पौधे लगाए जाएंगे।
नर्मदा के किनारे बने धार्मिक, पर्यटन ऐतिहासिक महत्व के स्थलों, भवनों, मठ-मंदिरों का विकास होगा। सड़कों से वहां तक के लिए पहुंच मार्ग बनाया जाएगा। इसके अलावा इनके महत्व के संबंध में लोगों को जागरुक किया जाएगा।
नर्मदा को अविरल बनाने और जल को प्रदूषित होने से रोकने के लिए एक्शन प्लान तैयार किया जा रहा है, आईआईटी इंदौर कंसल्टेंसी करेगी। पांच वर्ष में पर्यटन, धार्मिक स्थल, घाटों का समग्र विकास होगा।
संकेत भोंडवे, आयुक्त, नगरीय विकास एवं आवास विभाग