Naresh Bhagoria
19 Jan 2026
जबलपुर। पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री व सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता पी. चिदम्बरम सोमवार को मप्र हाईकोर्ट की मुख्यपीठ के समक्ष हाजिर हुए। उन्होंने 35 करोड़ रुपए के बकाया बिजली बिल से संबंधित मामले में चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच के सामने अल्ट्राटेक कंपनी की ओर से पक्ष रखा। सुनवाई के बाद बेंच ने अल्ट्राटेक कंपनी को आंशिक राहत देते हुए उसके (कंपनी के) नाम पर नया बिजली कनेक्शन देने के निर्देश दिए हैं।
डिवीजन बेंच ने स्पष्ट किया है कि इस अंतरिम आदेश के आधार पर अल्ट्राटेक कंपनी आगे कोई दावा नहीं कर सकेगी। मप्र पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी की ओर से दाखिल मामले पर अगली सुनवाई 24 मार्च को होगी। बिजली कंपनी की ओर से दाखिल इस अपील में हाईकोर्ट की सिंगल बेंच द्वारा 26 मई 2025 को दिए फैसले को चुनौती दी गई है।
दरअसल, मप्र विद्युत वितरण कंपनी ने जेपी सीमेन्ट रीवा बेला पर 35 करोड़ रुपए के बकाया बिजली बिल की रिकवरी निकाली थी। इसी दौरान यह कंपनी अल्ट्राटेक सीमेन्ट कंपनी ने टेकओवर कर ली। रिकवरी के खिलाफ अल्ट्राटेक कंपनी ने सिंगल बेंच के समक्ष दाखिल याचिका में कहा था कि यह देनदारी जेपी सीमेन्ट कंपनी की है, इसलिए उससे यह वसूली नहीं की जा सकती। सिंगल बेंच ने 26 मई 2025 को फैसला सुनाते हुए कहा था कि बकाया राशि की वसूली याचिकाकर्ता अल्ट्राटेक कंपनी के बजाए जेपी सीमेन्ट कंपनी से ही की जाए।
इसके बाद भी कंपनी द्वारा की जा रही वसूली की कार्रवाई पर एकलपीठ ने विद्युत वितरण कंपनी के चीफ जनरल मैनेजर को तलब किया था। इस पर विद्युत वितरण कंपनी की ओर से यह अपील 13 जनवरी को दायर की गई। अपील पर सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान विद्युत वितरण कंपनी की ओर से अधिवक्ता अंशुमान सिंह और अल्ट्राटेक कंपनी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता पी. चिदम्बरम हाजिर हुए। सुनवाई के बाद डिवीजन बेंच ने नोटिस जारी कर अंतरिम आदेश पारित किए।