Garima Vishwakarma
19 Jan 2026
पानीपत के खटीक बस्ती में एक परिवार ने अपने कुत्ते रॉकी पंवार को सिर्फ पालतू नहीं, बल्कि अपने घर का हीरो माना और जब रॉकी ने इस दुनिया को अलविदा कहा, तो उन्होंने उसे इंसान जैसी विदाई दी, जैसे कोई बड़ा सितारा चले गया हो। पालतू कुत्ते की मौत के बाद उसकी अंतिम विदाई पूरी तरह इंसान जैसी तरीके से की। इतना ही नहीं, उन्होंने उसे अपने घर का सरनेम पंवार भी दे दिया और उसकी याद में समाज को एक भावुक संदेश दिया।
बलबीर पंवार के घर में पिछले 13 वर्षों से एक डॉगी रहता था जिसका नाम था रॉकी पंवार। परिवार उसे घर का सबसे प्यारा सदस्य मानता था। रॉकी के साथ उनका रिश्ता सिर्फ मालिक-पशु का नहीं, बल्कि भाई-भाई जैसा था। कुछ समय पहले रॉकी को किडनी की बीमारी हो गई थी। परिवार ने उसे कई अस्पतालों में इलाज करवाया, लेकिन रॉकी को बचाया नहीं जा सका। रॉकी की मौत के बाद परिवार गहरे शोक में डूब गया।

रॉकी की मौत के बाद परिवार ने उसकी अस्थियों को हरिद्वार ले जाकर गंगा में विसर्जित किया। वहां पर उन्होंने पूजा-अर्चना भी की। बलबीर पंवार ने बताया कि यह कदम उन्होंने रॉकी के प्रति अपने प्यार और सम्मान के कारण उठाया। उनका कहना था कि जानवर भी इंसानों की तरह वफादारी दिखाते हैं और उन्हें भी सम्मान मिलना चाहिए।
रॉकी की तेरहवीं पर परिवार ने घर में हवन कराया और विशाल भंडारे का आयोजन किया। भंडारे में मोहल्ले के लोग भी आए और रॉकी को भावभीनी श्रद्धांजलि दी। यह कार्यक्रम खटीक बस्ती में चर्चा का विषय बन गया।

कार्यक्रम के दौरान बलबीर की बेटी वर्षा और परिवार के अन्य सदस्य भावुक हो गए। वर्षा ने कहा, रॉकी हमारे लिए सिर्फ एक कुत्ता नहीं, मेरा भाई था। उसके जाने से घर में जो खालीपन आया है, उसे कोई नहीं भर सकता। बलबीर पंवार ने कहा कि जानवरों के प्रति संवेदनशीलता समाज के लिए बहुत जरूरी है, क्योंकि वे बेजुबान होकर भी सबसे ज्यादा वफादार होते हैं।
पानीपत की खटीक बस्ती में हुए इस आयोजन ने यह संदेश दिया कि प्रेम और सम्मान सिर्फ इंसानों तक सीमित नहीं होता। रॉकी की कहानी ने यह साबित किया कि अगर इंसान दिल से चाहें तो जानवरों को भी इंसान जैसी जगह दी जा सकती है।