Naresh Bhagoria
20 Jan 2026
ब्रजेंद्र वर्मा,भोपाल। झीलों की नगरी में बड़े तालाब के कैचमेंट एरिया पर लगातार कब्जे किए जा रहे हैं। खानूगांव, लालघाटी से लेकर भैंसाखेड़ी तक कैचमेंट में 50 मीटर के दायरे में धड़ल्ले से अवैध निर्माण किए जा रहे हैं। वहीं सूरज नगर, विशनखेड़ी, सेवनियां गौड़, नीलबड़ सहित अन्य ग्रामीण क्षेत्रों में तालाब के 250 मीटर के दायरे में भी भूमाफिया कब्जे कर रहे हैं। हेल्थ क्लब, बॉटनीकल गार्डन, फार्म हाउस के नाम पर कई बड़े-बड़े बंगले, कोठियां, मैरिज गार्डन, होटल, रेस्टोरेंट, रिसोर्ट बन चुके हैं।

राजधानी के बड़े तालाब के हालात ये हैं कि तालाब को संरक्षित करने के लिए जो मुनारें लगी हैं, उन्हें कहीं पर पीछे खिसका दिया गया है तो कहीं पर इन्हें हटा दिया गया है। पीपुल्स रिपोर्टर की पड़ताल में सामने आया कि अवैध निर्माण तो ही रहे हैं, साथ ही इनका सीवेज भी बड़े तालाब में जा रहा है। हालांकि इसको लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) सख्त है पर प्रशासन बुलडोजर चलाना तो दूर बीते ढाई महीने से सीमांकन तक पूरा नहीं कर पाया है।
अक्टूबर 2025 में बड़े तालाब का सीमांकन खानूगांव से शुरू किया गया था, लेकिन तालाब किनारे दलदल का बहाना बनाकर इसे बंद कर दिया था। फिर 4 नवंबर से एसआईआर शरू हो गया, तब से अब तक प्रशासन के अधिकारी एसआईआर का नाम लेकर सीमांकन कराने से बच रहे हैं।

निमयानुसार तालाब के कैचमेंट एरिया में हेल्थ क्लब, बॉटनीकल गार्डन बना सकते हैं। किसी भी तरह की पक्की बाउंड्रीवॉल, बंगले, रिसॉर्ट, होटल, रेस्टोरेंट नहीं बना सकते। प्लांटिंग करके कॉलोनियां विकसित नहीं कर सकते।
बड़े तालाब के कैचमेंट एरिया में अधिकांश निर्माण रसूखदारों ने ही किए हैं। खानूगांव से लेकर भैंसोखड़ी तक बड़े-बड़े व्यापारी, विधायक,मंत्री, आईएएस, आईपीएस, पूर्व मुख्य सचिव ने मैरिज गार्डन, रेस्टोरेंट, रिसॉर्ट, बंगले व कोठियां बनाई हैं। एनजीटी के बार-बार आदेश के बाद भी सीमांकन पूरा नहीं किया जा रहा है, क्योंकि यदि सीमांकन कराता है तो रसूखदारों के नाम सामने आ जाएंगे।
शहर के वरिष्ठ पर्यावरणविद् डॉक्टर सुभाष सी पांडेय ने एक अध्ययन किया। जिसमें पता चला कि बड़े तालाब के कैचमेंट एरिया में बड़ी संख्या में अवैध रूप से निर्माण होने से बड़े तालाब की जैव विविधता गिरती जा रही है। पांडेय के अध्ययन के बाद यह बात एप्को ने भी मानी हैं। जिसमें 20 साल में बड़े तालाब की जैव विविधता में 81 प्रतिशत की कमी आई है। चौंकाने वाली बात है कि बड़े तालाब में मल-मूत्र व रसायन मिलने से उसका पानी ए से गिरकर सी कैटगरी का हो गया है।
2022 में हाईकोर्ट में याचिका लगाई है, जिसमें राज्य वेटलैंड अथॉरिटी को पार्टी बनाकर राज्य शासन के खिलाफ केस लगाया है। बड़े तालाब के शहरी कैचमेंट एरिया 50 मीटर और ग्रामीण एरिया में 250 मीटर का तालाब प्रभाव क्षेत्र होना चाहिए। चिन्हांकन व सीमांकन होना चाहिए। तालाब को बचाने के लिए अवैध निर्माण हटाने जरूरी है। यदि बेतरतीब कॉलोनियां विकसित होती गर्इं तो पर्यावरण को गहरी क्षति पहुंचेगी।
डॉ सुभाष सी पांडे, वरिष्ठ पर्यावरणविद्
साल-2020 में एनजीटी में याचिका लगाई थी। इस पर भदभदा डैम के पास होटल ताज के सामने प्रशासन ने बस्ती हटा दी, लेकिन बड़े तालाब के कैचमेंट एरिया में रसूखदारों के अवैध निर्माणों पर प्रशासन का बुलडोजर नहीं चल रहा है। एनजीटी ने प्रशासन ने बड़े तालाब पर होने वाले निर्माण, अतिक्रमण की रिपोर्ट मांगी हैं, लेकिन कोई प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारियों को कोई असर नहीं पड़ रहा।
धर्मवीर शर्मा, पर्यावरण एडवोकेट
सवाल : बड़े तालाब के कैचमेंट एरिया खत्म हो रहा है, सीमांकन कब तक पूरा होगा?
जवाब : खानूगांव से शुरू कराया था, लेकिन दलदल के कारण बंद करना पड़ा था।
सवाल : अब तक फिर से सीमांकन शुरू कराया जाएगा?
जवाब : 4 नवंबर से प्रशासन के अमला एसआईआर में लगा हुआ है। अब जल्द ही फिर से सीमांकन शुरू कराया जाएगा।
सवाल : कब तक तालाब के कैचमेंट एरिया से अवैध निर्माण हटेंगे?
जवाब : सीमांकन पूरा करके रिपोर्ट तैयार की जाएगी। इसके बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।