Download App
Download on the App StoreGet it on Google Play
Breaking News

दिल्ली SIR में आडवाणी और धनखड़ समेत कई दिग्गजों को नोटिस, खड़गे ने चुनाव आयोग पर उठाए सवाल

दिल्ली SIR के दौरान लालकृष्ण आडवाणी, जगदीप धनखड़ और एस. जयशंकर समेत कई प्रमुख लोगों को नोटिस मिलने पर मल्लिकार्जुन खड़गे ने चुनाव आयोग पर सवाल उठाए। दिल्ली CEO ने कहा कि नोटिस का मतलब नाम हटना नहीं है।
दिल्ली SIR में आडवाणी और धनखड़ समेत कई दिग्गजों को नोटिस, खड़गे ने चुनाव आयोग पर उठाए सवाल
खड़गे ने चुनाव आयोग पर उठाए सवाल

नई दिल्ली। दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर की प्रक्रिया के दौरान कई प्रमुख राजनीतिक और सार्वजनिक हस्तियों को नोटिस जारी किए जाने के बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। नोटिस पाने वालों में पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी, पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, विदेश मंत्री एस. जयशंकर समेत कई अन्य प्रमुख नाम शामिल बताए गए हैं। अधिकारियों के अनुसार ये नोटिस मतदाता विवरण में विसंगतियों, पिछले पुनरीक्षण से रिकॉर्ड का मिलान नहीं होने या अन्य सत्यापन संबंधी मामलों से जुड़े हैं। इसी मुद्दे को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने चुनाव आयोग और एसआईआर प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। सोशल मीडिया पर जारी एक विस्तृत पोस्ट में खड़गे ने आरोप लगाया कि कांग्रेस शुरुआत से ही एसआईआर की प्रक्रिया को त्रुटिपूर्ण बता रही है और अब दिल्ली में प्रमुख नेताओं को नोटिस मिलने के बाद इस पर नए सवाल खड़े हो रहे हैं।

X Post

आडवाणी से लेकर जयशंकर और धनखड़ तक नोटिस

दिल्ली में चल रहे एसआईआर के दौरान मतदाता रिकॉर्ड के सत्यापन के लिए बड़ी संख्या में मतदाताओं को नोटिस जारी किए जा रहे हैं। रिपोर्टों के मुताबिक करीब 33 लाख मतदाताओं के रिकॉर्ड को विभिन्न कारणों से सत्यापन के लिए चिह्नित किया गया है। इनमें ऐसे मतदाता भी शामिल हैं जिनके वर्तमान रिकॉर्ड को पिछले गहन पुनरीक्षण के रिकॉर्ड से जोड़ा नहीं जा सका या जिनके विवरण में तार्किक विसंगतियां पाई गईं। इसी प्रक्रिया में लालकृष्ण आडवाणी, एस. जयशंकर और जगदीप धनखड़ जैसे प्रमुख नाम भी सामने आए हैं। आडवाणी के परिवार के कुछ सदस्यों को भी ‘नो मैपिंग’ के आधार पर नोटिस दिए जाने की जानकारी सामने आई है।

खड़गे ने पूछा- क्या VIP और आम मतदाता की अलग श्रेणी है?

मल्लिकार्जुन खड़गे ने चुनाव आयोग की ओर से जारी उस आधिकारिक जानकारी पर सवाल उठाया जिसमें कुछ मतदाताओं को ‘VIP/marked electors’ के रूप में संदर्भित किया गया है। खड़गे ने पूछा कि क्या सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार की व्यवस्था में अब VIP मतदाता और आम मतदाता जैसी कोई अलग श्रेणी बनाई जा रही है। उन्होंने इसे संविधान में निहित एक व्यक्ति, एक वोट, एक समान मूल्य के सिद्धांत से जोड़ते हुए सवाल उठाया कि क्या किसी मतदाता के वोट को दूसरे से ज्यादा महत्व दिया जा सकता है। खड़गे ने अपने बयान में यह भी आरोप लगाया कि एसआईआर की प्रक्रिया अब उन लोगों तक भी पहुंच रही है जो राजनीतिक और प्रशासनिक व्यवस्था के शीर्ष स्तर पर रहे हैं। उन्होंने लालकृष्ण आडवाणी, विदेश मंत्री, दिल्ली के उपराज्यपाल, राज्यसभा सांसद, पूर्व केंद्रीय मंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री समेत कई नामों का उल्लेख किया।

बंगाल के आंकड़ों का भी खड़गे ने किया जिक्र

कांग्रेस अध्यक्ष ने अपने पोस्ट में पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के बाद हुई अपीलों का भी उल्लेख किया। खड़गे के मुताबिक, अब तक जिन मामलों में अपील पर फैसला हुआ है, उनमें करीब 93 प्रतिशत अपीलकर्ताओं के पक्ष में फैसला आया है और 1,13,943 लोगों के नाम दोबारा मतदाता सूची में शामिल किए जाएंगे। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि इतनी बड़ी संख्या में अपीलों के बाद नाम बहाल किए जा रहे हैं तो शुरुआत में नाम हटाने का आधार क्या था। हालांकि उपलब्ध आंकड़ा केवल अब तक निपटाई गई अपीलों से संबंधित है। रिपोर्ट के मुताबिक बड़ी संख्या में अन्य अपीलों पर अभी फैसला होना बाकी है। इसलिए 93 प्रतिशत का आंकड़ा सभी हटाए गए मतदाताओं पर लागू नहीं होता।

ये भी पढ़ें: दिन में दो-चार बार बीवी से Love You बोलें....ओवैसी का दिखा लव गुरु अंदाज , 2 अक्टूबर तक गठबंधन पर फैसला

13.8 करोड़ मतदाताओं के आंकड़े पर भी सवाल

खड़गे ने एसआईआर के शुरुआती तीन चरणों से जुड़े आंकड़ों का हवाला देते हुए दावा किया कि 31 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 13.8 करोड़ मतदाता मतदाता सूची से बाहर हुए हैं। उन्होंने इसे 94.78 करोड़ मतदाताओं की कुल संख्या के मुकाबले करीब 14.61 प्रतिशत बताया और सवाल किया कि करोड़ों सामान्य मतदाताओं के मामले में चुनाव आयोग की ओर से कितनी जानकारी सार्वजनिक की जा रही है। खड़गे ने अपने बयान में यह भी सवाल उठाया कि प्रमुख लोगों के नोटिस को लेकर प्रेस विज्ञप्ति जारी की जा रही है जबकि आम मतदाताओं को लेकर पर्याप्त जानकारी सार्वजनिक नहीं की जा रही।

चुनाव आयोग ने कहा- नोटिस का मतलब नाम हटना नहीं

इस पूरे विवाद के बीच दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि एसआईआर के दौरान किसी मतदाता को नोटिस जारी किए जाने का मतलब यह नहीं है कि उसका नाम मतदाता सूची से अपने आप हटा दिया जाएगा। दिल्ली CEO के अनुसार किसी मतदाता का नाम हटाने से पहले उसे अपना पक्ष रखने का अवसर देना जरूरी है। इसके बाद ही उचित और कारणयुक्त आदेश के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा सकती है। ऐसे आदेश के खिलाफ अपील का प्रावधान भी है। चुनाव अधिकारियों के अनुसार नोटिस का उद्देश्य मतदाता रिकॉर्ड में मौजूद विसंगतियों को स्पष्ट करना और आवश्यक दस्तावेज या जानकारी हासिल करना है। यानी नोटिस मिलना अपने आप में मताधिकार खत्म होने का निर्णय नहीं है।

ये भी पढ़ें: अब तक कार्रवाई क्यों नहीं....? बिहार में लड़की से बदसलूकी मामले में राहुल गांधी ने सरकार से मांगा जवाब

SIR को लेकर बढ़ी राजनीतिक बहस

दिल्ली में एसआईआर की प्रक्रिया के दौरान प्रमुख राजनीतिक हस्तियों के नाम सामने आने के बाद मतदाता सूची के सत्यापन को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। कांग्रेस इस प्रक्रिया के मानकों और पारदर्शिता पर सवाल उठा रही है, जबकि चुनावी अधिकारी इसे मतदाता रिकॉर्ड को दुरुस्त करने और विसंगतियों को दूर करने की प्रक्रिया बता रहे हैं। फिलहाल नोटिस पाने वाले मतदाताओं से संबंधित रिकॉर्ड और दस्तावेजों के सत्यापन की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। किसी व्यक्ति का नाम मतदाता सूची से हटेगा या नहीं, यह निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने और संबंधित मतदाता को अपना पक्ष रखने का अवसर दिए जाने के बाद ही तय होगा।

Sumit  Shrivastava
By Sumit Shrivastava

सुमित श्रीवास्तव एक अनुभवी मीडिया प्रोफेशनल, बिजनेस पत्रकार और शोधकर्ता हैं। मास कम्युनिकेशन में M.P...Read More

Latest Posts