सीहोर: नाबालिग से दुष्कर्म मामला, दोषी को कोर्ट ने सुनाई 20 साल की सजा

सीहोर। अदालत ने अन्य धारा में भी पांच वर्ष के सश्रम कारावास और कुल 10 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। साथ ही पीड़िता को दो लाख रुपये प्रतिकर दिए जाने की अनुशंसा की गई है।
स्कूल जाने के लिए निकली थी किशोरी, रास्ते में मिला आरोपी
अभियोजन के अनुसार, घटना 25 अक्टूबर 2025 की है। किशोरी के पिता सुबह करीब आठ बजे वाहन चलाने के काम से बस स्टैंड चले गए थे। उसकी मां भी काम के लिए घर से निकल गई थी। दोपहर में मां को पता चला कि किशोरी स्कूल नहीं गई और घर से कहीं चली गई है। इसके बाद परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की।
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बाजार में दिलाए कपड़े, फिर कमरे पर ले गया
पीड़िता के पिता ने थाना नसरुल्लागंज में रिपोर्ट दर्ज कराई। अभियोजन के मुताबिक, किशोरी ने बताया कि वह आरोपी विशाल इवने को करीब एक महीने से जानती थी। घटना वाले दिन सुबह लगभग 10:30 बजे स्कूल जाने के लिए निकली तो रास्ते में आरोपी मिल गया। वह घूमने के बहाने उसे बाइक पर बैठाकर बाजार ले गया। वहां कपड़ों की एक जोड़ी दिलाई और उन्हें कमरे पर रखने की बात कहकर अपने बुआ के बेटे के कमरे पर ले गया।
कमरे में अकेला पाकर जबरदस्ती करने का आरोप
पीड़िता के बयान के अनुसार, कमरे में कोई अन्य व्यक्ति मौजूद नहीं था। आरोप है कि वहां विशाल ने उसकी मर्जी के विरुद्ध शारीरिक संबंध बनाए। अगले दिन पुलिस से परिजनों को किशोरी के मिल जाने की सूचना मिली। इसके बाद पुलिस ने मामले की जांच की और साक्ष्य जुटाकर न्यायालय के समक्ष अभियोग पत्र प्रस्तुत किया।
अभियोजन के तर्क और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर फैसला
मामले की सुनवाई प्रथम अपर सत्र न्यायालय, तहसील भैरूंदा में हुई। अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक मनोज जाट ने पैरवी की। अभियोजन के मौखिक अंतिम तर्कों और वैज्ञानिक साक्ष्यों पर विचार करने के बाद न्यायालय ने आरोपी विशाल इवने को दोषी ठहराया।
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20 साल का सश्रम कारावास
न्यायालय ने आरोपी को धारा 3/4 पॉक्सो एक्ट के तहत 20 वर्ष के सश्रम कारावास और धारा 87 बीएनएस के तहत पांच वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। कुल 10 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया। इसके अलावा पीड़िता को दो लाख रुपये प्रतिकर दिए जाने की अनुशंसा की गई। इस मामले में अभियोजन की प्रभावी पैरवी के बाद न्यायालय ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर फैसला सुनाया।




















