
भारत और रूस के बीच एक रक्षा समझौते की खबर, जिसमें भारत को लंबी दूरी वाली नई मिसाइलें मिल सकती हैं।
अभी तक इसका ऐलान नहीं हुआ है, लेकिन बात लगभग तय हो चुकी है। अगर यह समझौता पूरा होता है तो भारतीय वायु सेना को बड़ी ताकत मिलेगी और देश की सुरक्षा पहले से ज्यादा मजबूत हो सकती है।
भारत और रूस के बीच एक बड़े रक्षा समझौते की चर्चा, जिसने सुरक्षा मामलों के जानकारों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। दोनों देशों के बीच एक ऐसी डील लगभग तय हो चुकी है जिसके तहत भारत को अत्याधुनिक लंबी दूरी की एयर-टू-एयर मिसाइलें मिल सकती हैं। इस समझौते की घोषणा अभी बाकी है लेकिन कई अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स इस बात का संकेत दे रही हैं कि यह सौदा अंतिम चरण में पहुंच चुका है। अगर यह डील पूरी होती है तो इससे भारत की हवाई ताकत में बड़ा इजाफा हो सकता है।
यह सौदा करीब 1.2 अरब अमेरिकी डॉलर का हो सकता है। इसमें लगभग 300 नई तकनीक वाली मिसाइलों की खरीद शामिल बताई जा रही है। यह मिसाइलें दुश्मन के विमानों को लंबी दूरी से ही निशाना बनाने में सक्षम हैं। यह डील ऐसे समय में सामने आ रही है जब एशिया में कई देश अपनी सैन्य ताकत को तेजी से बढ़ा रहे हैं और आपसी सहयोग भी मजबूत कर रहे हैं। ऐसे माहौल में भारत का यह कदम रणनीतिक रूप से काफी अहम माना जा रहा है।
भारत को जो मिसाइलें मिल सकती हैं, वे R-37M श्रेणी की हैं, जिन्हें दुनिया की सबसे लंबी दूरी तक मार करने वाली एयर-टू-एयर मिसाइलों में गिना जाता है। इनकी मारक क्षमता करीब 300 से 400 किलोमीटर तक बताई जाती है, जो हवाई युद्ध के दौरान बड़ी बढ़त दिला सकती है। यह मिसाइलें खास तौर पर दुश्मन के लड़ाकू विमान, निगरानी विमान और हवा में ईंधन भरने वाले विमानों को निशाना बनाने के लिए तैयार की गई हैं। इनकी सटीकता भी काफी बेहतर मानी जाती है, जिससे लक्ष्य पर सीधे हमला संभव होता है।
इस मिसाइल की सबसे खास बात इसकी रफ्तार है। यह ध्वनि की गति से करीब 6 गुना तेज उड़ सकती है। इतनी ज्यादा स्पीड होने के कारण दुश्मन के लिए इससे बचना बेहद मुश्किल हो जाता है। युद्ध में गति और दूरी दोनों ही बहुत महत्वपूर्ण होते हैं और यह मिसाइल इन दोनों मामलों में काफी आगे मानी जाती है। यही वजह है कि इसे हवाई युद्ध के लिए एक गेम चेंजर तकनीक के तौर पर देखा जा रहा है।
इन मिसाइलों को भारतीय वायु सेना के Su-30MKI लड़ाकू विमानों के साथ इस्तेमाल करने के लिए डिजाइन किया गया है। यह विमान पहले से ही भारत की एयर पावर का अहम हिस्सा है। अगर इसमें इस तरह की लंबी दूरी की मिसाइलें जुड़ जाती हैं तो इसकी क्षमता कई गुना बढ़ सकती है। इससे भारत को दुश्मन के विमानों को दूर से ही निशाना बनाने का फायदा मिलेगा और अपने विमानों की सुरक्षा भी बेहतर हो सकेगी।
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इस मिसाइल का इस्तेमाल हाल के संघर्षों में किया जा चुका है और इसके नतीजे प्रभावी रहे हैं। इसकी तेज रफ्तार और सटीक निशानेबाजी इसे बेहद खतरनाक बनाती है। इस वजह से इसे आधुनिक सैन्य तकनीक का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की मिसाइलें भविष्य के हवाई युद्ध की दिशा तय कर सकती हैं।
डिलीवरी को लेकर भी अहम जानकारी सामने आई है। माना जा रहा है कि अगर सब कुछ योजना के अनुसार चलता है तो भारत को इन मिसाइलों की आपूर्ति अगले 12 से 18 महीनों के भीतर शुरू हो सकती है। इससे आने वाले समय में भारतीय वायु सेना को नई ताकत मिलने की उम्मीद है। यह समय सीमा इस डील को और भी महत्वपूर्ण बना देती है क्योंकि इससे जल्द ही इसका असर देखने को मिल सकता है।
भारत केवल विदेशी हथियारों पर ही निर्भर नहीं है बल्कि अपने स्वदेशी मिसाइल प्रोग्राम पर भी तेजी से काम कर रहा है। एस्ट्रा Mk-2 और Mk-3 जैसी मिसाइलों का विकास चल रहा है और जल्द ही सेना में शामिल हो जाएंगी।
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