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विद्यासागर महाराज के अंतिम दर्शन करने जा रहे सतना के तीन श्रद्धालुओं की मौत, छत्तीसगढ़ के डोंगरगढ़ में हुए हादसे का शिकार

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विद्यासागर महाराज के अंतिम दर्शन करने जा रहे सतना के तीन श्रद्धालुओं की मौत, छत्तीसगढ़ के डोंगरगढ़ में हुए हादसे का शिकार
सतना। जैन मुनि विद्यासागर के अंतिम दर्शन के लिए जा रहे सतना के तीन श्रद्धालुओं की सड़क हादसे में मौत हो गई है। तीनों व्यापारी थे। कार में 6 लोग सवार थे। तीन लोगों को मामूली चोटें आई हैं। ये रविवार दोपहर करीब 12 बजे हादसा छत्तीसगढ़ के डोंगरगढ़ में हुआ है।

चन्द्रगिरि के लिए रवाना हुए थे 6 लोग

जानकारी के मुताबिक, जैन मुनि विद्या सागर महाराज के समाधि लेने की खबर के बाद उनके अंतिम दर्शन के लिए देशभर से बड़ी संख्या में जैन समाज के लोग छत्तीसगढ़ के चन्द्रगिरि पहुंचे रहे थे। इसी बीच सतना से जैन समाज के उनके 6 अनुयायी-शिष्य रविवार सुबह कार से छत्तीसगढ़ के चन्द्रगिरि के लिए रवाना हुए थे। दोपहर लगभग 12 बजे उनकी कार छत्तीसगढ़ के डोंगरगढ़ के पास नदी में जा गिरी।

तीनों मृतक व्यापारी थे

जैन समाज के यशपाल जैन कक्का ने बताया कि उन्हें फोन पर इस हादसे की जानकारी मिली। हादसे में कार सवार तीनों व्यापारी आशीष जैन (आशीष ट्रेडर्स), जितेंद्र जैन जीतू (अशोक टाकीज परिवार) और प्रशांत जैन (अनंत निलयम परिवार) की मौत हो गई। जबकि, कार में सवार वर्धमान जैन, अप्पू जैन और अंशुल जैन सुरक्षित हैं। उन्हें भी चोट आई है। बताया जाता है कि कार सवार सभी 6 लोगों में से 5 खुद ड्राइविंग जानते थे। हादसा कैसे हुआ इसके बारे में फिलहाल कोई जानकारी नहीं मिल सकी है। सतना के श्रद्धालुओं के हादसे का शिकार होने की खबर आते ही लोग स्तब्ध रह गए। वहीं मृतकों के घर पर भी लोगों की भीड़ जमा हो गई है। ये भी पढ़ें- जैन मुनि आचार्य विद्यासागर महाराज हुए ब्रह्मलीन : अंतिम यात्रा में उमड़ा जन सैलाब, डोंगरगढ़ के चन्द्रगिरि में पूजन के बाद हुआ अंतिम संस्कार

आचार्यश्री ने दी 350 दीक्षाएं

आचार्यश्री का जन्म 10 अक्टूबर 1946 को कर्नाटक प्रांत के बेलगांव जिले के सदलगा गांव में हुआ था। उन्होंने 30 जून 1968 को राजस्थान के अजमेर नगर में अपने गुरु आचार्यश्री ज्ञानसागर जी महाराज से मुनिदीक्षा ली थी। आचार्यश्री ज्ञानसागर जी महाराज ने उनकी कठोर तपस्या को देखते हुए उन्हें अपना आचार्य पद सौंपा था। आचार्यश्री 1975 के आसपास बुंदेलखंड आए थे। वे बुंदेलखंड के जैन समाज की भक्ति और समर्पण से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने अपना अधिकांश समय बुंदेलखंड में ही व्यतीत किया। आचार्यश्री ने लगभग 350 दीक्षाएं दी हैं। उनके शिष्य पूरे देश में विहारकर जैनधर्म की प्रभावना कर रहे हैं। आचार्यश्री द्वारा पिछले चार साल से दीक्षा नहीं दी गई। आखिरी बार उत्तरप्रदेश के ललितपुर में 28 नवंबर 2018 को दीक्षांत समारोह हुआ, जिसमें उन्होंने 10 को मुनि दीक्षा दी। मध्य प्रदेश की अन्य खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें…
Mithilesh Yadav
By Mithilesh Yadav

वर्तमान में पीपुल्स समाचार के डिजिटल विंग यानी 'पीपुल्स अपडेट' में बतौर सीनियर सब-एडिटर कार्यरत हूं।...Read More

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