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कोरोना का साइड इफेक्ट : बीते 5 सालों में दिल और गेस्ट्रो की दवाओं की खपत 54 % तक बढ़ी

इंडियन फार्मास्युटिकल मार्केट का एनालिसिस: विटामिन की दवाओं के कारोबार में 69% की उछाल
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कोरोना का साइड इफेक्ट : बीते 5 सालों में दिल और गेस्ट्रो की दवाओं की खपत 54 % तक बढ़ी
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    प्रवीण श्रीवास्तव 

    भोपालकोरोना महामारी ने न केवल हमारे फेफड़ों और इम्युनिटी को प्रभावित किया है, बल्कि हमारी नसों और दिल की सेहत पर भी गंभीर असर डाला है। कई शोध में यह सामने आया है कि कोरोना के बाद हार्ट अटैक, स्ट्रोक के साथ फेफड़े और लिवर की बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। इसका सीधा असर प्रदेश के दवा कारोबार पर भी हुआ। बीते पांच सालों में मप्र-छग में दवा की खपत करीब 9% बढ़कर 10,767 करोड़ तक पहुंच गई है। पहले यह करीब 9524 करोड़ के आसपास थी।

    इसमें सबसे ज्यादा खपत हार्ट के साथ पेट, लिवर, फेफड़ों की दवाओं की है। बीते पांच सालों में सिर्फ जुलाई माह की बात करें कार्डियक, गेस्ट्रो के साथ रेस्पीरेटरी मेडिसिन के मार्केट में 53 फीसदी तक की बढ़ोतरी हुई है। वहीं विटामिन की दवाओं की खपत 69 प्रतिशत तक बढ़ी है। आंकड़े इंडियन फार्मास्युटिकल मार्केट का एनालिसिस करने वाली कंपनी एक्युएंट की जुलाई 2025 की रिपोर्ट के हैं। पांच सालों में मप्र और छग में यूरोलॉजी मेडिसिन मार्केट सबसे ज्यादा बढ़ा है।

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    यूरोलॉजी की दवाओं का बाजार बढ़ा

    रिपोर्ट के मुताबिक पिछले पांच सालों में यूरोलॉजी मेडिसिन मार्केट में सबसे ज्यादा ग्रोथ हुई। यह बाजार 54 फीसदी तक बढ़ा है। एम्स के जिनाइटो यूरीनरी सर्जन डॉ. केतन मेहरा बताते हैं कि यूरोलॉजी सेगमेंट में पांच सालों में बहुत बदलाव हुआ है। पहले हम जिस बीमारी का ऑपरेशन करते थे, अब उसके लिए दवाएं उपलब्ध हैं। इसलिए मार्केट बढ़ा है।

    कोरोना संक्रमण का नसों पर असर

    एम्स भोपाल के पूर्व हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. किसलय श्रीवास्तव के मुताबिक कई शोध बताते हैं कि कोविड-19 संक्रमित लोगों की आर्टरीज में लचीलापन कम हो गया है। इससे ब्लड सकुर्लेशन प्रभावित होता है और हार्ट पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहने पर हार्ट अटैक, स्ट्रोक और हाई ब्लड प्रेशर का जोखिम बढ़ा देती है।

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    मप्र में इस तरह साल दर साल बढ़ी खपत

    यूरोलॉजी (मूत्र संबंधी दवाएं) – 2021 में यह बाजार 11 करोड़ रुपए का था और 5 साल में बढ़कर 2025 में 17 करोड़ का हो गया। यूरोलॉजी सेगमेंट में दवाओं की खपत धीरे-धीरे, लेकिन स्थिर रूप से बढ़ रही है। इस सेगमेंट में बीते 5 सालों में 54% वृद्धि हुई है।

    गैस्ट्रो (पाचन और पेट से संबंधित दवाएं) यह सबसे बड़ा और सबसे तेजी से बढ़ने वाला सेगमेंट है। 2021 में 90 करोड़ रुपए का यह बाजार 2025 में 138 करोड़ तक पहुंच गया। 5 सालों में इस क्षेत्र में 53% की वृद्धि हुई है।

    रेस्पायरेटरी (श्वसन संबंधी दवाएं) – 2021 में यह सेगमेंट 45 करोड़ रुपए का था, 2022 में 51 करोड़ तक बढ़ा लेकिन 2023 में थोड़ा घटकर 48 करोड़ हो गया। 2025 में यह 60 करोड़ तक पहुंच गया। इस सेगमेंट में कुल 33% की अपेक्षाकृत कम वृद्धि रही है।

    कार्डियक (हृदय रोग संबंधी दवाएं) यह सेगमेंट लगातार मजबूत वृद्धि दिखा रहा है। 2021 में 75 करोड़ से 2025 में बढ़कर 116 करोड़ तक पहुंच गया। यानी हृदय रोगों के मरीजों और इन दवाओं की मांग में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। इस सेगमेंट में 5 सालों में 54% की वृद्धि हुई है।

    विटामिन (पूरक दवाएं और सप्लीमेंट्स) – 2021 में 69 करोड़ रुपए का यह बाजार 2025 में स्थिर गति से 100 करोड़ रुपए तक पहुंच गया। यह बढ़ोतरी दिखाती है कि विटामिन या सप्लीमेंट्स का इस्तेमाल लगातार बढ़ा है। सेगमेंट में 69% की बढ़ोतरी हुई है।

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    पूरे देश में बढ़ी दवाओं की खपत

    कोरोना के बाद मप्र छग सहित देशभर में दवा मार्केट बढ़ा है। मप्र में बाजार जहां 10 हजार करोड़ पार हो गया, वहीं देश में यह आंकड़ा 2.35 लाख करोड़ से ज्यादा का है। इसमें भी 95 फीसदी हिस्सा कार्डियक, रेस्पीरेटरी, यूरोलॉजी, विटामिन सहित कुछ सेगमेंट का है।

    राजीव सिंघल, महासचिव, ऑल ऑर्गेनाइजेशन ऑफ ड्रगिस्ट एंड केमिस्ट

    Aniruddh Singh
    By Aniruddh Singh

    अनिरुद्ध प्रताप सिंह। नवंबर 2024 से पीपुल्स समाचार में मुख्य उप संपादक के रूप में कार्यरत। दैनिक जाग...Read More

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