Indore Drug News :थानेदार बना ड्रग तस्कर, फिर बिछा ऐसा जाल कि 1 करोड़ की एमडी ड्रग्स के साथ दबोचे पांच आरोपी

इंदौर क्राइम ब्रांच ने राजस्थान और उज्जैन के युवकों से एक करोड़ रुपए की एमडी ड्रग्स बरामद की है। ये आरोपी सुपर कॉरिडोर पर टीसीएस के पास ग्राहक के इंतजार में खड़े थे। पुलिस ने इनके पास से देसी कट्टा, कारतूस, स्कॉर्पियो कार और बाइक बरामद की हैं। इस पूरे मामले में गैंग को पकड़ने के लिए पुलिस ने एक थानेदार को तस्कर बनाकर जाल बिछाया।
थानेदार बना ड्रग तस्कर, फिर बिछा ऐसा जाल कि 1 करोड़ की एमडी ड्रग्स के साथ दबोचे पांच आरोपी

इंदौर।  क्राइम ब्रांच ने ड्रग्स तस्करों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब 1 करोड़ रुपए कीमत की एमडी ड्रग्स जब्त की है। इस हाईप्रोफाइल ऑपरेशन में पुलिस ने पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से एक किलो एमडी ड्रग्स, एक लोडेड पिस्टल, स्कॉर्पियो वाहन, दो बाइक और मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं। पूरे ऑपरेशन की सबसे खास बात यह रही कि ड्रग्स सप्लायर तक पहुंचने के लिए क्राइम ब्रांच के थानेदार ने खुद तस्कर बनकर जाल बिछाया और फिर सुपर कॉरिडोर पर फिल्मी अंदाज में पूरी गैंग को धर दबोचा।

राजस्थान से मालवा तक फैला ड्रग नेटवर्क 

पुलिस के मुताबिक इंदौर में लगातार पकड़े जा रहे ड्रग पेडलरों से पूछताछ में राजस्थान के चर्चूनी गांव और डग गांव का नाम सामने आ रहा था। आरोपियों ने खुलासा किया था कि इन्हीं इलाकों से पूरे देश में एमडी ड्रग्स और ब्राउन शुगर की सप्लाई की जा रही है। पूछताछ में यह भी सामने आया कि इंदौर और मालवा क्षेत्र में पहुंच रही ज्यादातर ड्रग्स की सप्लाई शंकरसिंह नामक तस्कर कर रहा था। इसके बाद डीसीपी क्राइम राजेश त्रिपाठी ने उसे रंगे हाथ पकड़ने की योजना बनाई।

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थानेदार को बनाया नकली तस्कर 

गैंग को पकड़ने के लिए डीसीपी राजेश त्रिपाठी ने ऑपरेशन तैयार किया। इसके तहत क्राइम ब्रांच के एक थानेदार को इंदौर के बाहर की नई सिम और मोबाइल दिलवाया गया। थानेदार ने खुद को मुंबई का बड़ा ड्रग तस्कर बताकर शंकरसिंह से संपर्क किया। लगातार बातचीत के जरिए उसने तस्कर का भरोसा जीत लिया। आखिरकार एक किलो एमडी ड्रग्स की डील फाइनल हुई और आरोपियों को माल लेकर इंदौर बुलाया गया।

सुपर कॉरिडोर पर बिछाया जाल 

पुलिस के अनुसार शंकरसिंह अपने साथियों विक्रम निवासी डूंगरपुर, नवीन निवासी डग (राजस्थान), गोविंद वर्मा निवासी देवास और नरेंद्र निवासी बारोड़ के साथ स्कॉर्पियो और दो बाइक में सवार होकर एमआर-10 सुपर कॉरिडोर होते हुए टीसीएस रोड पहुंचे। आरोपियों ने नकली तस्कर बने थानेदार को लोकेशन भेजी और डील के लिए बुलाया। इस दौरान गैंग के सदस्य अलग-अलग जिम्मेदारियां संभाल रहे थे।

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कोई कर रहा था रैकी, कोई देख रहा था नकली नोट

पूछताछ में आरोपियों ने खुलासा किया कि गैंग बेहद शातिर तरीके से काम करता था। तीन लोग ड्रग्स की डिलीवरी संभालते थे, जबकि एक आरोपी स्कॉर्पियो के पीछे बाइक से रैकी करता चलता था। यदि रास्ते में किसी तरह का शक या खतरा नजर आता तो वह तुरंत वाहन का रूट बदलवा देता था। वहीं एक सदस्य का काम सिर्फ पैसों की जांच करना था कि रकम असली है या नकली।

गाड़ी में बैठते ही चारों तरफ से घिरी क्राइम ब्रांच 

डील के दौरान शंकरसिंह ने थानेदार से पहले पैसे दिखाने को कहा। थानेदार के साथ मौजूद सिपाही ने दूर से बैग में रखी नकदी दिखाई। इसके बाद आरोपियों ने थानेदार को अपनी गाड़ी में बैठा लिया। जैसे ही थानेदार गाड़ी में बैठा, पहले से घात लगाए बैठी क्राइम ब्रांच की टीम ने चारों तरफ से घेराबंदी कर दी। पुलिसकर्मी पिस्टल और थ्री-नॉट-थ्री रायफल से लैस थे। अचानक हुई कार्रवाई से आरोपी घबरा गए और पांचों को मौके से दबोच लिया गया।

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पुलिस को मिले कई बड़े नाम 

पुलिस के मुताबिक आरोपियों ने पूछताछ में राजस्थान के चर्चूनी और डग गांव से जुड़े कई बड़े ड्रग तस्करों के नाम बताए हैं। साथ ही इंदौर और मालवा क्षेत्र में सक्रिय नेटवर्क की जानकारी भी दी है। क्राइम ब्रांच अब मोबाइल डेटा, कॉल रिकॉर्ड और सप्लाई चेन की जांच कर रही है। पुलिस आयुक्त संतोष कुमार सिंह ने पूरे ऑपरेशन में शामिल टीम को इनाम देने की घोषणा की है। 

Naresh Bhagoria
By Naresh Bhagoria

नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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