Adhik Skanda Shashti 2026 :20 या 21 मई... कब है अधिक स्कन्द षष्ठी? जानें सही तिथि, शुभ मुहूर्त और महत्व

हिंदू धर्म में षष्ठी तिथि का विशेष महत्व माना गया है। जब यह तिथि अधिक मास में आती है, तो इसका महत्व और भी बढ़ जाता है। भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र भगवान कार्तिकेय (स्कन्द) को समर्पित यह व्रत बहुत फलदायी माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा से व्रत करने पर जीवन की परेशानियां दूर होती हैं और शत्रुओं पर विजय मिलती है।
अधिक स्कन्द षष्ठी 2026 की तिथि और समय
पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को अधिक स्कन्द षष्ठी का व्रत रखा जाएगा।
षष्ठी तिथि शुरू: 21 मई 2026, सुबह 8:26 बजे
षष्ठी तिथि समाप्त: 22 मई 2026, सुबह 6:24 बजे
उदया तिथि और प्रदोष काल के अनुसार, व्रत 21 मई 2026 गुरुवार के दिन ही रखा जाएगा।
इस दिन के शुभ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त - 04:05 ए एम से 04:46 ए एम
प्रातः सन्ध्या - 04:25 ए एम से 05:27 ए एम
अभिजित मुहूर्त - 11:51 ए एम से 12:45 पी एम
विजय मुहूर्त - 02:35 पी एम से 03:29 पी एम
गोधूलि मुहूर्त - 07:07 पी एम से 07:28 पी एम
सायाह्न सन्ध्या - 07:08 पी एम से 08:10 पी एम
अमृत काल - 08:47 पी एम से 10:18 पी एम
निशिता मुहूर्त - 11:57 पी एम से 12:38 ए एम, 22 मई
गुरु पुष्य योग - 05:27 ए एम से 02:49 ए एम, 22 मई
सर्वार्थ सिद्धि योग - 05:27 ए एम से 02:49 ए एम, 22 मई
अमृत सिद्धि योग - 05:27 ए एम से 02:49 ए एम, 22 मई
रवि योग - 05:27 ए एम से 02:49 ए एम, 22 मई
भगवान कार्तिकेय का महत्व
भगवान कार्तिकेय को मुरुगन, स्कन्द और सुब्रमण्य के नाम से भी जाना जाता है। उन्हें देवताओं का सेनापति माना जाता है। वे साहस, शक्ति और पराक्रम के प्रतीक हैं।
इस व्रत का महत्व क्यों खास है?
मान्यता है कि अधिक स्कन्द षष्ठी का व्रत करने से संतान से जुड़ी परेशानियां दूर होती हैं। नकारात्मक ऊर्जा और शत्रुओं से रक्षा मिलती है। व्यक्ति में आत्मबल और साहस बढ़ता है। गंभीर रोगों से राहत मिलने की भी मान्यता है।
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स्कन्द षष्ठी पूजा विधि
इस दिन भगवान कार्तिकेय की विधि-विधान से पूजा करनी चाहिए।
- सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें
- भगवान के सामने व्रत का संकल्प लें
- शिव, पार्वती और कार्तिकेय की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें
- गंगाजल, दूध और दही से अभिषेक करें
- चंदन, कुमकुम, अक्षत और फूल अर्पित करें
- लाल फूल, फल और मिठाई चढ़ाएं
- ‘ॐ स्कन्दाय नमः’ या ‘ॐ कार्तिकेयाय नमः’ मंत्र का जाप करें
- दीपक जलाकर आरती करें
- शाम को सूर्य और चंद्रमा को अर्घ्य दें
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व्रत के दौरान क्या ध्यान रखें
- तामसिक भोजन से बचें
- ब्रह्मचर्य का पालन करें
- क्रोध और नकारात्मक सोच से दूर रहें
- जरूरतमंदों को दान करना शुभ माना जाता है











