इंदौर:निजी बसों में सफर करना होगा महंगा! डीजल महंगा होने के बाद बस ऑपरेटरों ने की 60% तक किराया बढ़ाने की मांग

इंदौर। प्रमुख रूटों पर किराए में बड़ा बदलाव संभव है। डीजल, टायर, टोल और मेंटेनेंस के बढ़ते खर्च को वजह बताया गया है। ट्रांसपोर्टर्स ने माल भाड़ा बढ़ाने की भी तैयारी शुरू कर दी है। यात्रियों ने इसे आम आदमी पर डबल अटैक बताया है।
प्रमुख रूटों पर किराया बढ़ाने की तैयारी
इंदौर से महू, देवास, धार, उज्जैन, भोपाल, खंडवा और बुरहानपुर जैसे प्रमुख रूटों पर चलने वाली निजी बसों के किराए में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। प्राइम रूट बस आनर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष गोविंद शर्मा का कहना है कि वर्ष 2021 में डीजल की कीमत करीब 80 रुपए प्रति लीटर थी, तब जो किराया था अभी भी वहीं है। जबकि डीजल अब बढ़कर लगभग 94 रुपए तक पहुंच गया है।
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बढ़ती लागत ने बढ़ाई ऑपरेटरों की चिंता
इसके अलावा टायर, स्पेयर पार्ट्स, टोल टैक्स और मेंटेनेंस का खर्च भी तेजी से बढ़ा है। ऐसे में पुराने किराए पर बसों का संचालन करना मुश्किल होता जा रहा है। इसलिए हम सरकार से किराया बढ़ाने की मांग कर रहे है।
माल भाड़ा बढ़ने से बढ़ेगी महंगाई
इस तरह अब ट्रांसपोर्ट कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि डीजल महंगा होने का असर सिर्फ बस किराए तक सीमित नहीं रहेगा। माल भाड़ा बढ़ने से रोजमर्रा की चीजों की कीमतों पर भी असर पड़ सकता है। यानी आने वाले दिनों में थाली से लेकर सफर तक हर चीज आम आदमी की जेब पर भारी पड़ सकती है। इस तरह अब ट्रांसपोर्ट कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि डीजल महंगा होने का असर सिर्फ बस किराए तक सीमित नहीं रहेगा। माल भाड़ा बढ़ने से रोजमर्रा की चीजों की कीमतों पर भी असर पड़ सकता है।
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यात्रियों ने बताया डबल अटैक
दूसरी तरफ यात्रियों में इस प्रस्ताव को लेकर नाराजगी है। नौकरीपेशा, छात्र और छोटे कारोबारी वर्ग का कहना है कि पहले ही पेट्रोल-डीजल, गैस, बिजली और खाने-पीने की वस्तुओं के दाम बढ़ चुके हैं, अब बस किराया बढ़ना आम आदमी पर डबल अटैक जैसा होगा। रोजाना अपडाउन करने वाले लोगों का कहना है कि अगर किराया 60 प्रतिशत तक बढ़ा तो महीने का खर्च संभालना मुश्किल हो जाएगा। कई यात्रियों ने रेलवे को सस्ता विकल्प बताते हुए कहा कि अगर बस किराए में इतनी बड़ी बढ़ोतरी हुई तो लोग निजी बसों से दूरी बना सकते हैं।












