छिंदवाड़ा गौरव दिवस पर उठे सवाल, कलेक्टर कार्यालय के सामने देर रात तक चलता रहा कार्यक्रम

छिंदवाड़ा। कलेक्टर कार्यालय जैसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक केंद्र के सामने देर रात करीब 11.45 बजे तक तेज आवाज में संगीत और प्रस्तुतियां जारी रहीं। कार्यक्रम में बॉलीवुड फिल्मों के भद्दे और आपत्तिजनक बोल वाले गाने गाए जाने की बात भी सामने आई। इंडियन आइडल की चर्चित गायिका रूपम भरनारिया की मौजूदगी के बावजूद आयोजन स्थल पर अपेक्षित भीड़ नहीं दिखाई दी। कई कुर्सियां खाली रहीं और पूरा ग्राउंड दर्शकों से भरा नजर नहीं आया। अब लोगों के बीच सवाल उठ रहा है कि नियम आम नागरिकों के लिए अलग और सरकारी आयोजनों के लिए अलग क्यों नजर आए।
कलेक्टर कार्यालय के सामने देर रात तक चलता रहा कार्यक्रम
कार्यक्रम को शहर के गौरव और संस्कृति से जोड़कर आयोजित किया गया था, लेकिन देर रात तक तेज आवाज में संगीत और प्रस्तुतियां जारी रहीं। कलेक्टर कार्यालय जैसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक केंद्र के सामने करीब 11.45 बजे तक कार्यक्रम चलने से अब नियमों के पालन को लेकर सवाल उठ रहे हैं। जिन अधिकारियों और विभागों पर शहर में नियम-कायदे लागू कराने और उनका पालन सुनिश्चित कराने की जिम्मेदारी है, उन्हीं जिम्मेदारों की मौजूदगी में कार्यक्रम देर रात तक चलता रहा।
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मंच पर बॉलीवुड के आपत्तिजनक गानों को लेकर सवाल
कार्यक्रम की प्रस्तुति को लेकर भी सवाल खड़े हुए हैं। मंच से बॉलीवुड फिल्मों के भद्दे और आपत्तिजनक बोल वाले गाने गाए जाने की बात सामने आई, जबकि आयोजन का उद्देश्य शहर की संस्कृति, गौरव और सकारात्मक पहचान को सामने रखना था। खलनायक मूवी का सुपरहिट सॉन्ग चोली के पीछे क्या है, चुनरी के पीछे क्या है गाने पर लोग झूमते नजर आए। सवाल यह है कि कार्यक्रम की प्रस्तुति तय करने से पहले जिम्मेदार अधिकारियों ने इसकी सामग्री की समीक्षा की थी या नहीं।
कार्यक्रम में खाली रहीं कुर्सियां
कार्यक्रम में इंडियन आइडल की चर्चित गायिका रूपम भरनारिया की मौजूदगी के बावजूद आयोजन स्थल पर अपेक्षित भीड़ नहीं दिखाई दी। कई कुर्सियां खाली रहीं और पूरा ग्राउंड दर्शकों से भरा नजर नहीं आया। ऐसे में सरकारी संसाधनों, व्यवस्थाओं और तैयारियों से जुड़े आयोजन की सफलता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। यह स्थिति कार्यक्रम की व्यवस्था और प्रचार-प्रसार पर भी प्रश्नचिह्न खड़ा करती है।
नियमों को लेकर आम आदमी और सरकारी आयोजन में अंतर?
एक तरफ प्रशासन आम आयोजनों में रात के समय तेज आवाज और समय सीमा को लेकर नियमों का हवाला देता है, वहीं कलेक्टर कार्यालय के सामने ही देर रात तक तेज आवाज में कार्यक्रम चलता रहा। इससे आम लोगों के बीच यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या नियम आम आदमी के लिए अलग और सरकारी आयोजनों के लिए अलग हैं। गौरव दिवस जैसे आयोजन में शहर की संस्कृति और सकारात्मक पहचान सामने रखी जानी थी, लेकिन खाली ग्राउंड, देर रात तक चलता कार्यक्रम और तेज ध्वनि ने आयोजन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए।
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प्रशासन को बताना चाहिए तय मानकों का कितना हुआ पालन
अब सवाल सिर्फ यह नहीं है कि कार्यक्रम कितने बजे तक चला, बल्कि असली सवाल यह है कि नियमों की निगरानी और जिम्मेदारी तय करने वाले विभाग और अधिकारी खुद अपने आयोजन में इन नियमों को लेकर कितने गंभीर रहे। कार्यक्रम को सफल बताने से पहले प्रशासन को यह भी बताना चाहिए कि आयोजन की समय सीमा, ध्वनि नियंत्रण, मंचीय प्रस्तुतियों और दर्शकों की भागीदारी को लेकर क्या मानक तय किए गए थे। साथ ही यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि इन मानकों का कितना पालन हुआ और आयोजन की निगरानी किस स्तर पर की गई।




















