CG NEWS:सिलतरा वेयरहाउस में करोड़ों का शराब घोटाला? नष्ट करने वाली शराब बाजार में बेचने का आरोप

RAIPUR NEWS। रायपुर के सिलतरा शराब वेयरहाउस में कथित तौर पर बड़े शराब घोटाले का खुलासा हुआ है। जिन शराब और बीयर की बोतलों को आबकारी विभाग ने नष्ट करने का आदेश दिया था, वही शराब बाजार में बेचे जाने के आरोप सामने आए हैं। दैनिक भास्कर की पड़ताल के बाद आबकारी विभाग में हड़कंप मच गया है और वेयरहाउस प्रभारी को हटा दिया गया है। मामले में करोड़ों रुपए के भ्रष्टाचार और राजनीतिक संरक्षण के आरोप भी लगाए गए हैं।
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नष्ट करने वाली शराब बाजार में कैसे पहुंची?
आबकारी विभाग ने 12 मई 2026 को 7,509 बॉक्स में रखी 3,566 शराब बोतलों को नष्ट करने का आदेश दिया था। आरोप है कि इनमें से बड़ी मात्रा में शराब को कागजों में नष्ट दिखाकर बाजार में बेच दिया गया। जांच में ऐसी कई ब्रांडेड शराब और बीयर की बोतलें मिली हैं जो विभाग की नष्टीकरण सूची में दर्ज थीं।
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प्रभारी हटाई गईं, विभाग में मचा हड़कंप
सिलतरा वेयरहाउस में लगातार गड़बड़ियों और शिकायतों के बाद प्रभारी दीप मसीह को हटा दिया गया है। मामले के सामने आने के बाद आबकारी विभाग ने जांच के संकेत दिए हैं। विभागीय सूत्रों के अनुसार वेयरहाउस की गतिविधियों पर लंबे समय से सवाल उठ रहे थे।
ब्रेकेज छूट बना भ्रष्टाचार का जरिया?
सरकार शराब परिवहन के दौरान संभावित टूट-फूट को देखते हुए सप्लायर कंपनियों को 0.25 प्रतिशत ब्रेकेज छूट देती है। आरोप है कि इसी नियम का फायदा उठाकर शराब की बोतलों को रिकॉर्ड में क्षतिग्रस्त दिखाया जाता है और बाद में अवैध रूप से बेच दिया जाता है। इससे सरकार को राजस्व नुकसान और माफिया को मोटा मुनाफा मिलता है।
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विधायक ने विधानसभा में खोला मोर्चा
पाली-तानाखार विधायक तुलेश्वर हीरा सिंह मरकाम ने विधानसभा में इस मुद्दे को उठाया था। उन्होंने आरोप लगाया कि सिलतरा विदेशी शराब गोदाम में हर महीने करोड़ों रुपए का भ्रष्टाचार हो रहा है। साथ ही सीसीटीवी कैमरे बंद कर शराब चोरी और रिकॉर्ड में हेराफेरी करने के भी आरोप लगाए गए।
एक्सपायरी शराब के नाम पर बड़ा खेल
आरोपों के अनुसार सेवन हिल्स बीयर, बडवाइजर बीयर और इंपीरियल ब्लू जैसी ब्रांडेड शराब की पेटियों को नष्ट करने के बजाय बाजार में बेच दिया गया। कई खेपों को रिकॉर्ड में क्षतिग्रस्त दिखाकर अवैध कारोबारियों तक पहुंचाने का दावा किया गया है।
180 दिन वाला नियम भी बना कमाई का जरिया
छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉरपोरेशन के नियम के अनुसार छह महीने तक नहीं बिकने वाली शराब को सरप्लस स्टॉक माना जाता है। आरोप है कि इसी नियम की आड़ में कंपनियों और विभागीय कर्मचारियों की मिलीभगत से स्टॉक को खपाया जाता है ताकि डेमरेज चार्ज से बचा जा सके।
कमिश्नर बोले- दोषियों पर होगी कार्रवाई
आबकारी आयुक्त पी.एस. एल्मा ने कहा कि जिस शराब को नष्ट करने का आदेश दिया गया था उसका बाजार में बेचा जाना बेहद गंभीर मामला है। पूरे प्रकरण की जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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आबकारी विभाग में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल
मामले के बीच आबकारी विभाग ने 30 अधिकारियों और कर्मचारियों के तबादले के आदेश जारी किए हैं। रायपुर, दुर्ग, राजनांदगांव, सक्ती, बेमेतरा, धमतरी, कोरबा और अन्य जिलों में नई पदस्थापनाएं की गई हैं। विभागीय फेरबदल को इस विवाद से जोड़कर भी देखा जा रहा है।












