विश्व आदिवासी दिवस पर रैलियों से गूंजा भोपाल शहर, डीजे की धुन पर झूमे युवा, इन रास्तों से निकली रैलियां

भोपाल। विश्व आदिवासी दिवस के मौके पर रविवार को भोपाल में आदिवासी समाज की कई रैलियां निकाली। राजधानी और आसपास के इलाकों से बड़ी संख्या में युवा रैली के रूप में टीटी नगर दशहरा मैदान पहुंचे। न्यू मार्केट के पास से गुजर रही रैली में भी बड़ी संख्या में युवा डीजे की धुन पर नाचते-गाते नजर आए। पारंपरिक अंदाज और उत्साह के साथ निकाली गईं इन रैलियों का जगह-जगह लोगों ने स्वागत भी किया। अलग-अलग इलाकों से निकलने वाली रैलियों के टीटी नगर दशहरा मैदान पहुंचने का सिलसिला लगातार जारी रहा है।
टीटी नगर दशहरा मैदान में बड़ा कार्यक्रम
टीटी नगर दशहरा मैदान में आदिवासी विकास परिषद की ओर से विश्व आदिवासी दिवस का कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। इस कार्यक्रम में आदिवासी समाज के युवा, कलाकार और बड़ी संख्या में लोग शामिल होंगे। कार्यक्रम में मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार भी शामिल होंगे। वे यहां पहुंचकर रैली को संबोधित करेंगे। कार्यक्रम के दौरान आदिवासी समाज से जुड़े मुद्दों और उनकी मांगों को भी प्रमुखता से उठाया जाएगा।
विश्व आदिवासी दिवस पर भोपाल में निकलीं कई रैलियां
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इन रास्तों से होकर पहुंचीं रैलियां
भोपाल के अलग-अलग इलाकों से निकली रैलियों के लिए अलग-अलग मार्ग तय किए गए हैं। केकड़िया से निकलने वाली रैली नीलबड़ और अटल पथ होते हुए टीटी नगर दशहरा मैदान पहुंची। वहीं झिरी से निकली रैली कजलीखेड़ा, कोलार रोड, चूना भट्टी, कोलार तिराहा, मैनिट और माता मंदिर होते हुए टीटी नगर दशहरा मैदान पहुंची। महाबली नगर यानी सतपुड़ा भवन क्षेत्र से निकली रैली शौर्य स्मारक, लिंक रोड, रोशनपुरा और रंगमहल चौराहा होते हुए टीटी नगर दशहरा मैदान पहुंची। इन रैलियों के कारण शहर के कुछ प्रमुख रास्तों पर लोगों की आवाजाही भी प्रभावीत हुई। रैली के आगे बढ़ने के साथ पुलिस और प्रशासन की ओर से यातायात व्यवस्था संभाली गई।
आदिवासी समाज की क्या हैं प्रमुख मांगें?
विश्व आदिवासी दिवस के कार्यक्रम के दौरान आदिवासी समाज की कई मांगों को भी उठाया जा रहा है। समाज की प्रमुख मांग है कि जल, जंगल और जमीन से जुड़े अधिकारों को सुरक्षित किया जाए और जमीन के बदले उचित पट्टे दिए जाएं। इसके अलावा जमीन अधिग्रहण की स्थिति में प्रभावित परिवारों को सही और उचित मुआवजा देने की मांग की जा रही है। आदिवासी समाज का कहना है कि विकास परियोजनाओं के कारण जिन लोगों को अपनी जमीन और घर छोड़ना पड़ता है, उनके लिए बेहतर विस्थापन और पुनर्वास की व्यवस्था होनी चाहिए।
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विकास परियोजनाओं में रोजगार की मांग
आदिवासी समाज की एक अहम मांग यह भी है कि विकास परियोजनाओं में स्थानीय आदिवासी लोगों को रोजगार का अवसर दिया जाए। समाज का कहना है कि जिन इलाकों में विकास परियोजनाएं शुरू होती हैं, वहां रहने वाले लोगों को उसका सीधा फायदा मिलना चाहिए। रोजगार, जमीन, मुआवजा और पुनर्वास जैसे मुद्दों को लेकर समाज की ओर से अपनी बात सरकार तक पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।












