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CG NEWS: बिलासपुर की विशेष NIA कोर्ट का बड़ा फैसला, प्रतिबंधित माओवादी संगठन से जुड़े चार आरोपियों को मिली जमानत

कोर्ट बोली लंबी न्यायिक हिरासत और ट्रायल में देरी को देखते हुए मिली राहत,20-20 हजार के मुचलके पर रिहाई एनआईए कोर्ट ने प्रतिबंधित माओवादी संगठन से कथित संबंध रखने के मामले में गिरफ्तार चार आरोपियों की जमानत याचिकाएं स्वीकार कर ली हैं। विशेष न्यायाधीश एनआईए एक्ट सिराजुद्दीन कुरैशी की अदालत ने गिरधर नाग, सुकारू राम कोरसा, संदेव पोड़यामी और शंकर कोरसा को सशर्त जमानत पर रिहा करने का आदेश जारी किया है।
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बिलासपुर की विशेष NIA कोर्ट का बड़ा फैसला, प्रतिबंधित माओवादी संगठन से जुड़े चार आरोपियों को मिली जमानत

RAIPUR/ BILASPUR NEWS। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर से एक अहम न्यायिक फैसला सामने आया है। विशेष एनआईए कोर्ट ने प्रतिबंधित माओवादी संगठन से संबंध रखने के आरोप में गिरफ्तार चार आरोपियों को सशर्त जमानत प्रदान कर दी है। अदालत ने लंबी न्यायिक हिरासत, ट्रायल में संभावित देरी और आरोपियों के खिलाफ सीमित साक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए यह राहत दी है। इस फैसले को राज्य में चल रहे माओवादी नेटवर्क से जुड़े मामलों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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बिलासपुर NIA कोर्ट का बड़ा फैसला

बिलासपुर स्थित विशेष एनआईए कोर्ट ने प्रतिबंधित माओवादी संगठन से कथित संबंध रखने के मामले में गिरफ्तार चार आरोपियों की जमानत याचिकाएं स्वीकार कर ली हैं। विशेष न्यायाधीश एनआईए एक्ट सिराजुद्दीन कुरैशी की अदालत ने गिरधर नाग, सुकारू राम कोरसा, संदेव पोड़यामी और शंकर कोरसा को सशर्त जमानत पर रिहा करने का आदेश जारी किया है।

रायपुर के डीडी नगर थाने में दर्ज है मामला

यह पूरा मामला रायपुर के डीडी नगर थाना क्षेत्र में दर्ज अपराध से जुड़ा हुआ है। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं 147, 148 और 61 के साथ-साथ गैरकानूनी गतिविधि (निवारण) अधिनियम (UAPA) की धाराओं 17, 18, 19, 20, 38, 39 और 40 के तहत अपराध दर्ज किया था।

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माओवादी नेटवर्क खड़ा करने का आरोप

जांच एजेंसियों के अनुसार आरोपियों पर प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) संगठन के लिए शहरी नेटवर्क विकसित करने, सूचनाओं के आदान-प्रदान और संगठनात्मक गतिविधियों में सहयोग करने का आरोप है। पुलिस का दावा था कि आरोपी संगठन के लिए समर्थन जुटाने और संपर्क तंत्र मजबूत करने में सक्रिय भूमिका निभा रहे थे।

बचाव पक्ष ने रखा यह तर्क

सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने अदालत को बताया कि चारों आरोपियों का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। साथ ही अभियोजन पक्ष आरोपियों के कब्जे से कोई बड़ी आपत्तिजनक या संदिग्ध सामग्री बरामद नहीं कर पाया। अदालत के समक्ष यह भी बताया गया कि गिरधर नाग के पास से केवल एक मोबाइल फोन जब्त किया गया था, जबकि अन्य आरोपियों के खिलाफ प्रत्यक्ष भौतिक साक्ष्य सामने नहीं आए हैं।

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सह-आरोपी को पहले ही मिल चुकी थी राहत

अदालत ने अपने आदेश में यह भी उल्लेख किया कि इसी मामले के सह-आरोपी धनसिंह गावड़े को पहले ही जमानत मिल चुकी है। इस तथ्य को भी न्यायालय ने अपने निर्णय में महत्वपूर्ण माना।

कोर्ट ने क्यों दी जमानत?

विशेष एनआईए कोर्ट ने कहा कि आरोपी लंबे समय से न्यायिक हिरासत में हैं और निकट भविष्य में ट्रायल पूरा होने की संभावना नहीं दिख रही है। ऐसे में व्यक्तिगत स्वतंत्रता और न्यायिक प्रक्रिया के संतुलन को ध्यान में रखते हुए जमानत प्रदान की गई है।

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20 हजार के मुचलके पर मिलेगी रिहाई

कोर्ट ने आदेश दिया है कि प्रत्येक आरोपी को 20 हजार रुपये का निजी बंधपत्र तथा समान राशि का एक सक्षम जमानती प्रस्तुत करना होगा। निर्धारित शर्तों का पालन करने के बाद ही आरोपियों को रिहा किया जाएगा।

Prem Nirmalkar
By Prem Nirmalkar
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