छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के तमनार थाना क्षेत्र के आमाघाट गांव में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए अवैध अफीम की खेती का भंडाफोड़ किया है। यहां करीब एक एकड़ जमीन पर छिपाकर अफीम के पौधे उगाए जा रहे थे। पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी, जिसके बाद मौके पर दबिश दी गई और पूरा मामला सामने आ गया।
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छापेमारी के दौरान पुलिस ने 60 हजार से ज्यादा अफीम के पौधे और लगभग 3 किलो तैयार अफीम जब्त की है। जब्त सामग्री की कुल कीमत करीब 2 करोड़ रुपए बताई जा रही है। यह कार्रवाई पुलिस के लिए एक बड़ी सफलता मानी जा रही है, क्योंकि यह मामला लंबे समय से चल रहा था और स्थानीय लोगों को इसकी भनक तक नहीं लगी।
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इस मामले में झारखंड के खूंटी जिले के रहने वाले मार्शल सांगा (40) को गिरफ्तार किया गया है। बताया जा रहा है कि आरोपी ने करीब 8-10 साल पहले तमनार इलाके में शादी की थी और तभी से यहीं रह रहा था। वह अपने ससुराल में रहते हुए धीरे-धीरे इस अवैध कारोबार में शामिल हो गया।

आरोपी ने किसानों से जमीन यह कहकर ली थी कि वह उस पर तरबूज और खीरे की खेती करेगा। लेकिन असल में उसी जमीन पर छिपकर अफीम उगाई जा रही थी। यह खेती पाझर नाला के पास की गई थी, जहां आसानी से निगरानी से बचा जा सके। पुलिस जांच में पता चला कि यह जमीन अलग-अलग खसरा नंबरों की निजी और परियोजना भूमि है।
इस मामले में मार्शल सांगा के दो साथी इमानवेल भेंगरा और सीप्रियन भेंगरा फरार हैं। पुलिस उनकी तलाश में लगातार दबिश दे रही है। अधिकारियों के अनुसार, इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इसमें और कौन-कौन शामिल है।
छत्तीसगढ़ सरकार ने इस तरह की अवैध गतिविधियों पर सख्त रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री के निर्देशों के तहत पुलिस और अन्य विभाग लगातार निगरानी कर रहे हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साई ने स्पष्ट कहा है कि नशे के कारोबार में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।
इस मामले को लेकर राजनीति भी गरमा गई है। पूर्व मंत्री टी.एस. सिंहदेव ने इसे गंभीर मामला बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों से चिंता बढ़ रही है।

वहीं पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आरोप लगाया कि प्रदेश में इस तरह की गतिविधियां बढ़ रही हैं और सरकार की चुप्पी कई सवाल खड़े करती है। विपक्ष का कहना है कि इस पूरे मामले में उच्च स्तर तक जांच होनी चाहिए।

यह मामला सिर्फ एक अवैध खेती तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सवाल खड़ा करता है कि बिना किसी संरक्षण के इतनी बड़ी मात्रा में अफीम की खेती कैसे संभव हुई। स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी आशंका जताई है कि इसमें कहीं न कहीं मिलीभगत हो सकती है।