सरकार का कहना है कि इन दोनों बिलों का मुख्य उद्देश्य परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, निष्पक्षता और ईमानदारी लाना है। सीएम विष्णुदेव साय ने पिछली सरकार पर गड़बड़ियों के आरोप लगाए, वहीं विपक्ष ने भी सख्त कानून का समर्थन करते हुए बेहतर क्रियान्वयन पर जोर दिया।
नए कानून के तहत परीक्षाओं में नकल या किसी भी प्रकार की गड़बड़ी करने वाले अभ्यर्थियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। अगर कोई उम्मीदवार नकल करते पकड़ा जाता है, तो उसका रिजल्ट रोका जाएगा और उसे 1 से 3 साल तक परीक्षा देने से बैन किया जा सकता है। हालांकि यह प्रतिबंध परमानेंट नहीं होगा। इसके अलावा, संगठित धोखाधड़ी, पेपर लीक या रिकॉर्ड में छेड़छाड़ जैसे गंभीर मामलों में दोषियों को 1 से 10 साल तक की जेल और 5 लाख से 10 लाख और 1 करोड़ तक का जुर्माना देना पड़ सकता है।
सरकार ने केवल अभ्यर्थियों ही नहीं, बल्कि परीक्षा से जुड़ी संस्थाओं और एजेंसियों को भी कानून के दायरे में लाया है। यदि कोई संस्था दोषी पाई जाती है, तो उस पर 1 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। साथ ही ऐसी संस्थाओं को कम से कम 3 साल तक परीक्षा आयोजित करने से प्रतिबंधित किया जाएगा और उनसे परीक्षा से संबंधित खर्च की भी वसूली की जाएगी।
विधानसभा में स्टाफ सिलेक्शन बोर्ड बिल 2026 भी पास किया गया है। इसके तहत तृतीय और चतुर्थ श्रेणी की सभी भर्तियां एक ही प्लेटफॉर्म से की जाएंगी। इससे अलग-अलग विभागों की जटिल भर्ती प्रक्रियाएं खत्म होंगी। इस नए बोर्ड में व्यापम का भी विलय किया जाएगा।