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खबर का असर:संरक्षित स्मारक परिसर से हटाई गई अस्थायी छत, पीपुल्स समाचार की खबर के बाद कार्रवाई

दमोह के तेंदूखेड़ा तहसील के ग्राम कोडल स्थित राष्ट्रीय महत्व के संरक्षित प्राचीन स्मारक परिसर में बनाई गई अस्थायी छत को खबर प्रकाशित होने के बाद हटा दिया गया है।
संरक्षित स्मारक परिसर से हटाई गई अस्थायी छत, पीपुल्स समाचार की खबर के बाद कार्रवाई
कोडल स्थित राष्ट्रीय महत्व के संरक्षित प्राचीन स्मारक परिसर में बनाई गई अस्थायी छत को खबर प्रकाशित होने के बाद हटा दिया गया

दमोह। तेंदूखेड़ा तहसील के ग्राम कोडल स्थित राष्ट्रीय महत्व के संरक्षित प्राचीन स्मारक परिसर में बनाई गई अस्थायी छत को खबर प्रकाशित होने के बाद हटा दिया गया है। बारिश और धूप से बचाव के लिए स्मारक परिसर में सूखी लकड़ियों, प्लास्टिक और ईंटों की मदद से यह अस्थायी संरचना तैयार की गई थी। इसकी वजह से ऐतिहासिक स्मारक की मूल संरचना के बीच यह निर्माण अलग नजर आ रहा था।

पीपुल्स समाचार ने उठाया था मामला

स्मारक परिसर में की गई इस अस्थायी व्यवस्था को लेकर पीपुल्स समाचार ने प्रमुखता से खबर प्रकाशित कर संबंधित विभाग का ध्यान आकर्षित किया था। खबर सामने आने के बाद परिसर में बनाई गई अस्थायी छत को हटा दिया गया। यह कार्रवाई इस लिहाज से महत्वपूर्ण है कि राष्ट्रीय महत्व के संरक्षित स्मारकों की मूल संरचना और ऐतिहासिक स्वरूप को सुरक्षित रखना बेहद जरूरी है।

एएसआई के संरक्षण में है प्राचीन मंदिर

ग्राम कोडल का प्राचीन मंदिर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण यानी एएसआई के राष्ट्रीय महत्व के संरक्षित स्मारकों में शामिल है। ऐसे ऐतिहासिक स्थलों पर किसी भी तरह का अनधिकृत या अस्थायी निर्माण स्मारक के मूल स्वरूप को प्रभावित कर सकता है। स्मारकों की सुरक्षा, नियमित निगरानी और उनकी मूल संरचना को सुरक्षित रखना संबंधित विभाग की जिम्मेदारी होती है।

Damoh-News

निगरानी व्यवस्था पर भी उठ रहे सवाल

दमोह में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण का उप मंडल होने के बावजूद जिले के कुछ संरक्षित स्मारकों की नियमित निगरानी को लेकर सवाल उठते रहे हैं। समय-समय पर इन ऐतिहासिक स्थलों से जुड़ी छोटी-छोटी समस्याएं सामने आती रही हैं। कुछ दिन पहले कुंडलपुर के प्राचीन स्मारक परिसर में चौकीदार जर्जर भवन से ड्यूटी करता नजर आया था। वहीं, कनोरा के राष्ट्रीय महत्व के स्मारक परिसर के बाहर फेंसिंग हो जाने के कारण लोगों के लिए वहां पहुंचना भी मुश्किल हो गया है।

समय रहते हो कार्रवाई तो बच सकती है धरोहर

ऐतिहासिक और पुरातात्विक धरोहरें सिर्फ पत्थरों और इमारतों का समूह नहीं, बल्कि हमारी पुरानी संस्कृति और इतिहास की पहचान हैं। इसलिए इनकी नियमित निगरानी बेहद जरूरी है। कोडल में अस्थायी छत हटाए जाने की कार्रवाई से यह उम्मीद जरूर जगी है कि आगे भी संरक्षित स्मारकों से जुड़ी समस्याओं पर समय रहते ध्यान दिया जाएगा। अगर छोटी-छोटी कमियों को शुरुआत में ही दूर कर दिया जाए, तो ऐतिहासिक धरोहरों को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है।

PUBLISHED BY: GARIMA 

Dheeraj Jonsan
By Dheeraj Jonsan

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