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जस्टिस यशवंत वर्मा कैश कांड में आज बड़ा फैसला! लोकसभा में खुलेगा जांच रिपोर्ट का राज

जस्टिस यशवंत वर्मा कैश कांड में अब बड़ा मोड़ सामने आया है। मामले की जांच पूरी हो चुकी है और जांच समिति की रिपोर्ट आज लोकसभा में पेश की जाएगी।
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जस्टिस यशवंत वर्मा कैश कांड में आज बड़ा फैसला! लोकसभा में खुलेगा जांच रिपोर्ट का राज
जस्टिस यशवंत वर्मा कैश कांड की जांच लोकसभा में पेश की जाएगी

जस्टिस यशवंत वर्मा से जुड़े कैश कांड में अब एक बड़ा मोड़ सामने आया है। मामले की जांच पूरी हो चुकी है और जांच समिति की रिपोर्ट आज लोकसभा में पेश की जाएगी। रिपोर्ट सामने आने के बाद संसद में इस मामले पर आगे की कार्रवाई का रास्ता साफ हो सकता है। यही वजह है कि इस पूरे मामले पर राजनीतिक और कानूनी दोनों गलियारों में नजरें टिकी हुई हैं।

जस्टिस यशवंत वर्मा पर उनके सरकारी आवास से कथित तौर पर बड़ी मात्रा में जला हुआ कैश मिलने के बाद गंभीर सवाल उठे थे। इस मामले में 200 से ज्यादा सांसदों ने उन्हें पद से हटाने की मांग करते हुए लोकसभा अध्यक्ष को याचिका दी थी। इसके बाद लोकसभा अध्यक्ष ने मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की थी।

अब समिति ने अपनी जांच पूरी कर ली है। रिपोर्ट सदन में रखे जाने के बाद यह पता चलेगा कि समिति ने आरोपों और उपलब्ध सबूतों को लेकर क्या निष्कर्ष निकाला है।

आज लोकसभा में पेश होगी जांच रिपोर्ट

जस्टिस यशवंत वर्मा मामले की जांच करने वाली समिति की रिपोर्ट आज लोकसभा में पेश की जाएगी। यह रिपोर्ट लोकसभा सचिव द्वारा सदन के पटल पर रखी जाएगी। बताया गया है कि यह प्रक्रिया Judges (Inquiry) Act, 1968 और इससे जुड़े नियमों के तहत पूरी की जाएगी। रिपोर्ट में जांच के दौरान सामने आए तथ्यों और सबूतों का विवरण होगा। इसमें मौखिक गवाही के साथ-साथ दस्तावेजी और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों को भी शामिल किया गया है। रिपोर्ट का एक हिस्सा हिंदी में और दूसरा हिस्सा अंग्रेजी में होगा। रिपोर्ट सदन में रखे जाने के बाद सांसदों के सामने मामले की जांच से जुड़े निष्कर्ष आ जाएंगे।

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रिपोर्ट आने के बाद क्या होगा?

रिपोर्ट पेश होने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ आगे क्या कार्रवाई होगी। अगर जांच समिति ने आरोपों को गंभीर और साबित होने योग्य माना है, तो संसद में उनके खिलाफ चल रही पद से हटाने की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है। इसके बाद महाभियोग प्रस्ताव पर चर्चा और मतदान की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। हालांकि, सिर्फ जांच रिपोर्ट पेश होने से किसी जज को तुरंत पद से हटाया नहीं जाता। इसके लिए संविधान और संबंधित कानून के तहत तय संसदीय प्रक्रिया का पालन करना होता है।

आखिर क्या है पूरा कैश कांड?

यह पूरा मामला मार्च 2025 में सामने आया था। उस समय दिल्ली के तुगलक क्रिसेंट इलाके में स्थित जस्टिस यशवंत वर्मा के सरकारी आवास के एक स्टोर रूम में आग लग गई थी। आग बुझाने के लिए जब सुरक्षाकर्मी और दमकलकर्मी मौके पर पहुंचे, तो वहां कथित तौर पर आधे जले हुए नोट मिले। इसके बाद मामले ने तेजी से तूल पकड़ लिया।

घर के स्टोर रूम में इतनी बड़ी मात्रा में कथित तौर पर जले हुए कैश के मिलने से कई सवाल खड़े हुए। मामला सामने आने के बाद न्यायपालिका और राजनीतिक जगत में भी चर्चा शुरू हो गई। उस समय जस्टिस यशवंत वर्मा और उनकी पत्नी मध्य प्रदेश में थे। घटना के बाद कैश मिलने को लेकर जांच शुरू हुई और पूरे मामले की जानकारी सामने आने लगी।

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जस्टिस वर्मा ने आरोपों से किया इनकार

जस्टिस यशवंत वर्मा ने अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज किया था। उनका कहना था कि बरामद कैश उनका नहीं था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया था कि उनकी गैरमौजूदगी में उनके घर में कैश रखकर उन्हें फंसाने की साजिश की गई हो सकती है। यानी जस्टिस वर्मा ने उस कैश को अपने से जोड़ने से साफ इनकार किया। यही वजह है कि जांच समिति के सामने उनके पक्ष और मामले से जुड़े दूसरे लोगों के बयानों और सबूतों को भी अहम माना गया। अब सभी की नजरें इस बात पर हैं कि जांच समिति ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर क्या निष्कर्ष निकाला है।

दिल्ली हाई कोर्ट से इलाहाबाद हाई कोर्ट ट्रांसफर

कैश कांड सामने आने के बाद जस्टिस यशवंत वर्मा को दिल्ली हाई कोर्ट से इलाहाबाद हाई कोर्ट ट्रांसफर किया गया था। हालांकि, उन्हें इलाहाबाद हाई कोर्ट में न्यायिक कामकाज करने की अनुमति नहीं दी गई थी। इसके बाद उन्होंने अप्रैल 2026 में जज के पद से इस्तीफा दे दिया। बताया गया है कि उन्होंने 9 अप्रैल 2026 को इस्तीफा दिया था। लेकिन राष्ट्रपति की ओर से उनका इस्तीफा अभी स्वीकार नहीं किया गया है। इसी वजह से तकनीकी रूप से उनका नाम अभी भी इलाहाबाद हाई कोर्ट के जजों की सूची में दिखाई देता है।

200 से ज्यादा सांसदों ने की थी कार्रवाई की मांग

जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ कार्रवाई की मांग सिर्फ कानूनी स्तर पर ही नहीं हुई, बल्कि संसद में भी इस मामले को उठाया गया। 200 से ज्यादा सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष को याचिका सौंपकर जस्टिस वर्मा को पद से हटाने की मांग की थी। सांसदों की इस मांग के बाद लोकसभा अध्यक्ष ने तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन किया।

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महाभियोग प्रस्ताव पर आगे बढ़ सकती है प्रक्रिया

जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद जस्टिस वर्मा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है। संसद में किसी जज को हटाने की प्रक्रिया सामान्य प्रशासनिक कार्रवाई से अलग होती है।

Garima Vishwakarma
By Garima Vishwakarma

गरिमा विश्वकर्मा | People’s Institute of Media Studies से B.Sc. Electronic Media की डिग्री | पत्रकार...Read More

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