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छत्तीसगढ़ में स्वाइन फ्लू का कहर, मरीजों की बढ़ती संख्या ने बढ़ाई चिंता, अलर्ट मोड पर स्वास्थ्य विभाग

छत्तीसगढ़ में स्वाइन फ्लू का कहर, मरीजों की बढ़ती संख्या ने बढ़ाई चिंता, अलर्ट मोड पर स्वास्थ्य विभाग
रायपुर। छत्तीसगढ़ में स्वाइन फ्लू के मरीजों की बढ़ती संख्या ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। स्वास्थ्य सेवाओं के संचालक ऋतुराज रघुवंशी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सभी जिलों को बीमारियों के मद्देनजर सावधानी बरतने के निर्देश दिए। बैठक में डायरिया-उल्टी और स्वाइन फ्लू के मामलों की वर्तमान स्थिति, रोकथाम व इलाज के लिए की जा रही तैयारियों की स्थिति पर चर्चा की गई।

अब तक 19 से ज्यादा मरीजों की मौत

वीडियो कॉन्फ्रेंस में राज्य के सभी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी और सिविल सर्जन तथा मुख्य अस्पताल अधीक्षक उपस्थित थे। गौरतलब है कि राज्य में स्वाइन फ्लू से सात मरीजों की मौत हो चुकी है। अब तक 19 से ज्यादा मरीज मिल चुके हैं। रायपुर में मंगलवार को स्वाइन फ्लू के 16 संदिग्ध मरीज मिले। उनके स्वाब के नमूने जांच के लिए भेजे गए हैं। राजधानी में अब तक एक पॉजिटिव मरीज की पुष्टि हुई है। राज्य के सबसे बड़े स्वास्थ्य संस्थान अंबेडकर अस्पताल के पेइंग वार्ड को स्वाइन फ्लू के मरीजों के लिए आरक्षित कर दिया गया है। यहां चार मरीज भर्ती हैं। बिलासपुर सिम्स में चार बेड का अलग वार्ड तैयार किया गया है।

स्वाइन फ्लू के लक्षण

स्वाइन फ्लू के शुरुआती लक्षण सामान्य सर्दी से शुरू होते हैं। एक-दो दिन बाद सर्दी, खांसी, कफ, सिरदर्द और हाथ-पैरों में दर्द शुरू हो जाता है। बुखार के साथ स्थिति तेजी से बदलती है। खांसी इतनी तेज होती है कि सांस लेना मुश्किल हो जाता है। जब कोई संक्रमित व्यक्ति छींकता है या उसके करीब जाता है तो यह सांस के माध्यम से दूसरों को संक्रमित करता है। कोरोना की तरह स्वाइन फ्लू से बचने के लिए भी सावधानी बरतनी जरूरी है। संक्रमित व्यक्ति के पास जाने से पहले मास्क पहनना अनिवार्य है।

कैसे फैलता है वायरस ?

यह एक अत्यधिक घातक संक्रामक रोग है, जो अफ्रीकन स्वाइन फीवर नामक वायरस के जरिए फैलता है। इससे प्रभावित सुअरों को बुखार, दस्त, उल्टी, कान और पेट में लाल चकत्ते दिखाई देते हैं। बहुत ज्यादा संक्रामक होने की वजह से संपर्क में आने वाले दूसरे सूअर बहुत जल्दी इस बीमारी की चपेट में आ जाते हैं। बुखार के साथ एनोरेक्सिया, भूख ना लगना, त्वचा में रक्तस्राव, उल्टी और दस्त शामिल होते हैं।

ऐसे किया जाता है कंट्रोल

अफ्रीकन स्वाइन फ्लू वायरस को कंट्रोल करने के लिए एक किलोमीटर के दायरे में मौजूद सूअरों को मार दिया जाता है। ताकि बीमारी से दूसरे सूअर को संक्रमित होने से बचाया जा सके। इसके अलावा तीन किलोमीटर के दायरों में सभी जानवरों की सैंपलिंग कर निगरानी करना होगी।
Shivani Gupta
By Shivani Gupta

शिवानी गुप्ता | MCU, भोपाल से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में ग्रेजुएशन | 9 वर्षों की टीवी और डिजिटल तक की य...Read More

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