MP News :बेटे की परेशानी देखकर दंपति ने ग्वालियर में शुरू किया 'तारे जमीन पर' जैसा थेरेपी सेंटर

यह कहानी है उन अभिभावकों की जिन्होंने अपने बच्चे की तकलीफ से महसूस किया कि ऐसे ही दूसरे बच्चों को कितनी परेशानी होती होगी। ग्वालियर के एक दपंति ने अपने बेटे की स्पीच डिले समस्या को देखते हुए अन्य बच्चों के लिए थेरेपी सेंटर शुरू कर दिया।
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बेटे की परेशानी देखकर दंपति ने ग्वालियर में शुरू किया 'तारे जमीन पर' जैसा थेरेपी सेंटर
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    राजीव कटारे, ग्वालियर। ग्वालियर में एक दंपति ने अपने बच्चे में स्पीच डिले समस्या देखने के बाद अन्य बच्चों की मदद का संकल्प लिया और कैलाश विहार सिटी सेंटर में चाइल्ड डेवलपमेंट थेरेपी सेंटर स्थापित किया। डेढ़ साल पहले 15 बच्चों से शुरू हुआ यह केंद्र आज रोज 200 बच्चों को थेरेपी दे रहा। यहां ADHD, GDD, LD जैसी विकास-संबंधी चुनौतियों से जूझ रहे बच्चों के लिए खेल-आधारित और इंटरैक्टिव थेरेपी दी जाती है। संचालक सचिन और उनकी पत्नी का कहना है कि समय पर थेरेपी और सही सपोर्ट से कई बच्चे बेहतर प्रगति दिखा रहे हैं। यह पहल माता-पिता के अनुभव से जन्मी उम्मीद की मिसाल बन गई है।

    बच्चे की समस्या के लिए मां ने छोड़ी जॉब

    संचालक सचिन किंगर और पत्नी शिल्पा के अनुसार उनका बच्चा जब डेढ़ साल का था तो उसे स्पीच डिले की समस्या थी, इसलिए थेरेपी दिलाने दिल्ली ले जाते थे। जब आमिर खान की मूवी 'तारे जमीन पर' देखी, तो ग्वालियर में ऐसे सेंटर खोलने की योजना बनाई, इसके लिए शिल्पा ने अपना जॉब छोड़ दिया है। वर्तमान में इस सेंटर में केवल ग्वालियर ही नहीं बल्कि भिंड, मुरैना, दतिया एवं झांसी जैसे शहरों से लोग अपने बच्चों को लेकर आ रहे हैं।

    पहले हम बच्चे को दिल्ली ले जाते थे 

    अभिभावक महोरन सिंह ने कहा कि मेरा बच्चा 7 साल का है, यह पहले बोलता नहीं था, उम्र के साथ यह जिद्दी भी हो गया। मैं दिल्ली उपचार के लिए एम्स लेकर गया। वहां पता चला कि उसे ऑटिज्म है। हमें थेरेपी की सलाह दी, तो मैं इस सेंटर में आया। यहां से बच्चे को आराम है। 

    जो फीस नहीं दे पाते उनके लिए डोनेशन कराते हैं

    लिटिल वंडर चाइल्ड डेवलपमेंट सेंटर की डायरेक्टर डॉ. शिल्पा सचिन किंगर ने बताया कि यहां विशेषज्ञों द्वारा बच्चों को प्ले वे थेरेपी के माध्यम से ट्रीटमेंट दिया जा रहा है। जो पैरेंट्स फीस नहीं दे पाते, उनकी फीस अपने रिश्तेदारों से दान में पैसा लेकर भरते हैं। भले ही हमें प्रॉफिट नहीं होता, लेकिन हमारे माध्यम से बच्चे समय ठीक हो रहे हैं। 

    Naresh Bhagoria
    By Naresh Bhagoria

    नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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