पुलिस आरक्षक भर्ती पर सुप्रीम कोर्ट की मुहर, 400+ अभ्यर्थियों की ज्वाइनिंग का रास्ता साफ

बिलापसुर: छत्तीसगढ़ में पुलिस आरक्षक भर्ती की वेटिंग लिस्ट में शामिल 400 से अधिक अभ्यर्थियों के लिए बड़ी राहत सामने आई है। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार की विशेष अनुमति याचिका (SLP) खारिज कर दी है। इसके साथ ही हाई कोर्ट के उस फैसले के प्रभावी होने का रास्ता साफ हो गया है, जिसके तहत पात्र वेटिंग-लिस्ट अभ्यर्थियों की नियुक्ति का मामला आगे बढ़ा था। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद संबंधित प्रक्रिया को 90 दिनों के भीतर पूरा करने का निर्देश दिया गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने सरकार की SLP की खारिज
छत्तीसगढ़ सरकार ने हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर की थी। सुनवाई के बाद शीर्ष अदालत ने सरकार की SLP खारिज कर दी। इससे वेटिंग लिस्ट में शामिल पात्र अभ्यर्थियों की नियुक्ति का रास्ता खुल गया है।
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90 दिन में पूरी होगी नियुक्ति प्रक्रिया
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद संबंधित विभाग को तय समय-सीमा के भीतर नियुक्ति प्रक्रिया आगे बढ़ानी होगी। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार इसमें दस्तावेज सत्यापन और नियुक्ति/पदस्थापना से जुड़ी प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश शामिल है।
2017 में निकली थी 2259 पदों पर भर्ती
मामला वर्ष 2017 में जारी पुलिस आरक्षक भर्ती विज्ञापन से जुड़ा है। उस समय आरक्षक (जीडी एवं अन्य) के 2259 पदों पर भर्ती के लिए प्रक्रिया शुरू की गई थी। भर्ती प्रक्रिया के बाद 1 मार्च 2021 को वेटिंग लिस्ट प्रकाशित हुई थी।
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नियुक्ति नहीं मिली तो हाई कोर्ट पहुंचे अभ्यर्थी
वेटिंग लिस्ट में शामिल अभ्यर्थियों ने नियमों के तहत रिक्त पदों पर नियुक्ति की मांग की थी। सरकार की ओर से नियुक्ति प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ने के बाद परसराम ध्रुव समेत अन्य अभ्यर्थियों ने वर्ष 2023 में हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
1 फरवरी 2024 को हाई कोर्ट का अहम फैसला
मामले में हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने 1 फरवरी 2024 को अभ्यर्थियों के पक्ष में फैसला सुनाया था। कोर्ट ने छत्तीसगढ़ पुलिस कार्यपालिक बल (नियुक्ति तथा सेवा शर्तें) नियम, 2007 के नियम 13(2) को मामले में महत्वपूर्ण आधार माना था।
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रिक्त पद वेटिंग लिस्ट से भरने का प्रावधान
मामले में हाई कोर्ट के समक्ष यह मुद्दा था कि वेटिंग लिस्ट की अवधि के दौरान पदोन्नति, सेवानिवृत्ति, मृत्यु या अन्य कारणों से रिक्त हुए पदों को किस तरह भरा जाए। हाई कोर्ट के डिवीजन बेंच ने संबंधित नियम के आधार पर वेटिंग लिस्ट से नियुक्ति का रास्ता स्वीकार किया था।
सिंगल बेंच के आदेश में हुआ बदलाव
डिवीजन बेंच ने सिंगल बेंच के उस आदेश को रद्द कर दिया था, जिसमें वेटिंग लिस्ट की अवधि में पदोन्नति या मृत्यु के कारण रिक्त हुए पदों पर वेटिंग लिस्ट से नियुक्ति नहीं देने की बात कही गई थी।
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राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दी चुनौती
हाई कोर्ट के फैसले के बाद राज्य सरकार ने मामले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। अब शीर्ष अदालत द्वारा SLP खारिज किए जाने के बाद हाई कोर्ट के फैसले के अनुरूप आगे की प्रक्रिया का रास्ता साफ हुआ है।
400 से अधिक अभ्यर्थियों की नजर अब नियुक्ति पर
इस आदेश का सीधा संबंध वेटिंग लिस्ट में शामिल 400 से अधिक पात्र अभ्यर्थियों से है। लंबे समय से नियुक्ति की प्रतीक्षा कर रहे उम्मीदवारों के लिए अब अगला चरण पुलिस विभाग और संबंधित प्रशासनिक स्तर पर होने वाली प्रक्रिया है।
अभ्यर्थियों की ओर से इन वकीलों ने की पैरवी
मामले में अभ्यर्थियों की ओर से सीनियर एडवोकेट नौशीना आफरीन अली, एडवोकेट अभिजीत श्रीवास्तव और एओआर अंशुमन श्रीवास्तव ने पैरवी की।
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अब आगे क्या होगा?
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद संबंधित विभाग को तय 90 दिनों की समय-सीमा में नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करनी होगी। अभ्यर्थियों की नजर अब दस्तावेज सत्यापन, प्रशासनिक औपचारिकताओं और नियुक्ति/पदस्थापना से जुड़े अगले आदेश पर रहेगी।




















