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चुनाव आयोग की नियुक्ति पर बहस तेज...सरकार बोली- पीएम लोकतंत्र के खिलाफ जाएंगे, ये सोच गलत, SC ने कहा- अधिकारी निष्पक्ष होना चाहिए

2023 में सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की संविधान पीठ ने फैसला दिया था कि जब तक संसद नया कानून नहीं बनाती, तब तक मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति एक तीन सदस्यीय समिति करेगी। इसमें शामिल होंगे प्रधानमंत्री, भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष। कोर्ट का मानना था कि इससे नियुक्ति प्रक्रिया निष्पक्ष और स्वतंत्र रहेगी।
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सरकार बोली- पीएम लोकतंत्र के खिलाफ जाएंगे, ये सोच गलत, SC ने कहा- अधिकारी निष्पक्ष होना चाहिए
CEC नियुक्ति पर सरकार और सुप्रीम कोर्ट की अलग- अलग राय

नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) और चुनाव आयुक्तों (EC) की नियुक्ति को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चल रही अहम सुनवाई गुरुवार को पूरी हो गई। अदालत ने फिलहाल अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। अब कोर्ट तय करेगा कि 2023 के नए कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं को पांच जजों की संविधान पीठ के पास भेजा जाए या नहीं। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कई अहम सवाल पूछे। अदालत ने कहा कि मुद्दा प्रधानमंत्री पर भरोसे का नहीं, बल्कि चुनाव आयोग की स्वतंत्रता और निष्पक्षता दिखने का है।

नए कानून के तहत चयन समिति में कौन हैं?

2023 के कानून के अनुसार चयन समिति में तीन सदस्य हैं, समिति में सरकार के दो सदस्य और विपक्ष का एक सदस्य होता है।

  1. प्रधानमंत्री
  2. प्रधानमंत्री द्वारा नामित केंद्रीय मंत्री
  3. लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष (या सबसे बड़े विपक्षी दल के नेता)

क्या है पूरा मामला?

2023 में सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की संविधान पीठ ने फैसला दिया था कि जब तक संसद नया कानून नहीं बनाती, तब तक मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति एक तीन सदस्यीय समिति करेगी। इसमें शामिल होंगे प्रधानमंत्री, भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष। कोर्ट का मानना था कि इससे नियुक्ति प्रक्रिया निष्पक्ष और स्वतंत्र रहेगी। इसके बाद दिसंबर 2023 में संसद ने नया कानून पारित किया। इस कानून में CJI को चयन समिति से हटा दिया गया और उनकी जगह प्रधानमंत्री द्वारा नामित एक केंद्रीय मंत्री को शामिल कर दिया गया।

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याचिकाकर्ता बोले- नए कानून से कोर्ट की ताकत कम होगी

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि नया कानून सुप्रीम कोर्ट के 2023 के फैसले की भावना के खिलाफ है। उनका तर्क है कि CJI को हटाने से नियुक्ति प्रक्रिया में सरकार का प्रभाव बढ़ जाएगा और चुनाव आयोग की स्वतंत्रता प्रभावित हो सकती है।

अब पढ़िए सुप्रीम कोर्ट- सरकार का पक्ष

मुद्दा PM पर भरोसे का नहीं, निष्पक्षता का है- सुप्रीम कोर्ट

सुनवाई के दौरान जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की बेंच ने साफ कहा कि अदालत प्रधानमंत्री पर भरोसा नहीं करती, ऐसा सवाल ही नहीं उठता। कोर्ट ने कहा कि प्रधानमंत्री पर पूरा भरोसा है, लेकिन असली मुद्दा यह है कि चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था की नियुक्ति प्रक्रिया स्वतंत्र और निष्पक्ष दिखनी भी चाहिए। बेंच ने यह भी पूछा कि जब CJI, CBI निदेशक और लोकपाल की नियुक्ति करने वाली समिति का हिस्सा हो सकते हैं, तो चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से उन्हें बाहर रखने का क्या औचित्य है।

कोर्ट ने सुनवाई के दौरान याद दिलाया कि पहले भी प्रधानमंत्री पर भरोसा जताया गया था कि वे आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों को मंत्री नहीं बनाएंगे। इसलिए यह मामला प्रधानमंत्री की नीयत पर सवाल उठाने का नहीं, बल्कि नियुक्ति प्रक्रिया में निष्पक्षता बनाए रखने का है।

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पीएम संवैधानिक शख्स, लोकतंत्र के खिलाफ कैसे जा सकते- तुषार मेहता

केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि यह मान लेना गलत होगा कि चयन समिति में सरकार के दो सदस्य होने से प्रधानमंत्री लोकतांत्रिक सिद्धांतों के खिलाफ काम करेंगे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का पद संवैधानिक और सम्मानजनक है, इसलिए अदालत यह धारणा नहीं बना सकती कि उनके फैसले बुरी नीयत से लिए जाएंगे।

फिर तो कैबिनेट में भी पीएम की जगह बाहरी व्यक्ति की राय जरूरी...

तुषार मेहता ने दलील दी कि अगर प्रधानमंत्री के फैसलों पर भरोसा नहीं किया जा सकता, तो फिर क्या कैबिनेट का गठन करते समय भी उन्हें किसी पूर्व जज या बाहरी व्यक्ति की सलाह लेने की शर्त रखी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसी सोच लोकतांत्रिक व्यवस्था के अनुरूप नहीं है।

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तीनों स्तंभ स्वतंत्र संस्थाएं, फैसले का सम्मान हों- अटार्नी जनरल

अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने कहा कि संसद के बनाए कानून पर सिर्फ इसलिए सवाल नहीं उठाया जा सकता कि कोई दूसरा मॉडल भी अपनाया जा सकता था। उन्होंने कहा कि विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका तीनों स्वतंत्र संवैधानिक संस्थाएं हैं और संसद के फैसलों का सम्मान किया जाना चाहिए।

Aakash Waghmare
By Aakash Waghmare

आकाश वाघमारे | MCU, भोपाल से स्नातक और फिर मास्टर्स | मल्टीमीडिया प्रोड्यूसर के तौर पर 3 वर्षों का क...Read More

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