‘अब लूट UPI तक पहुंच गई’... UPI के ‘No Fee’ पर उठे सवाल, खरगे-राहुल ने मोदी सरकार को घेरा

देश में UPI भुगतान को लेकर एक बार फिर राजनीति गरमा गई है। कांग्रेस ने केंद्र की मोदी सरकार पर UPI लेनदेन पर शुल्क लगाने की तैयारी करने का आरोप लगाया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि अब मोदी सरकार की ‘लूट’ UPI तक पहुंच गई है। खरगे ने कहा कि पहले ‘No Fees on UPI’ की बात होती थी, लेकिन अब इसे बदलकर 2,000 रुपए तक के UPI लेनदेन पर शुल्क नहीं लगाने की बात कही जा रही है। उनके मुताबिक, इससे लोगों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि 2,000 रुपए से अधिक के डिजिटल भुगतान पर आगे क्या होगा।
खरगे बोले- 'महंगाई के बीच जनता पर नया बोझ'
मल्लिकार्जुन खरगे ने महंगाई का मुद्दा उठाते हुए केंद्र सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि बढ़ती महंगाई के कारण आम आदमी की जेब पहले ही दबाव में है। ऐसे समय में डिजिटल भुगतान पर किसी तरह का शुल्क लगाने की योजना लोगों की परेशानी और बढ़ा सकती है। खरगे ने आरोप लगाया कि सरकार जनता पर ‘डिजिटल पेमेंट टैक्स’ जैसा बोझ डालने की तैयारी कर रही है। उन्होंने कहा कि इससे आम लोगों की बची हुई बचत पर भी असर पड़ सकता है।
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राहुल गांधी ने भी सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी UPI शुल्क के मुद्दे पर केंद्र सरकार को निशाने पर लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिकी भुगतान कंपनियों के दबाव में सरकार UPI पर शुल्क लगाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। राहुल गांधी ने कहा कि सरकार भले ही यह कह रही हो कि UPI का सीधा शुल्क ग्राहकों से नहीं लिया जाएगा, लेकिन 2,000 रुपए से अधिक के व्यापारी लेनदेन पर MDR यानी Merchant Discount Rate लागू होने की स्थिति में इसका असर आखिरकार आम ग्राहक पर पड़ सकता है।
राहुल गांधी का दावा- 'दुकानदारों से वसूली का असर ग्राहकों पर पड़ेगा'
राहुल गांधी के मुताबिक, अगर दुकानदारों को UPI भुगतान पर शुल्क देना पड़ा तो वे इस अतिरिक्त खर्च को सामान की कीमत में जोड़ सकते हैं। ऐसे में सीधे तौर पर ग्राहक से शुल्क न लिया जाए, फिर भी बढ़ी हुई कीमतों के जरिए इसका असर उसकी जेब पर पड़ सकता है। उन्होंने दावा किया कि 2,000 रुपए से अधिक के लेनदेन संख्या में भले ही कम हों, लेकिन UPI के कुल लेनदेन मूल्य में उनका हिस्सा काफी बड़ा है।
अमेरिकी कंपनियों के दबाव का भी आरोप
राहुल गांधी ने यह भी आरोप लगाया कि अमेरिकी भुगतान कंपनियां लंबे समय से भारत की ‘Zero MDR’ नीति का विरोध करती रही हैं। उनका कहना है कि सरकार अब इसी नीति में बदलाव की दिशा में कदम उठा रही है। उन्होंने केंद्र सरकार पर अमेरिकी दबाव के आगे झुकने का आरोप लगाते हुए कहा कि यह फैसला देश के डिजिटल भुगतान सिस्टम और आम लोगों दोनों को प्रभावित कर सकता है।
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वित्त मंत्रालय की अधिसूचना के बाद शुरू हुआ विवाद
कांग्रेस नेताओं के ये बयान वित्त मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना के बाद सामने आए हैं। इसमें कहा गया है कि 2,000 रुपए तक के UPI लेनदेन पर बैंकों या सिस्टम प्रदाताओं की ओर से कोई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष शुल्क नहीं लगाया जाएगा। सरकार के मुताबिक, देश में होने वाले करीब 96 प्रतिशत UPI लेनदेन इस सीमा के अंदर आते हैं। यानी अधिकांश छोटे UPI भुगतान फिलहाल शुल्क से बाहर रहेंगे।



















