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BS-6 गाड़ियों की लागत बढ़ी:प्लैटिनम ड्यूटी बढ़ने से महंगी होंगी डीजल SUV और हाइब्रिड कारें

BS-6 मानदंडों के कारण गाड़ियों की लागत बढ़ने वाली है जिसका सीधा असर डीजल SUV और हाइब्रिड कारों पर पड़ेगा। प्लेटिनम ड्यूटी में बढ़ोतरी के चलते ये वाहन अब और महंगे होंगे।
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प्लैटिनम ड्यूटी बढ़ने से महंगी होंगी डीजल SUV और हाइब्रिड कारें
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देश में आने वाले दिनों में डीजल SUV और स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड कारें खरीदना महंगा पड़ सकता है। इसकी बड़ी वजह प्लैटिनम पर बढ़ाया गया आयात शुल्क है। सरकार ने प्लैटिनम पर प्रभावी इंपोर्ट ड्यूटी 6.4% से बढ़ाकर 15.4% कर दी है। प्लैटिनम का इस्तेमाल गाड़ियों में प्रदूषण नियंत्रण के लिए किया जाता है। खासतौर पर BS-6 मानकों को पूरा करने वाले वाहनों में इसकी जरूरत ज्यादा होती है। ऐसे में बढ़ी हुई ड्यूटी का सीधा असर ऑटो कंपनियों की लागत पर पड़ेगा और कंपनियां इसका बोझ ग्राहकों पर डाल सकती हैं।

कितनी महंगी हो सकती हैं गाड़ियां

ऑटो इंडस्ट्री से जुड़े जानकारों के मुताबिक मिड-साइज डीजल SUV की कीमत करीब 12 हजार रुपए तक बढ़ सकती है। वहीं स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड कारें करीब 18 हजार रुपए तक महंगी हो सकती हैं। एंट्री-लेवल पेट्रोल कारों की कीमतों में भी करीब 4 हजार रुपए तक का इजाफा देखने को मिल सकता है।

क्यों जरूरी है प्लैटिनम

प्लैटिनम का इस्तेमाल गाड़ियों के कैटालिटिक कन्वर्टर और साइलेंसर फिल्टर में किया जाता है। यह इंजन से निकलने वाले प्रदूषण को कम करने में मदद करता है। नीति आयोग के पूर्व निदेशक रणधीर सिंह के मुताबिक ड्यूटी बढ़ने से BS-6 उत्सर्जन नियमों का पालन करना महंगा हो जाएगा। खासतौर पर डीजल और हाइब्रिड वाहनों पर इसका असर ज्यादा पड़ेगा।

किन कंपनियों पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर

प्लैटिनम महंगा होने से कई बड़ी ऑटो कंपनियों की लागत बढ़ सकती है। टाटा मोटर्स जैसी कंपनियां सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकती हैं। वहीं महिंद्रा एंड महिंद्रा की स्कॉर्पियो-एन, थार और SUV-700 जैसे मॉडल भी महंगे पड़ सकते हैं। इसके अलावा टोयोटा और मारुति सुजुकी की स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड कारों की लागत बढ़ने की संभावना है। विशेषज्ञों के मुताबिक हाइब्रिड गाड़ियों में इंजन बार-बार स्टार्ट और बंद होता है इसलिए उनके फिल्टर में ज्यादा प्लैटिनम इस्तेमाल होता है।

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कमर्शियल वाहनों में सबसे ज्यादा लगता है प्लैटिनम

  • कमर्शियल वाहनों में सबसे ज्यादा यानी 20 ग्राम से अधिक प्लैटिनम इस्तेमाल होता है।
  • स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड कारों में करीब 10 से 15 ग्राम तक प्लैटिनम लगता है।
  • मंझौली डीजल SUV में इसकी मात्रा 6 से 10 ग्राम तक होती है।
  • वहीं पेट्रोल कारों में लगभग 2 से 4 ग्राम प्लैटिनम इस्तेमाल किया जाता है।

सरकार ने रिसाइक्लिंग को दिया बढ़ावा

सरकार ने पुराने और खराब साइलेंसर फिल्टर के आयात पर टैक्स घटाकर 4.35% कर दिया है। इससे खराब फिल्टर से प्लैटिनम निकालकर दोबारा इस्तेमाल करना सस्ता होगा। हालांकि नई प्लैटिनम ड्यूटी बढ़ने के कारण वेंडर अब ऑटो कंपनियों से ज्यादा कीमत वसूल सकते हैं।

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इलेक्ट्रिक कारों की मांग बढ़ सकती है

विशेषज्ञों का मानना है कि प्लैटिनम महंगा होने से इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग बढ़ सकती है। EV में कैटालिटिक कन्वर्टर की जरूरत नहीं होती इसलिए इनकी लागत पर इसका असर नहीं पड़ेगा। इसके अलावा कंपनियां हाइड्रोजन तकनीक पर भी ज्यादा फोकस कर सकती हैं। रिसर्च बढ़ने के साथ भविष्य में हाइड्रोजन कारों की कीमत कम होने की संभावना जताई जा रही है।

Sumit Shrivastava
By Sumit Shrivastava

मास कम्युनिकेशन में Ph.D और M.Phil पूर्ण की है तथा टीवी और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते ...Read More

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