फर्जी सील-साइन से निकाले ₹12 लाख:खिलचीपुर की ग्राम पंचायत में सामुदायिक भवन घोटाले का आरोप, ग्रामीणों ने किया विरोध प्रदर्शन

राजगढ़ जिले की खिलचीपुर जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत चीबडकला में सामुदायिक भवन निर्माण को लेकर बड़ा घोटाला सामने आया है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि काम पूरा किए बिना ही करीब 12 लाख रुपए निकाल लिए गए। मामले को लेकर गांव में भारी नाराजगी है और ग्रामीण अब कलेक्टर व जिला पंचायत सीईओ से शिकायत कर जांच और कार्रवाई की मांग करने की तैयारी में हैं।
सामुदायिक भवन के नाम पर निकाली गई लाखों की राशि
ग्रामीणों के मुताबिक चीबडखुर्द में विधायक निधि से सामुदायिक भवन निर्माण के लिए करीब 25 लाख रुपए स्वीकृत हुए थे। यह राशि क्षेत्रीय विधायक अमरसिंह यादव की निधि से मंजूर की गई थी। बताया जा रहा है कि निर्माण कार्य के लिए अब तक करीब 12 लाख रुपए जारी भी कर दिए गए लेकिन मौके पर भवन का काम लगभग अधूरा पड़ा है। जिस स्थान पर सामुदायिक भवन बनना था वहां केवल अधूरी कुर्सी लेवल तक का ढांचा दिखाई दे रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि उपसरपंच हजारीलाल और पंचायत सचिव ने फर्जी बिल लगाकर राशि निकाल ली।
ग्रामीणों ने किया विरोध प्रदर्शन
गुरुवार को बड़ी संख्या में ग्रामीण सामुदायिक भवन स्थल पर पहुंचे और विरोध प्रदर्शन किया।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि एक साल से ज्यादा समय बीत जाने के बावजूद निर्माण कार्य पूरा नहीं हुआ है। ग्रामीण कालूसिंह, कुमेरसिंह, बलवंत सिंह, ईश्वर सिंह, हरिसिंह, यादव सिंह, अनारसिंह, लाखन सिंह, लक्ष्मीनारायण, पवन, जगदीश, रामसिंह, दिलीप, अरविंद, रतन सिंह, मानसिंह, हरिओम, श्याम समेत सैकड़ों ग्रामीण मौके पर पहुंचे। ग्रामीणों ने कहा कि शुक्रवार को कलेक्टर और जिला पंचायत सीईओ को शिकायत देकर मामले की जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की जाएगी।
सरपंच ने लगाए फर्जी सील और साइन के आरोप
मामले की सबसे बड़ी बात यह है कि मौजूदा सरपंच मनोर वर्मा भी ग्रामीणों के साथ शिकायत करने पहुंचे।
सरपंच मनोर वर्मा ने आरोप लगाया कि उपसरपंच हजारीलाल ने उनके फर्जी सील और साइन का इस्तेमाल किया। उन्होंने दावा किया कि चौहान कंस्ट्रक्शन के नाम से बिल लगाकर बिना काम किए भुगतान निकाल लिया गया। सरपंच का कहना है कि उन्हें पूरी प्रक्रिया की जानकारी तक नहीं दी गई और उनके नाम का गलत इस्तेमाल किया गया।
सीईओ बोले- मामला गंभीर, जांच कराएंगे
जनपद पंचायत खिलचीपुर के सीईओ गोविंद सिंह सोलंकी ने मामले को गंभीर बताया है।
उन्होंने कहा कि पंचायत में किसी भी राशि के आहरण के लिए सरपंच और सचिव दोनों की संयुक्त सील और डीएससी जरूरी होती है। उन्होंने बताया कि पहले भी सरपंच की ओर से शिकायत की गई थी जिस पर डीएससी निष्क्रिय की गई थी। सीईओ के मुताबिक बाद में सरपंच ने लिखित में कहा था कि डीएससी उन्हीं के द्वारा उपयोग की जा रही है और ओटीपी भी उनके नंबर पर आ रहा है। अब यदि फिर से फर्जीवाड़े की शिकायत सामने आ रही है तो मामला गंभीर है। उन्होंने कहा कि वे स्वयं मौके पर जाकर जांच करवाएंगे और जो भी दोषी पाया जाएगा उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
पंचायत सचिव ने भी मानी गड़बड़ी की आशंका
ग्राम पंचायत चीबडकला के सचिव रामचंद्र तोमर ने भी माना कि गांव वालों से उन्हें इस मामले की जानकारी मिली थी। उन्होंने कहा कि 12 लाख रुपए निकाले जाने के बावजूद काम पूरा नहीं हुआ है। सचिव ने यह भी कहा कि पंचायत में उपसरपंच ही सरपंच की तरह काम कर रहा था और पंचायत दर्पण पोर्टल पर भी मोबाइल नंबर बदलने जैसी बातें सामने आई हैं। उन्होंने आशंका जताई कि फर्जी साइन और दस्तावेजों के जरिए भुगतान कराया गया हो सकता है।
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ग्रामीणों में भारी नाराजगी
मामले को लेकर गांव में भारी आक्रोश है। ग्रामीणों का कहना है कि विकास कार्यों के नाम पर भ्रष्टाचार किया जा रहा है और सरकारी राशि का दुरुपयोग हो रहा है। अब सभी की नजर प्रशासनिक जांच पर टिकी है कि आखिर बिना काम पूरा हुए लाखों रुपए का भुगतान कैसे हो गया और इस मामले में किसकी जिम्मेदारी तय होती है।












