1973 में तेल का झटका...1998 में प्याज पॉलिटिक्स ने भाजपा सरकार गिराई, भारत को कब- कब पड़ी महंगाई की मार

देश में 2026 की महंगाई दर 3.48% तक पहुंच गई है, जो पिछले 13 महीनों का सबसे ऊंचा स्तर माना जा रहा है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने भी पूरे वित्त वर्ष 2026-27 में औसत महंगाई 4.6% रहने का अनुमान जताया है।
लेकिन भारत इससे पहले भी कई बार ऐसे दौर देख चुका है, जब लोगों की रसोई से लेकर जेब तक पर महंगाई ने सीधा हमला किया। कभी तेल संकट ने देश को हिला दिया, तो कभी प्याज की कीमतों ने सरकार गिरा दी। आइए समझते हैं आजादी के बाद भारत के 6 सबसे बड़े महंगाई संकट के दौर।
1. 1973-74: तेल संकट और 25% पार महंगाई
यह भारत के इतिहास का पहला बड़ा महंगाई संकट था। 1973 में अरब देशों ने तेल सप्लाई पर रोक लगा दी, जिससे कच्चे तेल की कीमतें चार गुना तक बढ़ गईं।
भारत उस समय तेल आयात पर काफी निर्भर था, इसलिए पेट्रोल-डीजल से लेकर खाने-पीने की चीजों तक सब महंगा हो गया। इसी दौरान सूखे ने फसलें भी बर्बाद कर दीं।

हालात कितने खराब थे?
महंगाई दर 25.2% तक पहुंच गई
गेहूं, चीनी और खाद्य तेल के दाम आसमान पर पहुंच गए
विदेशी मुद्रा भंडार पर भारी दबाव पड़ा
यह दौर इतना खराब था कि 1973 के बजट को ब्लैक बजट कहा गया।
2. 1979-80: ईरान क्रांति और दूसरा तेल झटका
भारत पहले संकट से पूरी तरह उबर भी नहीं पाया था कि ईरान की इस्लामिक क्रांति और ईरान-इराक युद्ध ने दुनिया में दूसरा तेल संकट पैदा कर दिया। तेल की कीमतें फिर तेजी से बढ़ीं और भारत में महंगाई दोबारा बढ़ने लगी। साथ ही देश के कई हिस्सों में सूखा पड़ गया।
असर क्या हुआ?
- 1980 में महंगाई 11% के पार पहुंच गई
- पेट्रोल और जरूरी सामान महंगे हुए
सरकार ने तेल पर निर्भरता कम करने की कोशिश शुरू की
3. 1991: जब भारत दिवालिया होने की कगार पर पहुंच गया
- 1991 भारत की अर्थव्यवस्था के लिए सबसे खतरनाक सालों में से एक माना जाता है। खाड़ी युद्ध, राजनीतिक अस्थिरता और विदेशी मुद्रा की भारी कमी ने देश को आर्थिक संकट में धकेल दिया।
हालात कितने गंभीर थे?
- विदेशी मुद्रा भंडार सिर्फ 3 हफ्ते के आयात जितना बचा था
- महंगाई 13.6% तक पहुंच गई
- सरकार को IMF से कर्ज लेने के लिए 47 टन सोना गिरवी रखना पड़ा
इसी संकट के बाद भारत में बड़े आर्थिक सुधार यानी LPG reforms शुरू हुए।
4. 1998-2000: प्याज की कीमतों ने बदल दी राजनीति
यह वो दौर था जब महंगाई सीधे लोगों की रसोई तक पहुंच गई। प्याज की फसल खराब होने से उसकी कीमतें अचानक कई गुना बढ़ गईं।
दिल्ली समेत कई शहरों में लोग महंगे प्याज से परेशान हो गए और इसका असर चुनावों तक में दिखाई दिया।
क्या हुआ था?
- महंगाई लगभग 20% तक पहुंच गई
- प्याज और खाद्य तेल की कीमतों में भारी उछाल आया
- दिल्ली चुनाव में सरकार बदल गई
इस दौर ने दिखाया कि महंगाई सिर्फ आर्थिक नहीं, राजनीतिक मुद्दा भी बन सकती है।
5. 2009-2013: लगातार कई साल तक ऊंची महंगाई
यह वह समय था जब आम आदमी की जेब पर सबसे ज्यादा दबाव महसूस हुआ। वैश्विक मंदी, खराब मानसून और खाद्य संकट ने चीजों के दाम लगातार बढ़ाए।
लोगों पर क्या असर पड़ा?
- जनवरी 2013 में खुदरा महंगाई 10.79% पहुंच गई
- खाने-पीने की चीजें बेहद महंगी हो गईं
- पेट्रोल और गैस की कीमतों ने बजट बिगाड़ दिया
इसी दौर में भ्रष्टाचार और महंगाई के खिलाफ लोगों का गुस्सा बढ़ा और अन्ना आंदोलन जैसे बड़े आंदोलन देखने को मिले।
6. 2020-2022: कोरोना और रूस-यूक्रेन युद्ध का असर
कोरोना महामारी के दौरान लगे लॉकडाउन ने दुनिया की सप्लाई चेन को पूरी तरह हिला दिया। इसके बाद रूस-यूक्रेन युद्ध ने तेल और खाद्य तेल की कीमतों में आग लगा दी।
हालात कैसे बिगड़े?
- 2022 में थोक महंगाई 16.63% तक पहुंच गई
- खाने का तेल, पेट्रोल और गैस महंगे हुए
- RBI ने लगातार रेपो रेट बढ़ाए, जिससे EMI महंगी हो गई
आखिर महंगाई इतनी बड़ी समस्या क्यों है?
महंगाई बढ़ने का सीधा मतलब है कि लोगों की खरीदने की ताकत कम हो जाती है। जब खाने-पीने, पेट्रोल, गैस और रोजमर्रा की चीजें महंगी होती हैं, तो सबसे ज्यादा असर मध्यम वर्ग और गरीब परिवारों पर पड़ता है।
भारत का इतिहास बताता है कि महंगाई सिर्फ आर्थिक आंकड़ा नहीं, बल्कि राजनीति, समाज और आम लोगों की जिंदगी को प्रभावित करने वाला सबसे बड़ा मुद्दा बन सकती है।











