BRICS में PM मोदी का बड़ा दांव! दुनिया के सामने रखे 10 प्रस्ताव, UN में सुधार पर भी दिया जोर

नई दिल्ली में BRICS समिट 2026 की शुरुआत हो गई है। समिट में दुनिया के कई बड़े नेता शामिल हुए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने BRICS देशों के नेताओं को संबोधित करते हुए कहा कि भारत के लिए मानवता सबसे पहले है और आपसी सहयोग उसकी सबसे बड़ी प्राथमिकता है। PM मोदी ने अपने संबोधन में BRICS के अगले 20 साल के लिए नए लक्ष्य तय करने की जरूरत बताई। उन्होंने वैश्विक शासन व्यवस्था में सुधार और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार को भी जरूरी बताया।
BRICS के 20 साल पूरे, अब रिजल्ट देने का वक्त
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इस साल की BRICS समिट ऐतिहासिक है, क्योंकि संगठन अपनी 20वीं वर्षगांठ मना रहा है। उन्होंने कहा कि इंसान की जिंदगी में 20 साल की उम्र परिपक्वता और जिम्मेदारी के नए दौर की शुरुआत होती है। PM मोदी ने कहा कि BRICS भी अब परिपक्व हो चुका है। पिछले 20 साल में इस समूह ने वैश्विक मंच पर अपनी अलग पहचान बनाई है। सदस्य देश एक-दूसरे के विचारों का सम्मान करते हैं और आपसी सहमति से आगे बढ़ते हैं। उन्होंने कहा कि BRICS किसी के विरोध में नहीं है। इसका उद्देश्य सभी को साथ लेकर आगे बढ़ना है। अब जरूरत इस बात की है कि BRICS के भीतर बनी एकता और सहमति को दुनिया के सामने ठोस नतीजों में बदला जाए।
अध्यक्षता बदलने से काम की रफ्तार नहीं रुकनी चाहिए
PM मोदी ने कहा कि BRICS को अगले 20 साल के लिए एक बड़ा और महत्वाकांक्षी एजेंडा तैयार करना चाहिए। इसके लिए संगठन के अंदर काम करने के तरीके को और मजबूत करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि BRICS की अध्यक्षता हर साल बदलती है, लेकिन इससे संगठन के काम की रफ्तार प्रभावित नहीं होनी चाहिए। इसके लिए एक ऐसी व्यवस्था जरूरी है, जिससे एक अध्यक्षता के दौरान शुरू हुए काम को अगली अध्यक्षता भी आगे बढ़ा सके।
सुरक्षित डिजिटल रिपॉजिटरी बनाने का प्रस्ताव
प्रधानमंत्री ने BRICS के काम में निरंतरता बनाए रखने के लिए एक सुरक्षित डिजिटल रिपॉजिटरी बनाने का प्रस्ताव रखा। PM मोदी ने कहा कि इससे यह पता लगाने में आसानी होगी कि कौन-सा फैसला किस स्थिति में है और उस पर आगे क्या कार्रवाई होनी है।
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वैश्विक व्यवस्था में बदलाव की जरूरत
PM मोदी ने मौजूदा वैश्विक शासन व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उन्होंने इसकी तुलना एक पिरामिड से की। उनके मुताबिक, इस व्यवस्था में फैसले लेने की शक्ति कुछ देशों के पास ज्यादा केंद्रित है, जबकि कई देश उन फैसलों से प्रभावित होते हैं, लेकिन निर्णय लेने की प्रक्रिया में उनकी भूमिका सीमित रहती है। उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था को बदलकर ऐसी साझेदारी बनानी होगी, जहां हर देश की आवाज सुनी जाए और हर सदस्य को उचित भागीदारी मिले।
ग्लोबल साउथ की आवाज मजबूत करने पर जोर
PM मोदी ने कहा कि ग्लोबल साउथ के देश दुनिया के बड़े संकटों का सामना करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, लेकिन वैश्विक फैसले लेने की प्रक्रिया में उनकी भागीदारी अभी भी कम है। उन्होंने कहा कि जरूरत इस बात की है कि ग्लोबल साउथ सिर्फ बनाए गए नियमों का पालन करने वाला पक्ष न रहे, बल्कि नियम बनाने में भी उसकी बराबर भागीदारी हो। इसके लिए प्रधानमंत्री ने BRICS के माध्यम से युवा राजनयिकों और नीति बनाने वालों को प्रशिक्षण देने का सुझाव दिया।
PM मोदी ने रखे ये बड़े प्रस्ताव
प्रधानमंत्री ने वैश्विक शासन व्यवस्था में सुधार के लिए 10 प्रस्ताव तैयार करने की बात कही। उन्होंने कहा कि इन प्रस्तावों को अगली BRICS समिट तक एक सुधार रोडमैप का रूप दिया जा सकता है। उनके शुरुआती प्रस्तावों में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार, वैश्विक वित्तीय संस्थानों में उचित प्रतिनिधित्व और समुद्री नाविकों के लिए आपातकालीन सहायता नेटवर्क शामिल हैं।
1. UN सुरक्षा परिषद में सुधार- PM मोदी ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार को अब और टाला नहीं जाना चाहिए। उन्होंने सुधार की प्रक्रिया को निश्चित समय-सीमा और स्पष्ट परिणामों से जोड़ने की बात कही। उन्होंने वैश्विक वित्तीय संस्थानों में वोटिंग अधिकार, नेतृत्व के पद और नीतिगत प्राथमिकताओं को आज की आर्थिक स्थिति के अनुसार बदलने की जरूरत भी बताई।
2. नाविकों के लिए इमरजेंसी नेटवर्क- प्रधानमंत्री ने समुद्री नाविकों के लिए एक आपातकालीन सहायता नेटवर्क बनाने का प्रस्ताव रखा। यह नेटवर्क संकट के समय समुद्री अधिकारियों और राजनयिक मिशनों के बीच बेहतर संपर्क स्थापित करने में मदद करेगा। इससे जरूरत पड़ने पर मेडिकल सहायता, परिवारों को सूचना और नाविकों को सुरक्षित निकालने में मदद मिल सकेगी।
3. भविष्य के नियम बनाने में ग्लोबल साउथ की भागीदारी- PM मोदी ने AI, साइबरस्पेस, अंतरिक्ष, बायोटेक्नोलॉजी और दूसरी नई तकनीकों के क्षेत्र में ग्लोबल साउथ की भूमिका बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि BRICS के जरिए युवा राजनयिकों और नीति-निर्माताओं को बातचीत, कानून और तकनीक से जुड़ा प्रशिक्षण दिया जा सकता है। इससे वे भविष्य के वैश्विक नियम बनाने की प्रक्रिया में ज्यादा प्रभावी भूमिका निभा सकेंगे।



















