फॉरेक्स ट्रेडिंग में मुनाफे के नाम पर ठगी, आरोपी को हाईकोर्ट से झटका; जमानत याचिका खारिज

जबलपुर। जस्टिस द्वारकाधीश बंसल की सिंगल बेंच ने कहा कि जिन मामलों में आईपीसी की धारा 409 के मूल आरोप एफआईआर से ही जुड़े हों, वहां जांच के लिए 90 दिन की अवधि लागू होगी। अदालत ने विशेष न्यायालय के आदेश को वैध ठहराते हुए आरोपी की डिफॉल्ट जमानत की याचिका खारिज कर दी।
38.50 लाख की ठगी का है मामला
यह याचिका अहमदाबाद (गुजरात) के विवेकानंद नगर में रहने वाले व्यापारी उमेश कांतिलाल पटेल की ओर से दाखिल की गई थी। अनूपपुर जिले के भालूमाड़ा थाना पुलिस ने 38.50 लाख रुपए की ठगी के मामले में संतोष कुमार चौरसिया की शिकायत पर उमेश और अंकित मालीवाल के खिलाफ 4 दिसंबर 2024 को आईपीसी की धारा 420 और 34 के तहत एफआईआर दर्ज की थी।
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बाद में जोड़ी गईं धारा 409 और धारा 6
मामले में बाद में आईपीसी की धारा 409 और मप्र निक्षेपकों के हित संरक्षण अधिनियम की धारा 6 भी जोड़ी गई। पुलिस द्वारा 60 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल न करने पर आरोपी ने यह पुनरीक्षण याचिका दाखिल कर डिफॉल्ट बेल मांगी थी। आरोपी की ओर से 60 दिन की अवधि को आधार बनाकर जमानत की मांग की गई थी।
धारा 409 में आजीवन कारावास तक का प्रावधान
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से पैनल अधिवक्ता अनुपम चतुर्वेदी ने दलीलें रखीं। सुनवाई के बाद अदालत ने अपने फैसले में कहा कि आईपीसी की धारा 409 के गंभीर अपराध में आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान है। चूंकि इस धारा के तथ्य और आधार शुरुआत से ही एफआईआर में मौजूद थे, इसलिए जांच पूरी करने और चार्जशीट दाखिल करने की वैधानिक अवधि 90 दिन मानी जाएगी।
एफआईआर में शुरुआत से जुड़े थे आरोप
जस्टिस द्वारकाधीश बंसल की सिंगल बेंच ने कहा कि जिन मामलों में आईपीसी की धारा 409 के मूल आरोप एफआईआर से ही जुड़े हों, वहां जांच के लिए 90 दिन की अवधि लागू होगी, न कि 60 दिन। अदालत ने इसी मत के साथ आरोपी की ओर से दायर पुनरीक्षण याचिका खारिज कर दी।
विशेष न्यायालय के आदेश को माना वैध
अदालत ने विशेष न्यायालय के आदेश को वैध ठहराते हुए आरोपी की डिफॉल्ट जमानत की याचिका को खारिज कर दिया। कोर्ट के फैसले के बाद 60 दिनों में चार्जशीट दाखिल न होने को आधार बनाकर मांगी गई डिफॉल्ट बेल का दावा स्वीकार नहीं किया गया।
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कोर्ट ने स्पष्ट की 90 दिन की अवधि
मामले में हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि धारा 409 के आरोप एफआईआर में शुरुआत से मौजूद होने के कारण जांच पूरी करने और चार्जशीट दाखिल करने के लिए 90 दिन की वैधानिक अवधि लागू होगी। इसी आधार पर आरोपी उमेश कांतिलाल पटेल को डिफॉल्ट जमानत का लाभ नहीं मिला।




















