सोहागपुर: विल सुपर के छिड़काव से धान की फसल खराब, नुकसान के आंकड़ों में उलझा मुआवजा

सोहागपुर। सत्ता पक्ष के ज्ञापन में करीब 700 एकड़ धान की फसल नष्ट होने की बात कही गई, जबकि विपक्ष ने 1500 एकड़ फसल प्रभावित होने का दावा किया है। वहीं लगातार मौका मुआयना कर रहे जांच दल के अनुसार अब तक करीब 250 एकड़ फसल खराब होने की बात सामने आई है। विल सुपर की बिक्री पहले पांच दुकानों से होने की जानकारी सामने आई थी, जो अब घटकर दो दुकानों तक बताई जा रही है, जबकि करीब 160 लीटर दवा की बिक्री का आंकड़ा सामने आया है। किसान अब मुआवजे के साथ फसल खराब होने की वास्तविक वजह और जिम्मेदारी तय होने का इंतजार कर रहे हैं।
नुकसान के आंकड़ों को लेकर अलग-अलग दावे
मामले में सत्ता पक्ष की ओर से कलेक्टर को दिए गए ज्ञापन में करीब 700 एकड़ धान की फसल नष्ट होने की बात कही गई थी। वहीं विपक्ष की ओर से 1500 एकड़ फसल प्रभावित होने का दावा किया गया। दूसरी ओर, लगातार मौका मुआयना कर रहे जांच दल द्वारा अब तक करीब 250 एकड़ फसल खराब होने की बात सामने आने लगी है। इससे किसानों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि वास्तविक नुकसान का आंकड़ा आखिर कौन सा माना जाए।
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पांच से घटकर दो दुकानों तक पहुंची बिक्री
शुरुआत में विल सुपर खरपतवार नाशक की बिक्री पांच दुकानों से होने की जानकारी सामने आई थी, लेकिन अब यह संख्या घटकर दो दुकानों तक बताई जा रही है। हालांकि एक आंकड़ा ऐसा है जिसमें कोई कमी नहीं आई है। सामने आए विवरण के अनुसार करीब 160 लीटर विल सुपर की बिक्री हुई थी। ऐसे में दवा की बिक्री और उसके उपयोग को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
160 लीटर दवा से 1600 एकड़ में छिड़काव संभव
जानकारों के अनुसार अगर दवा का निर्धारित डोज एक एकड़ के लिए 100 एमएल माना जाए तो 160 लीटर दवा से करीब 1600 एकड़ क्षेत्र में छिड़काव किया जा सकता है। ऐसे में यदि जांच में नुकसान केवल 250 एकड़ तक सीमित बताया जा रहा है तो यह भी जांच का विषय है कि बाकी दवा कहां और कितनी मात्रा में उपयोग हुई। इस आंकड़े ने जांच के दायरे को और महत्वपूर्ण बना दिया है।
निर्धारित डोज या अधिक मात्रा, जिम्मेदारी किसकी?
किसानों का कहना है कि उन्होंने निर्धारित तरीके से दवा का उपयोग किया था, जबकि दूसरी ओर अधिक मात्रा में खरपतवार नाशक के इस्तेमाल की संभावना भी चर्चा में है। यदि अधिक डोज के कारण फसल सूखी तो यह भी स्पष्ट किया जाना जरूरी है कि इसकी जिम्मेदारी किसान की है या दवा विक्रेताओं ने उपयोग संबंधी सही जानकारी नहीं दी। दवा की गुणवत्ता, निर्धारित डोज और किसानों को दी गई सलाह की भी जांच जरूरी मानी जा रही है।
बिल और बिक्री प्रक्रिया भी जांच का हिस्सा
मामले में यह बात भी सामने आ रही है कि जिन किसानों की फसल खराब हुई, उन्हें दवा के बिल उपलब्ध कराए गए हैं। ऐसे में यह जांच का महत्वपूर्ण बिंदु है कि दवा की बिक्री और उपयोग की पूरी प्रक्रिया क्या रही और संबंधित विक्रेताओं की भूमिका क्या थी। दवा की गुणवत्ता, निर्धारित डोज, किसानों को दी गई सलाह और बिक्री प्रक्रिया-इन सभी बिंदुओं की निष्पक्ष जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
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कंपनी मुआवजे को तैयार
कृषि विभाग के एक अधिकारी के अनुसार कंपनी से बातचीत चल रही है और कंपनी किसानों को मुआवजा देने के लिए तैयार है। हालांकि एक एकड़ पर कितना मुआवजा दिया जाएगा, इस पर अभी सहमति नहीं बन पाई है। कृषि विस्तार अधिकारी सुनील कुमार बर्डे ने बताया कि जांच दल लगातार जांच कर रहा है और निर्धारित समयावधि में जांच पूरी कर ली जाएगी। कार्रवाई के संबंध में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश मिलने के बाद ही इस संबंध में कुछ बताया जा सकेगा। फिलहाल किसान मुआवजे और फसल खराब होने के वास्तविक कारण के स्पष्ट होने का इंतजार कर रहे हैं। जांच के आंकड़े लगातार बदलने और कार्रवाई को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं होने से किसानों के बीच यह सवाल बना हुआ है कि फसल सूखने की जिम्मेदारी आखिर तय कब होगी और किस पर होगी?




















