BMW बाइक वाला युवक क्यों चला रहा था Uber? फाउंडर ने पूछा सवाल, जवाब सुनकर बदल गया नजरिया

आमतौर पर जब कोई महंगी BMW बाइक पर Uber की राइड लेने या देने पहुंचे तो पहली नजर में यही सवाल उठ सकता है कि आखिर इसकी जरूरत क्या है? मुंबई के बिजनेस फाउंडर आशीष जैन के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। उन्होंने ऑफिस से गेस्ट हाउस जाने के लिए Uber बाइक बुक की थी। काफी इंतजार के बाद जब राइड मिली और ड्राइवर उन्हें लेने पहुंचा, तो सामने BMW बाइक देखकर वह हैरान रह गए। आशीष जैन के मन में सवाल आया कि जब इस युवक के पास इतनी महंगी बाइक है तो वह Uber क्यों चला रहा है? उन्होंने बिना झिझक युवक से यही सवाल पूछ लिया। लेकिन ड्राइवर का जवाब उनकी उम्मीद से बिल्कुल अलग था। युवक ने बताया कि वह Uber पैसे कमाने के लिए नहीं चला रहा था। वह नए लोगों से मिलने, उनसे बातचीत करने और उनकी जिंदगी की कहानियां समझने के लिए यह काम कर रहा था। आशीष जैन ने इस पूरे अनुभव को बाद में LinkedIn पर शेयर किया। उनके मुताबिक, कुछ मिनट की यह बातचीत उन्हें सोचने पर मजबूर कर गई।
करीब 8:25 बजे मिली Uber राइड
आशीष जैन ने बताया कि उन्हें शाम के वक्त ऑफिस से गेस्ट हाउस जाना था। इसके लिए उन्होंने Uber बाइक बुक की, लेकिन काफी देर तक कोई राइड स्वीकार नहीं हुई। आखिरकार करीब 8 बजकर 25 मिनट पर उनकी राइड कन्फर्म हुई। कुछ देर बाद ड्राइवर उन्हें लेने पहुंचा। लेकिन जैसे ही आशीष की नजर बाइक पर पड़ी, वह चौंक गए। ड्राइवर कोई सामान्य मोटरसाइकिल लेकर नहीं आया था, बल्कि उसके पास BMW बाइक थी। महंगी बाइक और Uber ड्राइविंग का यह कॉम्बिनेशन आशीष को थोड़ा अजीब लगा। उन्होंने ड्राइवर से पूछ लिया कि भाई, आप Uber क्यों चला रहे हो?
युवक ने कहा- यह मेरी पहली Uber राइड है
आशीष के सवाल का जवाब सुनकर कहानी ने अलग ही मोड़ ले लिया। युवक ने बताया कि यह उसकी पहली Uber राइड थी। वह नियमित रूप से Uber चलाकर कमाई करने नहीं निकला था। उसका मकसद कुछ और था। युवक ने बताया कि वह नए लोगों से मिलना चाहता है। वह अलग-अलग लोगों से बातचीत करना और उनकी जिंदगी, सोच और अनुभवों को समझना चाहता है। उसके लिए Uber चलाना सिर्फ कमाई का साधन नहीं था, बल्कि लोगों से जुड़ने और उनसे सीखने का एक तरीका था। यानी जिस बात को देखकर आशीष को सबसे पहले यह लगा कि BMW रखने वाला युवक Uber क्यों चला रहा है, उसके पीछे पैसे से बिल्कुल अलग वजह थी।
इंजीनियरिंग की पढ़ाई, कई बिजनेस में आजमा चुका है हाथ
बातचीत आगे बढ़ी तो आशीष को युवक के बारे में और भी जानकारी मिली। युवक ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। पढ़ाई पूरी करने के बाद उसने अलग-अलग बिजनेस में भी हाथ आजमाया। उसने कुछ कामों में सफलता हासिल की, जबकि कुछ प्रयास उम्मीद के मुताबिक नहीं चले। लेकिन असफलताओं ने उसे रोकने के बजाय कुछ नया सीखने का मौका दिया। युवक ने बताया कि वह हर बिजनेस और हर अनुभव से कुछ न कुछ सीखने की कोशिश करता रहा। अब वह आगे मास्टर्स की पढ़ाई करने की तैयारी कर रहा है और साथ ही नए अवसरों की तलाश में भी है।
BMW बाइक बिजनेस की कमाई से खरीदी
इसके बाद स्वाभाविक रूप से बातचीत BMW बाइक तक पहुंची। आशीष ने जानना चाहा कि इतनी महंगी बाइक उसने कैसे खरीदी। युवक ने बताया कि उसने BMW बाइक अपने बिजनेस से कमाए पैसों से खरीदी थी। इसमें उसके माता-पिता ने भी कुछ आर्थिक मदद की थी। खास बात यह थी कि युवक अपनी महंगी बाइक को लेकर किसी तरह का दिखावा नहीं कर रहा था। उसके लिए यह बाइक सिर्फ स्टेटस सिंबल नहीं थी। वह इसे अपने बिजनेस और अब तक के सफर का हिस्सा मानता था।
'लोगों से मिलकर भी बहुत कुछ सीखा जा सकता है'
युवक ने बातचीत में बताया कि उसे नए लोगों से मिलना और उनके साथ काम करना पसंद है। उसे इवेंट मैनेजमेंट में भी दिलचस्पी है। उसकी सोच थी कि सीखने का मतलब सिर्फ किताबें पढ़ना या डिग्री हासिल करना नहीं है। अलग-अलग लोगों से मिलना, उनकी कहानियां सुनना और उनके अनुभवों को समझना भी सीखने का एक बड़ा जरिया हो सकता है। हर व्यक्ति की जिंदगी अलग होती है और हर बातचीत से कुछ नया समझने का मौका मिल सकता है। शायद यही वजह थी कि उसने Uber की इस पहली राइड को भी एक अलग अनुभव के तौर पर देखा।
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छोटी सी Uber राइड ने फाउंडर को सोचने पर मजबूर किया
आशीष जैन के लिए यह सिर्फ ऑफिस से गेस्ट हाउस तक की एक सामान्य Uber राइड नहीं रही। BMW बाइक देखकर उनके मन में जो पहला सवाल आया था, उसका जवाब मिलने के बाद पूरी कहानी ही बदल गई। पहली नजर में महंगी बाइक और Uber चलाने का फैसला विरोधाभासी लग सकता है। लेकिन युवक के लिए दोनों चीजों के पीछे एक ही मकसद था-अपने अनुभवों को बढ़ाना और जिंदगी में कुछ नया सीखते रहना। आशीष ने इस अनुभव को LinkedIn पर शेयर करते हुए बताया कि इस छोटी सी बातचीत ने उन्हें काफी प्रभावित किया। उनका अनुभव यही दिखाता है कि किसी व्यक्ति को देखकर उसके बारे में तुरंत कोई धारणा बना लेना हमेशा सही नहीं होता। कभी-कभी एक छोटी सी बातचीत भी हमारी सोच बदलने के लिए काफी होती है।












