पलक्धाकड़ (केरल)। धान की भूसी को अक्सर वेस्ट समझकर फेंक दिया जाता है, लेकिन अब यही राख सड़कों को ज्यादा मजबूत बना सकती है।एक नई रिसर्च में सामने आया है कि धान की भूसी की राख (Rice Husk Ash - RHA) मिलाने से डामर (Asphalt) की मजबूती और गर्मी सहने की क्षमता काफी बढ़ जाती है।
कैसे हुई रिसर्च?
शोधकर्ताओं ने डामर में वजन के हिसाब से 5%, 10%, 15% और 20% राख मिलाकर अलग-अलग तापमान पर उसके व्यवहार का टेस्ट किया।यह रिसर्च प्रतिष्ठित जर्नल 'Cleaner Engineering and Technology' में प्रकाशित हुई है, जिसका टाइटल 'Holistic characterisation of rice husk ash-modified asphalt' है।
यूरोप की सबसे बड़ी चिप बनाने वाली कंपनी को अपने ही कॉन्टिनेंट में नहीं मिल रहे ग्राहक, भारत-चीन अपने यहां बुला रहे
राख मिलाने से डामर में तीन बड़े बदलाव हुए
1. सख्ती बढ़ी: डामर का पेनिट्रेशन कम हो गया, यानी वह कम धंसने लगा।
2. गर्मी सहने की क्षमता बढ़ी: उसका सॉफ्टनिंग पॉइंट और विस्कोसिटी (गाढ़ापन) बढ़ गया।
3. परमानेंट डैमेज से बचाव: ज्यादा तापमान पर सड़क के खराब होने का खतरा कम हो गया।
डामर में राख की मात्रा का अलग-अलग असर
रिसर्च में यह भी देखा गया कि राख की मात्रा से डामर में उसका घुलना-मिलना कैसे बदलता है। 5% राख पर-राख के कण डामर में अच्छी तरह फैल गए और पूरी तरह चिपक गए। यह सबसे बेहतरीन मिश्रण माना गया।10% राख पर- डामर ने कणों को अच्छे से कवर किया, लेकिन कहीं-कहीं छोटे-छोटे गुच्छे बनने लगे।20% राख पर- कणों ने बड़े गुच्छे बना लिए, जिससे मिश्रण असमान हो गया। ज्यादा मात्रा में कण स्टोरेज के दौरान नीचे बैठने लगे।स्टडी में यह भी पाया गया कि राख की मात्रा बढ़ने से डामर का बहाव कम हुआ और उसे मिक्स करना, यानी वर्केबिलिटी, मुश्किल हो गई।
ठंड में क्या होगा असर?
हस्क ऐश का फायदा सिर्फ ज्यादा तापमान पर ही मिलता है, कम तापमान पर इसका असर उल्टा हो सकता है। शोध में पाया गया कि 5% राख मिलाने पर क्रिटिकल तापमान 16°C से बढ़कर 22°C हो गया। 20% राख पर यह बढ़कर 28°C तक पहुंच गया, जिसका मतलब है कि ठंड में सड़क का लचीलापन कम हो सकता है। रियोलॉजिकल एनालिसिस में यह भी सामने आया कि राख की मात्रा बढ़ने से थकान सहने की क्षमता (Fatigue Life) कम हो गई। 5% राख पर दरारों के प्रतिरोध (Cracking Resistance) पर कोई खास असर नहीं पड़ा, लेकिन ज्यादा मात्रा मिलाने पर डामर ज्यादा भंगुर (Brittle) हो गया। इससे ठंड में सड़क में दरारें आने का खतरा बढ़ जाता है और कम तापमान पर उसका प्रदर्शन कमजोर हो जाता है।