PU Special :मध्यप्रदेश में आदिवासी वोटर्स को साधने में जुटी भाजपा, 47 आरक्षित सीटों पर नजर; बिरसा मुंडा जयंती से शुरू होगा जनजातीय गौरव सप्ताह

राजीव सोनी, भोपाल। मध्यप्रदेश में आदिवासी वोटर्स को सत्ता की चाबी माना जाता है। यही वजह है कि 2028 के विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा ने आदिवासी बहुल इलाकों में अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। भगवान बिरसा मुंडा की जयंती के अवसर पर पार्टी ने आदिवासी अंचलों में एक सप्ताह तक कार्यक्रमों की श्रृंखला तैयार की है। इसके जरिए जनजातीय समाज के बीच संपर्क बढ़ाने, सरकार की योजनाओं के लाभार्थियों तक पहुंचने और स्थानीय स्तर पर संगठन को मजबूत करने की रणनीति बनाई गई है। प्रदेश की करीब 22 से 23 प्रतिशत आबादी आदिवासी वर्ग से आती है। विधानसभा की 47 सीटें अनुसूचित जनजाति (अजजा) के लिए आरक्षित हैं। इनके अलावा करीब तीन दर्जन सीटें ऐसी हैं, जहां आदिवासी मतदाता जीत-हार का फैसला करने में निर्णायक भूमिका निभाते हैं। ऐसे में भाजपा के लिए आदिवासी वोटर्स का समर्थन आगामी चुनाव में काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
2023 के चुनाव में भाजपा को मिली थीं 24 आदिवासी सीटें
मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव 2023 में भाजपा ने अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित 47 सीटों में से 24 पर जीत दर्ज की थी। वहीं कांग्रेस के खाते में 22 सीटें गई थीं जबकि एक सीट भारत आदिवासी पार्टी ने जीती थी। बाद में अमरवाड़ा उपचुनाव में भाजपा को एक सीट और मिल गई। कई आदिवासी बहुल सीटों पर मुकाबला बेहद करीबी रहा था। यही वजह है कि भाजपा अभी से इन क्षेत्रों में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है। पार्टी ने मिशन 28 को ध्यान में रखते हुए करीब दो साल पहले से ही आदिवासी क्षेत्रों में अपने जनजातीय नेताओं को सक्रिय करना शुरू कर दिया है।
2018 के चुनावी नतीजों से भाजपा ने लिया सबक
आदिवासी वोटर्स को लेकर भाजपा की सक्रियता के पीछे 2018 के विधानसभा चुनाव के नतीजे भी बड़ी वजह माने जा रहे हैं। उस चुनाव में 47 आरक्षित सीटों में से भाजपा केवल 16 सीटें जीत पाई थी, जबकि कांग्रेस ने 31 सीटों पर कब्जा जमाया था। इसी प्रदर्शन के दम पर कांग्रेस ने 15 साल बाद प्रदेश की सत्ता में वापसी की थी। वहीं 2013 के विधानसभा चुनाव में तस्वीर इसके उलट थी। उस समय भाजपा ने 47 में से 31 आदिवासी आरक्षित सीटों पर जीत दर्ज की थी जबकि कांग्रेस को केवल 15 सीटें मिली थीं। इन चुनावी आंकड़ों से साफ है कि आदिवासी सीटों पर प्रदर्शन मध्यप्रदेश की सत्ता का समीकरण बदलने में अहम भूमिका निभाता रहा है।
गजेंद्र पटेल को देशभर में आदिवासी वर्ग तक पहुंचने की जिम्मेदारी
भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री और खरगोन सांसद गजेंद्र पटेल को पार्टी ने देशभर में जनजातीय समाज के बीच सक्रियता बढ़ाने का लक्ष्य सौंपा है। उन्होंने 'पीपुल्स समाचार' से चर्चा में बताया कि वे जल्द ही अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए तैयार किए गए कार्यक्रमों के सिलसिले में सभी राज्यों का दौरा करेंगे। पटेल के मुताबिक मध्यप्रदेश में 15 नवंबर से भगवान बिरसा मुंडा की जयंती के अवसर पर 'जनजातीय गौरव सप्ताह' के तहत विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसके लिए जनजातीय बहुल गांवों में चौपाल लगाने, छात्रावासों में संपर्क करने और प्रतिभाशाली विद्यार्थियों का सम्मान करने की योजना बनाई गई है। इसके अलावा सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों और विशेष रूप से महिलाओं के साथ संवाद किया जाएगा। इन कार्यक्रमों के जरिए जनजातीय समाज के बीच पार्टी और सरकार की पहुंच बढ़ाने पर जोर रहेगा।
भाजपा का दावा- आदिवासी समाज में पार्टी का मजबूत जनाधार
भाजपा के प्रदेश मंत्री राजेंद्र सिंह राजपूत का मानना है कि जनजातीय समाज में पार्टी का मजबूत जनाधार है। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार की ओर से आदिवासी समाज के लिए कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं। पार्टी की तैयारी मजबूत है और कांग्रेस सहित कोई अन्य क्षेत्रीय दल उसके जनाधार में सेंध नहीं लगा सकता।
2028 में 47 आदिवासी सीटों पर रहेगा सभी दलों का फोकस
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि 2028 के विधानसभा चुनाव में भी अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित 47 सीटों का गणित सत्ता की दिशा तय करने में अहम होगा। इन सीटों के अलावा आदिवासी मतदाताओं का प्रभाव रखने वाली अन्य विधानसभा सीटें भी महत्वपूर्ण रहेंगी।




















