सीहोर में सीवन नदी से अब भी उठ रहीं कांवड़ें, कुबेरेश्वर धाम में भक्ति का महासागर; रक्षा बंधन पर होगा मंगल तिलक

सीहोर। सीवन नदी के तट से उठी कांवड़ों की कतार भले ही ऐतिहासिक यात्रा का रूप लेकर कुबेरेश्वर धाम पहुंच चुकी हो, लेकिन भगवान शिव के प्रति श्रद्धा की यह धारा अब भी थमने का नाम नहीं ले रही है। जिला मुख्यालय के समीप स्थित कुबेरेश्वर धाम में बुधवार को भी हजारों श्रद्धालु कांवड़ लेकर पहुंचे। बारिश के बीच हर-हर महादेव और बोल बम के जयघोष से पूरा क्षेत्र शिवमय नजर आया। श्रद्धालुओं ने भगवान कुबेरेश्वर महादेव का जलाभिषेक कर परिवार की सुख-समृद्धि और सर्वकल्याण की कामना की।
28 अगस्त को कांवड़ मेले का होगा विराम
विठलेश सेवा समिति के तत्वावधान में करीब एक माह से चल रहा कांवड़ मेला अब 28 अगस्त को रक्षा बंधन और पूर्णिमा के पावन अवसर पर विराम लेगा। अंतर्राष्ट्रीय कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा के मार्गदर्शन में सुबह 11 बजे सादगीपूर्ण वातावरण में बाबा का मंगल तिलक महोत्सव आयोजित किया जाएगा। इसके बाद कांवड़ मेले के क्रम का औपचारिक समापन होगा। समिति के मीडिया प्रभारी मनोज दीक्षित मामा ने बताया कि 28 अगस्त की शाम बाबा की आरती के बाद मेले का विराम किया जाएगा।

25 क्विंटल खिचड़ी और 10 क्विंटल नुक्ती का भोग
कांवड़ यात्रा संपन्न होने के बावजूद कुबेरेश्वर धाम में श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या मौजूद है। इसे देखते हुए विठलेश सेवा समिति की ओर से भोजन-प्रसादी और सेवा का क्रम लगातार जारी है। बुधवार को श्रद्धालुओं के लिए 25 क्विंटल खिचड़ी और 10 क्विंटल नुक्ती सहित नमकीन और अन्य प्रसादी तैयार कर भोग लगाया गया। इसके बाद पंडित विनय मिश्रा, पंडित समीर शुक्ला सहित बड़ी संख्या में सेवादारों ने श्रद्धालुओं को भोजन-प्रसादी वितरित की।
कांवड़ और शिव महापुराण का संदेश-सर्वजन कल्याण
अंतर्राष्ट्रीय कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने कहा कि कुबेरेश्वरधाम पर विश्वास और शुद्ध भाव लेकर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए बाबा की भक्ति जीवन में सकारात्मक ऊर्जा लेकर आती है। कांवड़ यात्रा और शिव महापुराण का मूल उद्देश्य सर्वजन कल्याण है। शिव कथा मनुष्य को सत्य, सदाचार और सेवा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है। उन्होंने कहा कि कथा का मूल संदेश ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ है। भगवान शिव का स्मरण और आराधना मनुष्य के जीवन में कल्याणकारी भाव पैदा करती है। उन्होंने श्रद्धालुओं से आडंबर से दूर रहकर सच्चे मन और श्रद्धा के साथ भगवान शिव की आराधना करने का संदेश दिया।
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घर वापसी में भी श्रद्धालुओं का सहारा बनी समिति
ऐतिहासिक कांवड़ यात्रा के बाद भी कई श्रद्धालु कुबेरेश्वरधाम में रुके हुए हैं। कुछ श्रद्धालुओं की ट्रेन आदि की टिकट कन्फर्म नहीं हो सकी, तो कुछ की वापसी आगामी दिनों में निर्धारित है। ऐसे में समिति की सेवा भावना घर लौटने तक श्रद्धालुओं का सहारा बनी हुई है। बुधवार को कुछ श्रद्धालु ऐसे भी सामने आए, जिनके पर्स और बैग गुम हो जाने से उन्हें आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था। समिति ने ऐसे जरूरतमंद श्रद्धालुओं की मदद की और उनकी घर वापसी की व्यवस्था में सहयोग किया। श्रद्धालुओं ने इस सेवा कार्य की सराहना करते हुए कहा कि धाम में उन्हें केवल पूजा-अर्चना ही नहीं, बल्कि अपनों जैसा सहारा भी मिल रहा है।

महिलाओं को मायके जैसा मिलता है अपनापन
कुबेरेश्वरधाम पहुंचने वाले श्रद्धालुओं में महिलाओं की बड़ी संख्या भी लगातार बनी हुई है। पंडित प्रदीप मिश्रा के संदेशों से प्रेरित होकर सावन के दौरान देश के विभिन्न हिस्सों से महिलाएं परिवार के साथ धाम पहुंच रही हैं। श्रद्धालु महिलाओं का कहना है कि बाबा के धाम पर उन्हें अपने मायके जैसा अपनापन और भाव मिलता है। कांवड़ यात्रा का मुख्य दौर पूरा होने के बाद भी महिलाएं परिवार के साथ धाम पहुंचकर भगवान शिव की पूजा-अर्चना कर रही हैं। धाम का वातावरण उन्हें धार्मिक आस्था के साथ आत्मीयता और अपनत्व का अनुभव भी करा रहा है।
बारिश बनी आस्था की परीक्षा, फिर भी नहीं रुका कांवड़ का क्रम
मनोज दीक्षित मामा ने बताया कि सावन मास के दौरान बारिश के बीच भी कांवड़ यात्रा का क्रम लगातार जारी रहा। श्रद्धालु सीवन नदी से जल भरकर पैदल कुबेरेश्वरधाम पहुंचे और भगवान कुबेरेश्वर महादेव का अभिषेक किया। बारिश, लंबी दूरी और रास्ते की कठिनाइयां भी श्रद्धालुओं के उत्साह को कम नहीं कर सकीं। बिहार से पहुंचीं श्रद्धालु राधे बाई ने बताया कि भगवान शिव की पूजा-अर्चना और शिव महापुराण की कथा से उनके परिवार में सकारात्मक बदलाव आया है। उन्होंने बताया कि परिवार के सदस्यों ने नशे से दूरी बनाई, जिससे घर में शांति और सद्भाव का वातावरण बना है।
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सेवा में जुटे लोगों का पंडित मिश्रा ने जताया आभार
कांवड़ यात्रा के दौरान व्यवस्थाओं को संभालने में सहयोग देने वाले मीडिया बंधुओं, जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन, जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों, क्षेत्रवासियों और हजारों सेवादारों के प्रति पंडित प्रदीप मिश्रा ने आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की यात्रा को व्यवस्थित ढंग से पूरा कराने में सभी वर्गों का सहयोग महत्वपूर्ण रहा।




















