कांदा एक्सप्रेस क्यों चलाई गई? नासिक से देश के बड़े शहरों तक पहुंचेगा सस्ता प्याज, 35 रुपए किलो मिलेगा

24 अगस्त को देश में प्याज का औसत खुदरा मूल्य साल-दर-साल 59 फीसदी बढ़कर 43.53 रुपए प्रति किलो हो गया। औसत थोक कीमत भी 68 फीसदी बढ़कर 35.58 रुपए प्रति किलो पहुंच गई है। चेन्नई में प्याज 60 रुपए, दिल्ली में 55 रुपए और कोलकाता में 53 रुपए प्रति किलो तक बिक रहा था। सरकार ने 800 मीट्रिक टन प्याज लेकर विशेष ट्रेनें पांच प्रमुख शहरों तक भेजने की योजना बनाई है।
प्याज की बढ़ती कीमतों के बीच शुरू हुई कांदा एक्सप्रेस
प्याज की बढ़ती कीमतों को देखते हुए केंद्र सरकार ने नासिक के लासलगांव से देश के प्रमुख स्थानों के लिए विशेष ट्रेन चलाने का फैसला किया है। इस ट्रेन को कांदा एक्सप्रेस नाम दिया गया है, क्योंकि प्याज को कांदा भी कहा जाता है। भारत सरकार के उपभोक्ता मामलों के विभाग के मुताबिक, कांदा एक्सप्रेस के जरिए प्रमुख बाजारों तक प्याज की आपूर्ति बढ़ाई जा रही है। इसका उद्देश्य उपलब्धता मजबूत करना, कीमतों में स्थिरता लाना और उपभोक्ताओं को राहत देना है। विशेष ट्रेन के जरिए प्याज को 35 रुपए प्रति किलो की दर पर बेचने की योजना है। नासिक के लासलगांव से प्याज की रेक की लोडिंग शुरू हो चुकी है, जिसे दिल्ली के आदर्श नगर तक भेजा जा रहा है।
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पांच शहरों तक पहुंचेगा 800 मीट्रिक टन प्याज
कांदा एक्सप्रेस के जरिए करीब 800 मीट्रिक टन प्याज देश के पांच प्रमुख शहरों तक पहुंचाया जाएगा। शुरुआत में यह ट्रेन चेन्नई, एर्नाकुलम, मदुरै, गुवाहाटी और दिल्ली जैसे बड़े बाजारों तक प्याज पहुंचाएगी। बताया जा रहा है कि, लासलगांव से प्याज की रेक की लोडिंग शुरू हो गई है। हालिया कांदा एक्सप्रेस की प्रत्येक ट्रेन में करीब 40 ट्रकों के बराबर प्याज ले जाया जा रहा है। सरकार का मानना है कि बड़े पैमाने पर रेलवे के जरिए प्याज की ढुलाई से लॉजिस्टिक क्षमता बढ़ेगी और प्रमुख शहरों में सप्लाई को मजबूत किया जा सकेगा।
2024-25 में शुरू हुई थी पहल
रिपोर्ट्स के मुताबिक, कांदा एक्सप्रेस पहल साल 2024-25 में शुरू की गई थी। उस दौरान करीब 12 हजार टन प्याज का बफर स्टॉक लेकर 14 रेलवे रेक पांच शहरों में भेजे गए थे। 2025-26 में इस पहल का विस्तार किया गया और 86 रेलवे रेक के जरिए देश के 16 बड़े शहरों में करीब 88 हजार टन प्याज पहुंचाया जा रहा है। इससे रेलवे के जरिए बड़े पैमाने पर प्याज पहुंचाने की क्षमता बढ़ी है। सरकार अब बढ़ती कीमतों के बीच इसी व्यवस्था का इस्तेमाल उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए कर रही है। अगस्त-सितंबर में त्योहारों, मौसम और सप्लाई चेन से जुड़े कारणों के चलते प्याज की कीमतों में सामान्य तौर पर तेजी देखी जाती है।
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साल 2026 के लिए 1.21 लाख टन प्याज का बफर स्टॉक
कांदा एक्सप्रेस के जरिए भेजा जा रहा प्याज केंद्र के स्ट्रेटेजिक बफर स्टॉक का हिस्सा है। यह स्टॉक प्राइस स्टेबिलाइजेशन फंड स्कीम के तहत अलग-अलग उत्पादक राज्यों में रखा जाता है, ताकि सप्लाई कम होने पर बाजार में प्याज उतारकर कीमतों को नियंत्रित किया जा सके। साल 2026 के लिए सरकार ने करीब 1.21 लाख टन प्याज का बफर स्टॉक रखा है। सरकार के मुताबिक आने वाले महीनों में घरेलू मांग पूरी करने के लिए प्याज की उपलब्धता ठीक-ठाक बनी हुई है। 2025-26 में प्याज का अनुमानित उत्पादन 307.37 लाख टन रहने की उम्मीद है, जो पिछले साल के 307.67 लाख टन के लगभग बराबर है। हालांकि, इस पहल को लेकर नासिक के किसानों की चिंता भी सामने आई है। किसानों को डर है कि बाहर से प्याज आने से स्थानीय बाजार की कीमतों पर दबाव पड़ सकता है।


















