CG NEWS: बिलासपुर फर्जी डॉक्टर केस: 27 मरीजों की मौत का आरोप, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष की मौत के बाद CBI जांच की मांग तेज

रायपुर/ बिलासपुर न्यूज। बिलासपुर का फर्जी डॉक्टर मामला अब केवल धोखाधड़ी तक सीमित नहीं रहा। 27 मरीजों की मौत के आरोप, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद शुक्ल की मौत और पुलिस की चार्जशीट के बाद इस पूरे प्रकरण की CBI जांच की मांग तेज हो गई है। सवाल यह भी उठ रहे हैं कि आखिर फर्जी दस्तावेजों के सहारे एक व्यक्ति वर्षों तक बड़े अस्पताल में इलाज कैसे करता रहा।
चार्जशीट के बाद मामला फिर सुर्खियों में
बिलासपुर के चर्चित फर्जी डॉक्टर नरेंद्र विक्रमादित्य यादव उर्फ नरेंद्र जॉन कैम मामले में पुलिस ने जांच पूरी कर चार्जशीट अदालत में पेश कर दी है। आरोपी पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर खुद को विशेषज्ञ हृदय रोग चिकित्सक बताकर मरीजों का इलाज करने का आरोप है।
27 मरीजों की मौत का आरोप
जांच के दौरान पुलिस के सामने यह तथ्य आया कि आरोपी के कार्यकाल के दौरान 27 मरीजों की मौत हुई थी। आरोप है कि उसने एंजियोग्राफी और एंजियोप्लास्टी जैसी गंभीर प्रक्रियाएं भी कीं। हालांकि इन मौतों का प्रत्यक्ष कारण न्यायिक प्रक्रिया और विशेषज्ञ साक्ष्यों के आधार पर तय होना बाकी है।
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पूर्व विधानसभा अध्यक्ष का नाम भी सामने आया
मामले में छत्तीसगढ़ विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष स्वर्गीय राजेंद्र प्रसाद शुक्ल का नाम भी सामने आया है। परिजनों के अनुसार वर्ष 2006 में अपोलो अस्पताल में उनकी एंजियोग्राफी और एंजियोप्लास्टी आरोपी डॉक्टर ने की थी। ऑपरेशन के बाद उनकी तबीयत बिगड़ी और करीब 18 दिन वेंटिलेटर पर रहने के बाद उनका निधन हो गया।
फर्जी पहचान से बना डॉक्टर
पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी ने फर्जी आधार कार्ड, पैन कार्ड और अन्य दस्तावेज तैयार कर अलग-अलग पहचान बनाई थी। उसने खुद को MBBS, MRCP और इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट बताकर अस्पताल में नौकरी हासिल की।
कई संस्थानों से जुटाए गए दस्तावेज
जांच एजेंसियों ने छत्तीसगढ़ मेडिकल काउंसिल, उत्तर बंगाल मेडिकल कॉलेज, दमोह पुलिस, CMHO कार्यालय और अपोलो अस्पताल सहित कई संस्थानों से दस्तावेज जुटाकर आरोपी के खिलाफ साक्ष्य एकत्र किए।
अस्पताल प्रबंधन को मिली क्लीनचिट
पुलिस जांच में अपोलो अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ पर्याप्त आपराधिक साक्ष्य नहीं मिलने की बात कही गई है। इसी आधार पर प्रबंधन को क्लीनचिट दी गई है। हालांकि इस फैसले को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
CBI जांच की मांग तेज
पूर्व विधानसभा अध्यक्ष के परिजनों सहित कई लोगों ने पूरे मामले की CBI से जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि इतने बड़े मामले में केवल एक आरोपी की भूमिका तक जांच सीमित नहीं रहनी चाहिए और पूरे सिस्टम की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।












