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MP High Court:अब पूरी जानकारी के बिना स्वीकार नहीं होगी कोर्ट स्लिप, वकीलों के लिए नई गाइडलाइन जारी करने के निर्देश

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कोर्ट स्लिप में गड़बड़ी सामने आने के बाद नई गाइडलाइन जारी करने के निर्देश दिए हैं। अब कोर्ट स्लिप पर अधिवक्ता का पूरा नाम, बार काउंसिल एनरोलमेंट नंबर और मोबाइल नंबर दर्ज करना अनिवार्य होगा। इससे न्यायिक प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जाएगी।
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अब पूरी जानकारी के बिना स्वीकार नहीं होगी कोर्ट स्लिप, वकीलों के लिए नई गाइडलाइन जारी करने के निर्देश
हाईकोर्ट ने कहा पूरी जानकारी के बिना स्वीकार नहीं होगी कोर्ट स्लिप

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने अदालत में दाखिल की जाने वाली कोर्ट स्लिप (मामले की शीघ्र सुनवाई या लिस्टिंग के लिए दी जाने वाली पर्ची) में अनियमितता पाए जाने के बाद सख्त रुख अपनाया है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि अब अधूरी जानकारी वाली कोर्ट स्लिप स्वीकार नहीं की जाएगी। इसके लिए रजिस्ट्री कार्यालय को नई गाइडलाइन जारी करने के निर्देश दिए गए हैं। जस्टिस विशाल धगट की एकलपीठ ने आदेश दिया कि भविष्य में कोर्ट स्लिप दाखिल करते समय प्रत्येक अधिवक्ता को अपना पूरा नाम, बार काउंसिल का एनरोलमेंट नंबर और मोबाइल नंबर अनिवार्य रूप से दर्ज करना होगा। इससे कोर्ट स्लिप की पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जा सकेगी।

सुनवाई के दौरान सामने आई गड़बड़ी

मामला जबलपुर जिला सहकारी बैंक के सोसाइटी मैनेजर भैयाजी ठाकुर और 22 अन्य कर्मचारियों से जुड़ा है। इन सभी ने वर्ष 2024 में अपनी नियुक्तियां निरस्त किए जाने के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। इस मामले में हाईकोर्ट ने 28 मई 2024 को जबलपुर कलेक्टर के नियुक्ति निरस्तीकरण आदेश के क्रियान्वयन पर अंतरिम रोक लगा दी थी। इसी प्रकरण की शीघ्र सुनवाई के लिए अदालत में एक कोर्ट स्लिप प्रस्तुत की गई थी।

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बिना नाम और एनरोलमेंट नंबर की मिली कोर्ट स्लिप

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता अनिल लाला ने अदालत को बताया कि कुछ पक्षकारों की ओर से वकालतनामा दाखिल करने के साथ कोर्ट स्लिप भी पेश की गई थी। जब अदालत ने कोर्ट स्लिप का परीक्षण किया तो पाया कि उस पर केवल हस्ताक्षर थे जबकि किसी भी अधिवक्ता का नाम, बार काउंसिल एनरोलमेंट नंबर या अन्य आवश्यक जानकारी दर्ज नहीं थी। इस पर अदालत ने गंभीर आपत्ति जताते हुए कहा कि ऐसी प्रक्रिया न्यायिक व्यवस्था की पारदर्शिता के अनुरूप नहीं है।

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रजिस्ट्री को नई गाइडलाइन जारी करने के निर्देश

मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने रजिस्ट्री कार्यालय को निर्देश दिया कि सभी अधिवक्ताओं के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं। नई व्यवस्था के तहत अब कोर्ट स्लिप पर अधिवक्ता का पूरा नाम, बार काउंसिल एनरोलमेंट नंबर और मोबाइल नंबर दर्ज करना अनिवार्य होगा। हाईकोर्ट का मानना है कि इस व्यवस्था से कोर्ट स्लिप की प्रामाणिकता सुनिश्चित होगी, जवाबदेही बढ़ेगी और भविष्य में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या भ्रम की स्थिति से बचा जा सकेगा।

Sumit  Shrivastava
By Sumit Shrivastava

सुमित श्रीवास्तव एक अनुभवी मीडिया प्रोफेशनल, बिजनेस पत्रकार और शोधकर्ता हैं। मास कम्युनिकेशन में M.P...Read More

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