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Bhopal:ईंधन महंगाई पर ट्रांसपोर्ट सेक्टर की CM मोहन यादव से बड़ी मांग, पेट्रोल-डीजल टैक्स घटाने की अपील तेज

मध्यप्रदेश में बढ़ते पेट्रोल और डीजल के दामों ने ट्रांसपोर्ट कारोबारियों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर वैट और सेस घटाने की मांग की है। संगठन का कहना है कि महंगे ईंधन और कम काम के कारण 25 से 30 प्रतिशत वाहन खड़े हो चुके हैं और कारोबार पर गंभीर संकट है।
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ईंधन महंगाई पर ट्रांसपोर्ट सेक्टर की CM मोहन यादव से बड़ी मांग, पेट्रोल-डीजल टैक्स घटाने की अपील तेज
फाइल फोटो

भोपाल। राज्य में पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों को लेकर ट्रांसपोर्ट सेक्टर में गहरी चिंता देखी जा रही है। ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र भेजकर टैक्स कम करने की मांग की है। संगठन का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और घरेलू टैक्स ढांचे के कारण स्थिति बिगड़ रही है। इसका असर सीधे ट्रांसपोर्ट व्यवसाय, किसानों और आम जनता पर पड़ रहा है।

ट्रांसपोर्ट कारोबार पर बढ़ता दबाव

मध्यप्रदेश में डीजल और पेट्रोल की कीमतें लगातार बढ़ने से ट्रांसपोर्ट कारोबारियों की परेशानी बढ़ गई है। छोटे और मध्यम स्तर के वाहन मालिकों के लिए यह समय बेहद कठिन माना जा रहा है। माल ढुलाई की मांग कम होने के साथ साथ ईंधन का खर्च बढ़ने से कई गाड़ियां अब काम पर नहीं निकल पा रही हैं। कारोबारियों का कहना है कि लागत और कमाई के बीच संतुलन बिगड़ चुका है, जिससे व्यवसाय चलाना मुश्किल हो गया है। ट्रांसपोर्ट सेक्टर से जुड़े लोगों का मानना है कि अगर यही स्थिति बनी रही तो कई कंपनियों को नुकसान उठाना पड़ेगा और कुछ कारोबार पूरी तरह बंद भी हो सकते हैं। बैंक की किस्तें और रोजमर्रा के खर्च निकालना भी मुश्किल हो रहा है।

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टैक्स ढांचे पर उठ रहे सवाल

ट्रांसपोर्ट संगठनों का कहना है कि मध्यप्रदेश में पेट्रोल और डीजल पर लगाया जाने वाला वैट और अतिरिक्त सेस अन्य राज्यों की तुलना में अधिक है। इसी वजह से सीमावर्ती क्षेत्रों में वाहन चालक दूसरे राज्यों से ईंधन भरवाना पसंद कर रहे हैं। इससे राज्य सरकार को भी राजस्व का नुकसान हो रहा है। व्यवसायियों का मानना है कि अगर टैक्स में कुछ राहत दी जाए तो न सिर्फ ट्रांसपोर्ट सेक्टर को फायदा मिलेगा, बल्कि राज्य की आर्थिक गतिविधियां भी बेहतर हो सकती हैं। उनका कहना है कि टैक्स का बोझ सीधे आम लोगों की जेब पर असर डाल रहा है।

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बाजार और आम जनता पर असर

ईंधन की कीमत बढ़ने का असर सिर्फ ट्रांसपोर्ट सेक्टर तक सीमित नहीं रहता। जब ट्रक और माल ढुलाई का खर्च बढ़ता है, तो उसका असर सीधे बाजार की चीजों पर दिखता है। सब्जी, दूध, अनाज, दवाइयां और रोजमर्रा की जरूरतों की कीमतें बढ़ने लगती हैं। इसके अलावा बस और यात्री वाहनों का किराया भी बढ़ने की संभावना रहती है, जिससे आम लोगों का बजट प्रभावित होता है। मध्यम और निम्न आय वर्ग पर इसका सबसे ज्यादा असर देखने को मिलता है।

किसानों की बढ़ती परेशानी

मध्यप्रदेश एक कृषि प्रधान राज्य है, इसलिए यहां किसानों पर भी ईंधन की कीमतों का सीधा असर पड़ता है। खेती में उपयोग होने वाले ट्रैक्टर, पंप और अन्य मशीनें डीजल पर निर्भर होती हैं। डीजल महंगा होने से खेती की लागत बढ़ जाती है और किसानों का मुनाफा घट जाता है। किसानों का कहना है कि फसल की लागत बढ़ने के बावजूद बाजार में उन्हें उचित दाम नहीं मिल पाते, जिससे आर्थिक दबाव और बढ़ जाता है।

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ट्रांसपोर्ट संगठनों की सरकार से मांग

ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से अपील की है कि पेट्रोल और डीजल पर लगाए गए वैट और सेस को कम किया जाए। संगठन का कहना है कि अगर सरकार इस दिशा में कदम उठाती है तो ट्रांसपोर्ट सेक्टर को बड़ी राहत मिलेगी। उनका यह भी कहना है कि टैक्स कम होने से न सिर्फ उद्योग को फायदा होगा बल्कि आम जनता, किसान और व्यापार सभी वर्गों को राहत मिलेगी।

Aditi Rawat
By Aditi Rawat

अदिति रावत | MCU, भोपाल से M.Sc.(न्यू मीडिया टेक्नॉलजी) | एंकर, न्यूज़ एक्ज़िक्यूटिव की जिम्मेदारिय...Read More

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