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शनि अमावस्या:त्रेतायुगीन शनिदेव मंदिर में गूंजे जयकारे, मुरैना के एति पर्वत में उमड़ा आस्था का महासैलाब, लाखों भक्तों ने किए दर्शन

मध्य प्रदेश के मुरैना जिले में स्थित ऐंती पर्वत पर शनि अमावस्या के अवसर पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली। त्रेतायुगीन माने जाने वाले इस प्रसिद्ध शनिदेव मंदिर में सुबह से ही भक्तों का तांता लगा रहा। प्रशासन के अनुसार शाम तक छह लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना जताई गई है। देशभर से आए भक्तों ने तेलाभिषेक कर न्याय के देवता से सुख-शांति की कामना की।
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त्रेतायुगीन शनिदेव मंदिर में गूंजे जयकारे, मुरैना के एति पर्वत में उमड़ा आस्था का महासैलाब, लाखों भक्तों ने किए दर्शन
File Photo

ग्वालियर। शनि अमावस्या के मौके पर मुरैना जिले के ऐंती पर्वत स्थित प्राचीन शनिदेव मंदिर में आस्था का विशाल जनसैलाब उमड़ पड़ा। सुबह से ही मंदिर परिसर और दर्शन मार्ग पर श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं। मध्य प्रदेश सहित कई अन्य राज्यों से पहुंचे भक्तों ने शनिदेव के दर्शन कर तेल चढ़ाया और परिवार की सुख समृद्धि की प्रार्थना की। मंदिर प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष इंतजाम किए हैं। भीषण गर्मी को देखते हुए छांव, पानी और स्वास्थ्य सेवाओं की व्यवस्था की गई है। सुरक्षा के लिए भारी पुलिस बल भी तैनात किया गया है।

त्रेतायुग से जुड़ी है ऐंती पर्वत की मान्यता

ऐंती पर्वत स्थित शनिदेव मंदिर को लेकर लोगों में गहरी धार्मिक आस्था है। मान्यता है कि लंका दहन के समय भगवान हनुमान ने शनिदेव को रावण की कैद से मुक्त कराया था। इसके बाद शनिदेव के आग्रह पर हनुमानजी ने उन्हें अपनी पूंछ में बांधकर लंका से बाहर फेंक दिया था। कहा जाता है कि शनिदेव ऐंती पर्वत पर आकर गिरे और यहीं उन्होंने तपस्या कर अपनी शक्तियां फिर से प्राप्त कीं। इसी वजह से यह स्थान श्रद्धालुओं के बीच बेहद खास माना जाता है।

मानव स्वरूप में विराजमान हैं शनिदेव

इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह मानी जाती है कि यहां शनिदेव मानव मूर्ति के रूप में विराजमान हैं। श्रद्धालुओं का कहना है कि दुनिया में ऐसा स्वरूप कहीं और देखने को नहीं मिलता। मान्यता के अनुसार महाराष्ट्र के प्रसिद्ध शनि शिंगणापुर में स्थापित शिला भी इसी स्थान से ले जाई गई थी। यही कारण है कि देशभर से लोग यहां दर्शन करने पहुंचते हैं और शनिदेव से न्याय की प्रार्थना करते हैं।

रात से ही शुरू हो गया था श्रद्धालुओं का पहुंचना

शनि अमावस्या के कारण शुक्रवार देर रात से ही श्रद्धालुओं का मंदिर पहुंचना शुरू हो गया था। मंदिर प्रशासन ने भक्तों की सुविधा को देखते हुए मंदिर के पट लगातार खुले रखने का फैसला लिया। शनिवार देर रात तक श्रद्धालु दर्शन कर सकेंगे। मंदिर परिसर में हर तरफ भक्ति और श्रद्धा का माहौल देखने को मिला। लोग परिवार के साथ दर्शन के लिए पहुंचे और कई श्रद्धालुओं ने तेलाभिषेक भी किया।

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गर्मी के बीच प्रशासन ने किए खास इंतजाम

भीषण गर्मी को देखते हुए प्रशासन ने दर्शन मार्ग पर टेंट लगाकर छांव की व्यवस्था की। श्रद्धालुओं को गर्म सड़क से राहत देने के लिए रास्तों पर कार्पेट भी बिछाए गए। इसके अलावा पानी और प्राथमिक उपचार की व्यवस्था भी की गई। स्वास्थ्य संबंधी किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए अस्थायी अस्पताल बनाया गया है। प्रशासन का कहना है कि श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है।

सुरक्षा व्यवस्था रही कड़ी

मेले में लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ को संभालने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। मंदिर परिसर और आसपास के इलाकों में लगातार निगरानी रखी जा रही है। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी भी पूरे समय व्यवस्था संभालते नजर आए। श्रद्धालुओं को लाइन में दर्शन कराने के लिए बैरिकेडिंग की गई ताकि किसी तरह की परेशानी न हो।

मुंडन संस्कार और वस्त्र त्याग की परंपरा भी निभाई गई

शनिदेव मंदिर में हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु मुंडन संस्कार और पुराने वस्त्र त्यागने की परंपरा निभाते हैं। इस बार भी मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में लोगों ने यह धार्मिक रस्म पूरी की। कपड़ों और बालों के ढेर को हटाने के लिए विशेष सफाई वाहन लगाए गए हैं ताकि मंदिर परिसर साफ सुथरा बना रहे।

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भंडारों में श्रद्धालुओं के लिए निशुल्क भोजन

शनि मेले के दौरान कई सामाजिक और धार्मिक संस्थाओं की ओर से विशाल भंडारों का आयोजन किया गया। श्रद्धालुओं के लिए भोजन और ठंडे पानी की निशुल्क व्यवस्था की। दूर-दूर से पहुंचे भक्तों ने भंडारों में प्रसाद ग्रहण किया।

Aditi Rawat
By Aditi Rawat

अदिति रावत | MCU, भोपाल से M.Sc.(न्यू मीडिया टेक्नॉलजी) | एंकर, न्यूज़ एक्ज़िक्यूटिव की जिम्मेदारिय...Read More

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