PU Special :उज्जैन महाकाल के दर्शन का ऐसा क्रेज, घर छोड़ने जैसा कदम उठा रहे बच्चे

पल्लवी वाघेला, भोपाल।श्रावण में महाकाल के दर्शन की इच्छा बच्चों में भी इस कदर बढ़ रही है कि कुछ बच्चे परिवार के साथ उज्जैन जाने की अनुमति नहीं मिलने पर खुद ही घर से निकलने का कदम उठा रहे हैं। बीते हफ्ते 14 और 15 साल के दो दोस्त, भोपाल में रेस्क्यू किए गए। दोनों हैदराबाद क्षेत्र में अपने घर से बिना बताए निकल आए थे। इनकी इच्छा श्रावण में मध्यप्रदेश में मौजूद दो ज्योतिलिंर्गों के दर्शन करने की थी। जब परिवार इसके लिए राजी नहीं हुआ तो दोनों ने चैट जीपीटी की मदद से पूरा प्लान तैयार किया, बजट निकाला और किसी तरह छह हजार रुपए का जुगाड़ कर घर से निकल आए। बाद में दोनों को भोपाल में रेस्क्यू किया गया।
श्रावण में पांच बच्चों ने उज्जैन जाने का बनाया
यह अकेला मामला नहीं है। चाइल्ड हेल्पलाइन के आंकड़ों को देखें तो, पिछले साल मध्यप्रदेश में उज्जैन जाने के लिए घर से निकले 26 बच्चों का रेस्क्यू किया गया था। इनमें अकेले श्रावण माह में 7 बच्चे शामिल थे। इस साल भी श्रावण के शुरूआती दो सप्ताह में पांच बच्चे रेस्क्यू हुए हैं, जिनमें भोपाल में रेस्क्यू यह दो बच्चे शामिल हैं। एक्सपर्ट के मुताबिक सोशल मीडिया पर मौजूद धार्मिंक कंटेंट, वीआईपी और सेलिब्रिटीज का आना और मंदिरों का आकर्षण धार्मिक स्थलों में बच्चों की रुचि बढ़ा रहा है और कई बार वह बिना सोचे-समझे घर से निकलने जैसा कदम भी उठा लेते हैं।
दो ज्योतिर्लिंग के दर्शन की थी इच्छा
हाल में रेस्क्यू किए गए दोनों किशोर दोस्त हैं। काउंसलिंग में सामने आया कि दोनों किशोर सारे ज्योतिर्लिंग के दर्शन की इच्छा रखते हैं। मप्र में दो ज्योर्तिलिंग एक साथ होने की बात सामने आई तो दोनों ने परिवार से यहां चलने के लिए कहा। अचानक इतनी दूर जाने की बात परिवार मान नहीं पाया और कहा कि अगले साल चलेंगे। बस दोनों ने खुद ही घर से निकलने का मन बना लिया। दोनों मध्यमवर्गीय परिवार से हैं और किसी तरह इधर-उधर से जुगाड़ कर पैसे जमा किए। इसके बाद बिना टिकट ट्रेन यात्रा की। भोपाल से आगे वह बस से जाने वाले थे, लेकिन उन्हें रेस्क्यू कर लिया गया। बच्चों ने बताया कि उज्जैन के बाद वह ओंकारेश्वर भी जाने वाले थे। इसके बाद वापस घर लौट जाते।
रील ने किया प्रभावित
बता दें, धार्मिक स्थलों पर जाने के लिए निकलने वाले अधिकांश बच्चों ने काउंसलिंग में माना कि उन्होंने सोशल मीडिया पर उस स्थान की रील या वीडियो कंटेंट देखा, जिसके बाद मन में उस स्थान के लिए ललक जगी। इस मामले में भी बच्चों ने रील में भस्म आरती की झलक और महाकाल में फिल्म और अन्य सेलिब्रिटीज के आने की वीडियो और न्यूज के बाद उज्जैन आने का मन बनाया।
बच्चे को सचेत करते रहें
'किशोरावस्था में बच्चे किसी धार्मिक या आध्यात्मिक गतिविधि से तेजी से प्रभावित हो सकते हैं। सोशल मीडिया पर मंदिरों, दर्शन, भीड़, भस्म आरती और धार्मिक यात्राओं से जुड़े वीडियो लगातार सामने आने से बच्चों में वहां जाने की इच्छा और मजबूत हो सकती है। कई बार वे यात्रा के जोखिम और अपनी उम्र को ध्यान में रखे बिना निर्णय ले लेते हैं। बच्चों की इस इच्छा को केवल जिद मानकर रोकना समाधान नहीं है। यदि बच्चा अचानक किसी धार्मिक स्थल पर जाने की जिद करने लगे, बार-बार यात्रा से जुड़े वीडियो देखे या दोस्तों के साथ अकेले जाने की योजना बनाए तो अभिभावकों को इसे गंभीरता से लेना चाहिए। बच्चों को यह समझाना जरूरी है कि दर्शन की इच्छा गलत नहीं है, लेकिन बिना बताए घर से निकलना सुरक्षित नहीं है।'
डॉ. दीप्ति सिंघल, काउंसलर
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