🌤️
--Bhopal, India

PlayBreaking News

गौसेवक ने निभाया ‘पुत्र धर्म’; 10 वर्षों तक सेवा करने वाली गौ माता को दी सनातन पद्धति से विदाई, अंतिम संस्कार में छलक उठे आंसू

इंदौर के तुलसी नगर गौ उद्यान में करीब 10 वर्षों से सेवा पा रही गौ माता ‘निर्जला’ के निधन पर गौसेवक अमोल पाटिल ने वैदिक रीति से अंतिम संस्कार किया। स्थानीय रहवासियों और नगर निगम के सहयोग से 10 फीट गहरे गड्ढे में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान अमोल पाटिल भावुक हो उठे।
Follow on Google News
गौसेवक ने निभाया ‘पुत्र धर्म’; 10 वर्षों तक सेवा करने वाली गौ माता को दी सनातन पद्धति से विदाई, अंतिम संस्कार में छलक उठे आंसू
इंदौर। गौसेवक अमोल पाटिल ने गौमाता निर्जला का सनातन पद्धति से अंतिम संस्कार किया।

इंदौर। तुलसी नगर स्थित गौ उद्यान में श्रावण सोमवार को एक भावुक दृश्य देखने को मिला, जब गौसेवक अमोल पाटिल ने लगभग 10 वर्षों से सेवा कर रही गौ माता “निर्जला” का वैदिक रीति से अंतिम संस्कार किया। पूरे क्षेत्र में यह घटना संवेदना और श्रद्धा का विषय बनी रही। अमोल पाटिल वर्षों से घायल, बीमार और बेसहारा गौ माताओं की सेवा कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि लगभग दस वर्ष पहले सड़क दुर्घटना में घायल अवस्था में मिली “निर्जला” को वे गौ उद्यान में लेकर आए थे। 

वैदिक मंत्रोच्चार के साथ 10 फीट गहरे गड्ढे में स्थापित

स्थानीय रहवासियों और पार्षद प्रतिनिधि राकेश जायसवाल के सहयोग से नगर निगम की मदद से लगभग 10 फीट गहरा गड्ढा तैयार कराया गया। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच गौ माता को श्रद्धापूर्वक स्थापित किया गया और 50 किलो नमक, चंदन की लकड़ी, फूल, तुलसी माला और गुलाल अर्पित किए गए। संयोग से जिस दिन उसे लाया गया था और जिस दिन उसका निधन हुआ, दोनों दिन एकादशी के थे।अंतिम विदाई के दौरान अमोल पाटिल भावुक हो उठे। संस्कार के बाद उन्होंने पारंपरिक शोक रीति का पालन करते हुए अपने बाल भी कटवाए। इस अवसर पर बड़ी संख्या में तुलसी नगर के रहवासी उपस्थित थे।

ये भी पढ़ें: सारंगपुर में NH-52 पर कार डंपर से टकराई, धौैलपुर के एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत

अमोल ने दी कैंसर को मात

अमोल पाटिल राष्ट्रीय गौरक्षा वाहिनी गौसेवा संघ भारत के युवा प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। उल्लेखनीय है कि वे स्वयं लगभग तीन वर्ष पूर्व मुख कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ चुके हैं और दृढ़ इच्छाशक्ति से उस बीमारी को परास्त किया। इसके बावजूद उन्होंने गौसेवा का कार्य नहीं छोड़ा। वर्तमान में वे लगभग 10 गौ माताओं की देखभाल, भोजन और उपचार की व्यवस्था स्वयं कर रहे हैं। स्थानीय लोगों ने इस घटना को सेवा, करुणा और सनातन संस्कारों की मार्मिक मिसाल बताया।

ये भी पढ़ें: बेगमगंज में बस किराए के खिलाफ छात्रों का प्रदर्शन, बोले- पढ़ाई पर पड़ रहा असर

Naresh Bhagoria
By Naresh Bhagoria

नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

icon

Latest Posts