गौसेवक ने निभाया ‘पुत्र धर्म’; 10 वर्षों तक सेवा करने वाली गौ माता को दी सनातन पद्धति से विदाई, अंतिम संस्कार में छलक उठे आंसू

इंदौर। तुलसी नगर स्थित गौ उद्यान में श्रावण सोमवार को एक भावुक दृश्य देखने को मिला, जब गौसेवक अमोल पाटिल ने लगभग 10 वर्षों से सेवा कर रही गौ माता “निर्जला” का वैदिक रीति से अंतिम संस्कार किया। पूरे क्षेत्र में यह घटना संवेदना और श्रद्धा का विषय बनी रही। अमोल पाटिल वर्षों से घायल, बीमार और बेसहारा गौ माताओं की सेवा कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि लगभग दस वर्ष पहले सड़क दुर्घटना में घायल अवस्था में मिली “निर्जला” को वे गौ उद्यान में लेकर आए थे।
वैदिक मंत्रोच्चार के साथ 10 फीट गहरे गड्ढे में स्थापित
स्थानीय रहवासियों और पार्षद प्रतिनिधि राकेश जायसवाल के सहयोग से नगर निगम की मदद से लगभग 10 फीट गहरा गड्ढा तैयार कराया गया। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच गौ माता को श्रद्धापूर्वक स्थापित किया गया और 50 किलो नमक, चंदन की लकड़ी, फूल, तुलसी माला और गुलाल अर्पित किए गए। संयोग से जिस दिन उसे लाया गया था और जिस दिन उसका निधन हुआ, दोनों दिन एकादशी के थे।अंतिम विदाई के दौरान अमोल पाटिल भावुक हो उठे। संस्कार के बाद उन्होंने पारंपरिक शोक रीति का पालन करते हुए अपने बाल भी कटवाए। इस अवसर पर बड़ी संख्या में तुलसी नगर के रहवासी उपस्थित थे।
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अमोल ने दी कैंसर को मात
अमोल पाटिल राष्ट्रीय गौरक्षा वाहिनी गौसेवा संघ भारत के युवा प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। उल्लेखनीय है कि वे स्वयं लगभग तीन वर्ष पूर्व मुख कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ चुके हैं और दृढ़ इच्छाशक्ति से उस बीमारी को परास्त किया। इसके बावजूद उन्होंने गौसेवा का कार्य नहीं छोड़ा। वर्तमान में वे लगभग 10 गौ माताओं की देखभाल, भोजन और उपचार की व्यवस्था स्वयं कर रहे हैं। स्थानीय लोगों ने इस घटना को सेवा, करुणा और सनातन संस्कारों की मार्मिक मिसाल बताया।
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