PU Special :मध्यप्रदेश में बन रहे 5 इकोनॉमिक कॉरिडोर, कई जिलों की बदलेगी तस्वीर; रोजगार को मिलेगी नई रफ्तार

अशोक गौतम, भोपाल। यह अकेला कॉरिडोर नहीं है। मध्यप्रदेश में ऐसे पांच आर्थिक कॉरिडोर विकसित किए जा रहे हैं, जिनसे कारोबार, निवेश और रोजगार को गति मिलने की उम्मीद है। केंद्र की भारतमाला परियोजना के तहत प्रदेश में बन रहे चार कॉरिडोर के साथ इंदौर-पीथमपुर-धार इकोनॉमिक कॉरिडोर का निर्माण प्रदेश का उद्योग विभाग करा रहा है। इन परियोजनाओं पर काम शुरू हो चुका है और अगले दो साल में इनके तैयार होने की उम्मीद है। दूसरी ओर, इन कॉरिडोरों को जोड़ने वाले सड़क नेटवर्क को मजबूत करने के लिए एनएचएआई पिछले तीन वर्षों में मध्यप्रदेश में 21,325 करोड़ रुपये से अधिक खर्च कर चुका है। इस राशि से 12 राष्ट्रीय राजमार्गों को चार और छह लेन में विकसित किया जा रहा है, जिनमें आधा दर्जन से अधिक परियोजनाएं पूरी होकर यातायात के लिए खुल चुकी हैं।
सागर-कबरई नेशनल हाईवे
सागर-कबरई नेशनल हाईवे (मुख्यत: एनएच-34, एनएच-934) मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश के बीच बुंदेलखंड क्षेत्र को जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण फोरलेन आर्थिक गलियारा (इकोनॉमिक कॉरिडोर) है। यह भोपाल-कानपुर-लखनऊ रूट का हिस्सा है, जिससे यात्रा का समय घट रहा है और आपसी संपर्क बेहतर हो रहा है। यह मार्ग मध्यप्रदेश के सागर से शुरू होकर छतरपुर और मध्यप्रदेश-उत्तर प्रदेश सीमा से होते हुए उत्तरप्रदेश के कबरई तक जाता है।
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सागर-मोहरी नेशनल हाईवे
नेशनल हाईवे-934 का सागर-मोहरी खंड 42.3 किलोमीटर लंबा चार लेन का राजमार्ग है। यह प्रोजेक्ट भोपाल-कानपुर कॉरिडोर का हिस्सा है। मध्यप्रदेश-उत्तर प्रदेश के बीच आवागमन और माल ढुलाई को सुगम बनाने के लिए इसे विकसित किया जा रहा है। इस फोरलेन के बनने से सागर से खजुराहो और अन्य नजदीकी स्थलों की दूरी तय करने में समय की काफी बचत होती है। इससे खजुराहो और पन्ना जैसे पर्यटन स्थलों तक पहुंचना और अधिक सुविधाजनक हो गया है।
दिल्ली-मुंबई-वडोदरा एक्सप्रेसवे
दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे मध्यप्रदेश के तीन जिलों से क्रॉस होते हुए लगभग 244 किलोमीटर एक तरफ गुजरात और दूसरी तरफ राजस्थान और दिल्ली को मिलाता है। राज्य में इसके प्रमुख प्रवेश और निकास बिंदु (इंटरचेंज) गरोठ, जावरा और थांदला के पास हैं, जो आसपास के शहरों को उच्च गति कनेक्टिविटी प्रदान करते हैं। इससे इंदौर, भोपाल और उज्जैन जैसे बड़े शहर सीधे जुड़ते हैं।
इंदौर-हरदा-राघौगढ़ खंड नेशनल हाईवे
इंदौर-हरदा-राघौगढ़ खंड (नेशनल हाईवे-47 का हिस्सा) एक आर्थिक गलियारा है। यह प्रोजेक्ट इंदौर को हरदा और नागपुर, हैदराबाद मार्ग से जोड़ता है। यह नया फोरलेन हाईवे इंदौर बायपास के पास से शुरू होकर बेगमखेड़ी, खुड़ैल, गोगाखेड़ी और मिर्जापुर से होते हुए राघौगढ़ (नेमावर रोड) तक जाता है।
इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर
इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर (आईपीईसी) इंदौर और औद्योगिक हब पीथमपुर को जोड़ने वाली एक महत्वाकांक्षी 20.3 किलोमीटर लंबी परियोजना है। लगभग 2,360 करोड़ की लागत वाले इस प्रोजेक्ट की लंबाई करीब 20-21 किमी और चौड़ाई 675 मीटर है, जिसमें मुख्य सड़क 75 मीटर चौड़ी होगी। इस पूरी परियोजना की अनुमानित लागत लगभग 2,360 करोड़ से अधिक है।











