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भोपाल में ईद नहीं मनाएगा शिया समाज :खामेनेई की मौत के बाद लिया फैसला, तीन दिवसीय शोक का ऐलान

ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद भारत के शिया समुदाय में शोक की लहर है। भोपाल में शिया मुसलमानों ने इस बार ईद सादगी से मनाने और तीन दिन का शोक रखने का फैसला किया है। शहर में शोक सभाएं और श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
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खामेनेई की मौत के बाद लिया फैसला, तीन दिवसीय शोक का ऐलान
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    भोपाल। ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद दुनियाभर के शिया मुसलमानों में गहरा शोक देखा जा रहा है। अमेरिका और इजरायल के हमले में खामेनेई की मौत की खबर सामने आने के बाद भारत में भी कई जगहों पर विरोध प्रदर्शन और शोक सभाएं आयोजित की गईं।

    मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल समेत कई शहरों में शिया समुदाय ने इस घटना पर गहरा दुख जताया है। समुदाय के धार्मिक नेताओं और संगठनों ने फैसला लिया है कि, इस बार ईद का त्योहार सादगी और शोक के माहौल में मनाया जाएगा। भोपाल में शिया समुदाय ने घोषणा की है कि, वे पारंपरिक उत्सव नहीं मनाएंगे और तीन दिनों का शोक मनाया जाएगा।

    सादगी से अदा होगी ईद की नमाज

    शिया धर्मगुरु मौलाना अजहर हुसैन जैदी ने कहा कि, इस बार ईद की नमाज तो अदा की जाएगी, लेकिन त्योहार की पारंपरिक रौनक नहीं होगी। उन्होंने बताया कि, लोग नए कपड़े पहनने, मिठाइयां बनाने और घरों में सिवइयां तैयार करने जैसी रस्मों से परहेज करेंगे। उनका कहना है कि, जब पूरी उम्मत एक बड़े नेता के निधन से दुखी है, तो ऐसे समय में उत्सव मनाना उचित नहीं होगा।

    मौलाना ने कहा कि, ईद की नमाज मस्जिदों में अदा की जाएगी, लेकिन लोगों से अपील की गई है कि वे सादगी बनाए रखें और शोक के माहौल को ध्यान में रखें।

    भोपाल में तीन दिवसीय शोक की घोषणा

    भोपाल में शिया समुदाय की ओर से तीन दिन के शोक की घोषणा की गई है। करोंद स्थित शिया जामा मस्जिद में श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई, जिसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। यहां धार्मिक नेताओं ने खामेनेई को श्रद्धांजलि दी और उनके नेतृत्व को याद किया।

    मस्जिद के इमाम अजहर हुसैन रिजवी ने कहा कि, खामेनेई ऐसे नेता थे जिन्होंने हमेशा अन्याय के खिलाफ आवाज उठाई। उन्होंने कहा कि उनकी शहादत सिर्फ ईरान के लिए ही नहीं, बल्कि पूरी उम्मत के लिए एक बड़ा नुकसान है। उन्होंने लोगों से अपील की है कि, वे इस समय एकजुट रहें और अपने उत्सवों में कटौती करते हुए शोक में शामिल हों।

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    शोक सभाएं और मातमी जुलूस

    भोपाल और इंदौर सहित मध्य प्रदेश के कई शहरों में शोक सभाएं और मातमी जुलूस निकाले जा रहे हैं। फतेहगढ़ क्षेत्र में स्थित इमामबाड़े के पास भी लोगों ने एकत्र होकर खामेनेई को श्रद्धांजलि दी। इस दौरान लोगों ने नारे लगाए और इजरायल तथा अमेरिका के खिलाफ विरोध दर्ज कराया।

    सभा को संबोधित करते हुए इमाम बाकर हुसैन ने कहा कि, खामेनेई ने अपने जीवन में अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाई और मजलूमों का साथ दिया। उन्होंने कहा कि, किसी एक व्यक्ति के जाने से कोई आंदोलन खत्म नहीं होता और विचारधारा आगे भी जारी रहती है।

    बैतूल में निकला कैंडल मार्च

    मध्य प्रदेश के बैतूल जिले में भी शिया समुदाय ने खामेनेई की मौत पर कैंडल मार्च निकालकर शोक व्यक्त किया। यह मार्च मस्जिद परिसर से शुरू होकर शहर के प्रमुख मार्गों से होता हुआ जय स्तंभ चौक तक पहुंचा। यहां एक निंदा सभा का आयोजन किया गया, जिसमें अमेरिका और इजरायल के हमले की आलोचना की गई।

    इमामे जुमा सैयद सितवत हैदर जैदी ने कहा कि, यह हमला कायरता की मिसाल है। उन्होंने कहा कि, खामेनेई किसी बंकर में छिपे नहीं थे, बल्कि अपने दफ्तर में मौजूद थे और अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर रहे थे।

    उम्मत खुद को यतीम महसूस कर रही

    धार्मिक नेताओं ने कहा कि, खामेनेई की शहादत से पूरी मुस्लिम उम्मत खुद को यतीम महसूस कर रही है। मौलाना अली कदर ने कहा कि, इतिहास में ऐसे लोग हमेशा याद किए जाते हैं जो अपने सिद्धांतों के लिए कुर्बानी देते हैं। उन्होंने शहीद-ए-आजम भगत सिंह और टीपू सुल्तान का उदाहरण देते हुए कहा कि, विचारों में मतभेद हो सकते हैं, लेकिन बलिदान देने वालों का सम्मान हमेशा किया जाता है। उन्होंने कहा कि शहादत समाज को सब्र, हिम्मत और संघर्ष का संदेश देती है।

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    खामेनेई का जीवन और राजनीतिक सफर

    अयातुल्ला अली खामेनेई ईरान के सबसे प्रभावशाली नेताओं में से एक थे। वे पिछले तीन दशकों से अधिक समय तक ईरान की सर्वोच्च सत्ता पर काबिज रहे।

    खामेनेई के बारे में जानें

    जानकारी

    विवरण

    पूरा नाम

    सैय्यद अली हुसैनी खामेनेई

    जन्म

    19 अप्रैल 1939, मशहद (ईरान)

    मृत्यु

    28 फरवरी 2026, तेहरान

    पद

    ईरान के सुप्रीम लीडर

    राष्ट्रपति कार्यकाल

    1981-1989

    सुप्रीम लीडर बने

    1989

    खामेनेई ने 1979 की इस्लामिक क्रांति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। क्रांति के बाद उन्हें 1981 में ईरान का राष्ट्रपति बनाया गया। 1989 में ईरान के पहले सुप्रीम लीडर अयातुल्ला रुहोल्लाह खुमैनी की मौत के बाद खामेनेई को उनका उत्तराधिकारी बनाया गया।

    सुप्रीम लीडर का पद कितना शक्तिशाली

    ईरान की राजनीतिक व्यवस्था में सुप्रीम लीडर का पद सबसे शक्तिशाली माना जाता है। सुप्रीम लीडर देश की सेना, न्यायपालिका और कई अहम संस्थाओं पर अंतिम नियंत्रण रखते हैं। इसके अलावा वे विदेश नीति और सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण फैसलों में भी अहम भूमिका निभाते हैं।

    ईरान के कानून के मुताबिक सुप्रीम लीडर बनने के लिए व्यक्ति का अयातुल्ला होना जरूरी होता है, जो इस्लामिक धर्मगुरुओं की एक उच्च धार्मिक पदवी है।

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    ईरान-इजरायल और अमेरिका के बीच तनाव

    खामेनेई के नेतृत्व में ईरान और इजरायल के बीच लंबे समय से तनाव बना हुआ था। इसके पीछे कई प्रमुख कारण हैं।

    1. परमाणु कार्यक्रम

    अमेरिका और उसके सहयोगियों को संदेह है कि ईरान परमाणु हथियार विकसित करने की कोशिश कर रहा है। हालांकि, ईरान का कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम केवल ऊर्जा उत्पादन और वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए है।

    2. बैलिस्टिक मिसाइल विवाद

    ईरान का बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम भी अमेरिका और इजरायल के लिए चिंता का विषय रहा है। ईरान इसे अपनी सुरक्षा के लिए जरूरी बताता है और इसे अपनी रेड लाइन मानता है।

    3. मिडिल ईस्ट में प्रभाव

    अमेरिका का आरोप है कि ईरान इराक, सीरिया, लेबनान और यमन जैसे देशों में अपने समर्थक समूहों को समर्थन देकर क्षेत्र में अपना प्रभाव बढ़ा रहा है। ईरान का कहना है कि वह अपने सहयोगियों और हितों की रक्षा कर रहा है।

    4. आर्थिक प्रतिबंध

    अमेरिका ने ईरान पर कई आर्थिक प्रतिबंध लगाए हैं, जिससे उसकी अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर पड़ा है।

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    अंतरराष्ट्रीय हालात पर चिंता

    भोपाल के धार्मिक नेताओं ने मौजूदा अंतरराष्ट्रीय हालात पर भी चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि, आम लोग जंग नहीं बल्कि शांति चाहते हैं। लेकिन दुनिया के कई हिस्सों में लगातार बढ़ रहे तनाव ने लोगों को चिंतित कर दिया है। धार्मिक नेताओं ने अपील की है कि, लोग धैर्य बनाए रखें और शांति का संदेश फैलाएं।

    Manisha Dhanwani
    By Manisha Dhanwani

    मनीषा धनवानी | जागरण लेकसिटी यूनिवर्सिटी से BJMC | 6 वर्षों के पत्रकारिता अनुभव में सब-एडिटर, एंकर, ...Read More

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