तेल अवीव/तेहरान। मिडिल ईस्ट में चल रही अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जंग हर दिन और खतरनाक होती जा रही है। सऊदी अरब की राजधानी रियाद में अमेरिकी दूतावास पर हुए ड्रोन हमले के बाद हालात और तनावपूर्ण हो गए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस हमले को गंभीर चुनौती बताते हुए कहा है कि, ईरान को बहुत जल्द इसका जवाब मिलेगा।
ट्रंप ने साफ संकेत दिए हैं कि, आने वाले दिनों में ईरान पर और बड़े सैन्य हमले हो सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि, जंग कुछ हफ्तों तक जारी रह सकती है। इस बीच अमेरिका ने अपने नागरिकों को मिडिल ईस्ट के कई देशों से तुरंत निकलने की सलाह दी है।
मिडिल ईस्ट में तनाव तब और बढ़ गया जब सऊदी अरब की राजधानी रियाद में अमेरिकी दूतावास पर ड्रोन हमला हुआ। सोमवार रात एम्बेसी परिसर के ऊपर जोरदार धमाके सुने गए और घना धुआं उठता देखा गया। अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार, दो ड्रोन दूतावास की इमारत से टकराए।
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घटना |
जानकारी |
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ड्रोन हमले |
2 |
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स्थान |
अमेरिकी दूतावास, रियाद |
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नुकसान |
मामूली |
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घायल |
कोई नहीं |
सऊदी रक्षा मंत्रालय के अनुसार, ड्रोन हमले के बाद आग लगी थी लेकिन उसे जल्द ही बुझा लिया गया।
ड्रोन हमले के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि, ईरान को जल्द ही पता चल जाएगा कि अमेरिका इस हमले का क्या जवाब देगा। ट्रंप ने कहा कि, उन्हें नहीं लगता कि ईरान में जमीनी स्तर पर अमेरिकी सेना भेजने की जरूरत होगी। उनका मानना है कि, हवाई और तकनीकी सैन्य ताकत से ही अभियान जारी रखा जा सकता है।
अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, आने वाले 24 घंटों में ईरान पर हमलों में बड़ी बढ़ोतरी हो सकती है। रिपोर्ट के अनुसार, अगले चरण में इन चीजों को निशाना बनाया जा सकता है-
इससे ईरान की सैन्य ताकत को और कमजोर करने की रणनीति बनाई गई है।
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अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने सुरक्षा कारणों से अपने नागरिकों को मिडिल ईस्ट के कई देशों से तुरंत निकलने की सलाह दी है। जिन देशों को छोड़ने की सलाह दी गई वो हैं-
अमेरिका ने कहा कि, इन क्षेत्रों में सुरक्षा जोखिम तेजी से बढ़ रहा है।
जंग का असर पाकिस्तान में भी देखने को मिला है। अमेरिकी दूतावास ने सुरक्षा कारणों से सभी वीजा अपॉइंटमेंट रद्द कर दिए हैं। यह आदेश इस्लामाबाद, लाहौर और कराची में लागू किया गया है और 6 मार्च तक प्रभावी रहेगा।
रिपोर्ट्स के अनुसार, कराची में अमेरिकी कांसुलेट के बाहर विरोध प्रदर्शन हुआ। इस दौरान स्थिति काफी तनावपूर्ण हो गई और सुरक्षाकर्मियों को गोली चलानी पड़ी।
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घटना |
संख्या |
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प्रदर्शनकारियों की मौत |
10 |
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कुल मृतक (पाकिस्तान) |
23 |
प्रदर्शनकारियों ने दूतावास परिसर की दीवार तोड़कर अंदर घुसने की कोशिश की थी।
इराकी प्रधानमंत्री मोहम्मद अल-सुदानी ने देश में सभी सैन्य और सुरक्षा ऑपरेशन की कमान अपने हाथ में ले ली है। हालांकि, इराक ने साफ किया है कि वह इस युद्ध में सीधे शामिल नहीं होगा।
लेबनान के हिजबुल्लाह संगठन ने भी बयान जारी किया है। उसने कहा कि इजरायल के हमलों का जवाब देना उसका अधिकार है और अगर हमले जारी रहे तो वह जवाबी कार्रवाई जारी रखेगा। हालांकि लेबनान सरकार ने कहा है कि हिजबुल्लाह की भूमिका अब सिर्फ राजनीति तक सीमित रहेगी।
इस जंग में अमेरिका को भी नुकसान हुआ है।
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नुकसान |
संख्या |
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मारे गए सैनिक |
3 |
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घायल सैनिक |
4 |
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गिराए गए फाइटर जेट |
3 |
कुवैत में फ्रेंडली फायर की वजह से तीन अमेरिकी फाइटर जेट गिर गए।
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा है कि, यह युद्ध 4 से 5 हफ्तों तक चल सकता है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि जरूरत पड़ने पर अभियान इससे ज्यादा समय तक भी जारी रह सकता है।
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मिडिल ईस्ट में जारी यह संघर्ष केवल क्षेत्रीय युद्ध नहीं रह गया है। इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि, अगर यह युद्ध लंबा चलता है तो इसके कई बड़े परिणाम हो सकते हैं-
मिडिल ईस्ट में मौजूदा संघर्ष की शुरुआत 28 फरवरी को हुई जब अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान के कई महत्वपूर्ण सैन्य और रणनीतिक ठिकानों पर बड़े पैमाने पर हमला किया। इस सैन्य अभियान को ऑपरेशन एपिक फ्यूरी नाम दिया गया। इस ऑपरेशन का मुख्य उद्देश्य ईरान की सैन्य ताकत को कमजोर करना था। इसके तहत कई अहम टारगेट चुने गए।
मुख्य टारगेट
शुरुआती 30 घंटों में ही 2000 से ज्यादा बम गिराए गए और 1000 से ज्यादा ठिकानों को निशाना बनाया गया।
अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमलों के बाद ईरान की सैन्य क्षमताओं को बड़ा झटका लगा है। कई सैन्य प्रतिष्ठान नष्ट हो चुके हैं और बड़ी संख्या में सैन्य अधिकारी मारे गए हैं।
अब तक का अनुमानित नुकसान
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नुकसान |
संख्या |
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हमले किए गए ठिकाने |
1000 से ज्यादा |
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गिराए गए बम |
2000 से ज्यादा |
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मारे गए लोग |
742 |
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घायल लोग |
750 से ज्यादा |
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बच्चों की मौत |
176 |
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मारे गए टॉप लीडर |
48 से ज्यादा |
रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान की मिसाइल क्षमता का लगभग आधा हिस्सा नष्ट हो चुका है। इसके अलावा नौ नौसैनिक जहाज भी डूब गए हैं।
इस युद्ध की सबसे बड़ी घटना ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत है। हमलों के पहले दिन ही उनके कंपाउंड को निशाना बनाया गया था। बाद में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने घोषणा की कि इस हमले में खामेनेई मारे गए हैं। ईरान की सरकारी मीडिया ने भी उनकी मौत की पुष्टि की। इसके अलावा कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारी और शीर्ष नेता भी इस हमले में मारे गए।
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खामेनेई की मौत के दो दिन बाद उनकी पत्नी मंसूरेह खोझस्तेह बघेरजादेह का भी निधन हो गया। वे उसी हमले में गंभीर रूप से घायल हुई थीं जिसमें खामेनेई की मौत हुई थी। इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। मंसूरेह का जन्म 1947 में मशहद में हुआ था और वे एक प्रतिष्ठित धार्मिक परिवार से थीं।
अमेरिका और इजरायल के हमलों के जवाब में ईरान ने भी कई देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। ईरान ने मिसाइल और ड्रोन हमले किए जिनका दायरा काफी बड़ा था। जिन देशों को बनाया गया निशाना-
इन हमलों में कई सैन्य ठिकानों को नुकसान पहुंचा।
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तारीख |
घटना |
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28 फरवरी |
अमेरिका-इजरायल ने ईरान पर बड़े हमले शुरू किए |
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28 फरवरी |
खामेनेई के कंपाउंड पर हमला |
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1 मार्च |
खामेनेई की मौत की पुष्टि |
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2 मार्च |
ईरान के जवाबी मिसाइल हमले |
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3 मार्च |
रियाद में अमेरिकी दूतावास पर ड्रोन हमला |