
अशोक गौतम, भोपाल
सरकार ने फर्जी और अपात्र हितग्राहियों पर शिकंजा कसने के लिए डेटा शेयरिंग की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिससे पात्रता छिपाकर लाभ लेने वालों की पहचान आसान हो जाएगी।
सार्वजनिक वितरण प्रणाली (मुफ्त में राशन) लेने वाले हितग्राहियों का पूरा रिकॉर्ड अब परिवहन, आयकर, जीएसटी, कॉर्पोरेट मंत्रालय और यूआईडीएआई सहित अन्य मंत्रालयों को साझा किया जा रहा है। इन विभागों के पोर्टल में सभी हितग्राहियों के नाम, मोबाइल नंबर, आधार नंबर होगा, इससे हितग्राही पात्रता मानकों में किसी प्रकार की जानकारी को छिपाकर मुफ्त में राशन का फायदा नहीं उठा सकेंगे। इस तरह के हितग्राहियों के नाम हटाने में प्रदेश देश में पांचवें नंबर पर है। उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण प्रणाली विभाग ने कार्यवाही शुरू कर दी है। इसके चलते केंद्र और राज्य सरकारों को तमाम योजनाओं के नाम देने के लिए हितग्राहियों के सत्यापन में किसी तरह की समस्या नहीं होगी। अगर कहीं पात्रता मानदंडों में किसी भी शर्तों का उल्लंघन किया गया तो सूची में नाम नहीं जोड़ा जा सकेगा। अधिकारी भी इस तरह के नामों को पात्रता सूची में नहीं जोड़ सकेंगे।
ये भी पढ़ें: बंगाल में चुनावी जंग तेज: 'झालमुड़ी और मछली' पर सियासी संग्राम, ममता और बीजेपी आमने-सामने
पहले मप्र के 4 लाख हितग्राहियों को नोटिस जारी किए गए थे। जो अपना कारोबार चलाते हैं या इनके नाम पर टेन और पेन नंबर है, इसकी भी जांच पड़ताल की जा रही है। इनका राशन रोका गया है। खाद्य विभाग के अफसर और मंत्री उपलब्ध नहीं हुए, इस मामले की जानकारी के लिए खाद्य मंत्री गोविंद सिंह राजपूत, आयुक्त खाद्य कर्मवीर शर्मा और अपर मुख्य सचिव रश्मि अरुण शमी से संपर्क किया गया लेकिन कोई भी उपलब्ध नहीं हो सके। एक साल में बाहर हुए दो लाख हितग्राहियों के नाम पिछले एक साल (वर्ष 2025) के अंदर मुफ्त में राशन ले रहे 2.60 लाख हितग्राहियों के नाम बाहर किए गए हैं। यह वे हितग्राही है, जो जांच में अपात्र पाए गए, दो जगह से राशन ले रहे थे, आयकर के दायरे में थे अथवा मृत हो गए।
टॉप-5 राज्य जहां सबसे ज्यादा अपात्रों ने नाम हटे राज्य हितग्राही हरियाणा में 13.43 लाख राजस्थान में 6.05 लाख उत्तर प्रदेश में 6.95 पश्चिम बंगाल में 3.75 मध्यप्रदेश में 2.60 लाख नाम हटाने से पहले खाद्य विभाग ने इन हितग्राहियों को उनके नाम हटाने के कारणों के संबंध में बताकर उनकी सुनवाई और जवाब के बाद निर्णय लिया है। मप्र इस मामले में देश में पांचवें राज्य में आता है। पहले नंबर पर हरियाणा और दूसरे में राजस्थान है।
ये भी पढ़ें: Share Market Today: सेंसेक्स में 753 अंक की तेजी, निफ्टी 24,577 पर बंद: FMCG और रियल्टी शेयरों में जोरदार खरीदारी
मध्यप्रदेश में एक साल में 60 हजार हितग्राहियों ने पोर्टेब्लिटी राशन कार्ड का लाभ उठाया है। इन हितग्राहियों ने जहां राशन कार्ड बनवाया था, वहां से ये लोग राशन नहीं ले रहे हैं, हितग्राही दूसरे राज्य और जिलों से राशन ले रहे हैं। बताया जाता है कि यह सभी हितग्राही काम काज की तलाश में अपने जिले और क्षेत्र से दूसरे जिलों में चले जाते है। वहां ये हर महीने अपने हिस्से का खाद्यान्न ले रहे हैं। मप्र का 5.38 करोड़ का कोटा केंद्र सरकार ने मध्यप्रदेश के लिए पीडीएस में पांच करोड़ 38 लाख परिवारों को खाद्यान्न कोटा तय किया है। वर्तमान में प्रदेश में पांच करोड़ 46 लाख परिवारों को पीडीएस के जरिए खाद्यान्न वितरण किया जा रहा है। इसी को लेकर मधु वर्मा ने बताया कि मेरा नाम पीडीएस की सूची में था। लेकिन पिछले तीन महीने से खाद्यान्न नहीं मिल रहा है। इसकी वजह एक ऑटो खरीदना बताया जा रहा है।