क्या मिडिल ईस्ट का टकराव दुनिया के लिए खतरा ?
इंटरनेश्नल डेस्क। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव ने दुनिया के आर्थिक माहौल को अस्थिर करना शुरू कर दिया है। खासकर अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच हालात पर निवेशकों और बड़े व्यापारिक समूहों की नजर बनी हुई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनिश्चितता भी बढ़ने लगी है। कई देशों के शेयर बाजारों में भारी गिरावट देखने को मिल रही है निवेशक सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं। आर्थिक विशेषज्ञों का मानना हैं कि-अगर तनाव लंबे समय तक बना रहा तो वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला बाधित होगी,व्यापार में कमी आएगी और निवेश में अनिश्चितता पैदा होगी।
तेल की कीमत तेजी से बढ़ेगी
मध्य पूर्व में तेल सऊदी अरब,ईरान,इराक,कुवैत,संयुक्त अरब अमीरात,कतर,ओमान और यमन के हाइड्रोकार्बन भंडारों से आता है दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडारण में से एक माना जाता है। दुनिया की 30 से 35 फीसदी यहीं से तेल सप्लाई होती है ऐसे में यहां किसी भी तरह का सैन्य तनाव सीधे तौर पर तेल की सप्लाई को प्रभावित करेगा और इससे तेल की कीमतों भारी इजाफा हो सकता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत तेजी से बढ़ सकती है इसका सीधा असर पेट्रोल डीजल की कीमतों पर पड़ सकता है। इसी के साथ ट्रांसपोर्ट,बिजली,उत्पादन और रोजमर्रा की चीजों के दाम भी बढ़ सकते हैं।
वैश्विक व्यापार और सप्लाई चेन पर असर
आज की दुनिया एक-दूसरे से जुड़ी हुई अर्थव्यवस्थाओं पर टिकी है। कई देशों के उद्योग कच्चे माल और तकनीक के लिए अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर निर्भर हैं। युद्ध की स्थिति बनने पर शिपिंग रूट,हवाई मार्ग और व्यापारिक समझौते प्रभावित होंगे,इससे सामान की डिलीवरी में देरी और लागत में बढ़ोतरी होने लगती है। खासकर इलेक्ट्रॉनिक्स,ऊर्जा और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर इसका ज्यादा असर पड़ेगा।
शेयर मार्केट में भारी गिरावट
अमेरिका-इजराइल और ईरान तनाव से सबसे ज्यादा सोमवार को शेयर बाजार प्रभावित रहा है इसमें भारी गिरावट देखने को मिली है,टोक्यो से न्यूयॉर्क तक हाहाकार मचा हुआ है। आज भारतीय शेयर बाजार भी गिरावट के साथ खुला,सेंसेक्स 2743 अंक टूटकर 78543 पर खुला। इसी के साथ निफ्टी 519 अंक गिरकर 24659 अंक पर खुला। बैंक निफ्टी में 1300 से ज्यादा अंकों की गिरावट दर्ज की गई।