भोपाल: रहवासी इलाकों में कारोबार पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई टली, 62,500 दुकानों पर फैसले का इंतजार

भोपाल। सुप्रीम कोर्ट के 5 अगस्त के आदेश के बाद नगर निगम ने आवासीय क्षेत्रों में चल रहे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को नोटिस देना शुरू किया था। करीब 15 दिन की कार्रवाई में 8,084 प्रतिष्ठानों को नोटिस दिए गए और इसके बाद तीन दिन में 190 प्रतिष्ठान बंद किए गए थे। कार्रवाई के विरोध में व्यापारियों के सड़क पर उतरने के बाद निगम ने अभियान रोक दिया, जबकि रहवासियों ने कार्रवाई को लेकर निगम पर पक्षपात और गलत रिपोर्ट देने के आरोप लगाए हैं।
62,500 प्रतिष्ठानों को लेकर सुनवाई टली
भोपाल के रहवासी इलाकों में करीब 62 हजार 500 प्रतिष्ठान बताए गए हैं, जिनके व्यावसायिक उपयोग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में मामला चल रहा है। मंगलवार को इस मामले में सुनवाई होनी थी और फैसले की उम्मीद थी, लेकिन संबंधित जस्टिस के अवकाश पर होने के कारण सुनवाई नहीं हो सकी। अब मामले की अगली तारीख बाद में तय होगी। नगर निगम अपनी ओर से अब तक की गई कार्रवाई की रिपोर्ट कोर्ट में पेश कर चुका है।
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5 अगस्त के आदेश के बाद शुरू हुई कार्रवाई
सुप्रीम कोर्ट के 5 अगस्त के फैसले के बाद नगर निगम ने पूरे भोपाल में आवासीय क्षेत्रों में चल रहे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को नोटिस जारी किए थे। करीब 15 दिन तक नोटिस देने की कार्रवाई चली। इस दौरान सूची में शामिल 62 हजार 500 प्रतिष्ठानों में से 8,084 को नोटिस दिए गए। इसके बाद निगम ने तीन दिन तक कार्रवाई करते हुए 190 प्रतिष्ठानों को बंद किया था। कार्रवाई के विरोध में व्यापारी सड़क पर उतर आए थे, जिसके बाद अभियान रोक दिया गया।
रहवासियों ने निगम की रिपोर्ट पर उठाए सवाल
दूसरी ओर, रहवासी नगर निगम के जिम्मेदार अधिकारियों पर पक्षपात करने का आरोप लगा रहे हैं। याचिकाकर्ता विवेक त्रिपाठी ने निगम की एक्शन टेकन रिपोर्ट पर आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि रहवासियों की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दस्तावेज पेश किए गए हैं, जिनमें निगम की कार्रवाई को गलत बताया गया है। उनका दावा है कि जिन प्रतिष्ठानों को सील या बंद किया गया था, उनमें से कई दोबारा खुल गए हैं।
हाईकोर्ट के स्टे ऑर्डर भी हुए थे निरस्त
भोपाल में आवासीय भवनों के व्यावसायिक उपयोग और अवैध निर्माण के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अगस्त के पहले सप्ताह में सुनवाई की थी। कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार को झटका देते हुए राज्य सरकार की ओर से गठित 10 सदस्यीय जांच समिति की कार्रवाई पर रोक लगा दी थी। साथ ही मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से दुकान संचालकों को मिले राहत संबंधी सभी स्टे ऑर्डर भी निरस्त कर दिए थे। सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया था कि उसके निर्देश पर चल रही जांच में किसी तरह का हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जाएगा।
नगर निगम को कोर्ट में देनी थी कार्रवाई की रिपोर्ट
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद नगर निगम को अब तक की कार्रवाई की रिपोर्ट पेश करनी थी। इसी के चलते शहर में नोटिस और सीलिंग की कार्रवाई की गई थी। निगम अपनी एक्शन टेकन रिपोर्ट कोर्ट में पेश कर चुका है। वहीं, रहवासियों की ओर से भी निगम की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए अपने दस्तावेज कोर्ट के सामने रखे गए हैं। अब अगली सुनवाई में इन दोनों पक्षों की दलीलों पर आगे की स्थिति साफ होने की उम्मीद है।
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रहवासी क्षेत्रों में कमर्शियल गतिविधियों से परेशानी
रहवासियों का कहना है कि आवासीय इलाकों में कमर्शियल गतिविधियां नहीं होनी चाहिए और ऐसे प्रतिष्ठानों को बंद किया जाना चाहिए। उनका आरोप है कि व्यावसायिक गतिविधियों के कारण शोर, भीड़ और सार्वजनिक शांति भंग होने जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं। इसके अलावा असामाजिक तत्वों की गतिविधियां बढ़ने से सुरक्षा को लेकर भी चिंता है। रहवासियों ने स्कूली बच्चों की सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया है और कहा है कि बढ़ते ट्रैफिक के कारण हादसों का खतरा बना रहता है।




















